पर्यावरण

देश के ये मंदिर प्लास्टिक प्रदूषण पर देश के दूसरे धार्मिक स्थलों के लिए एक उदाहरण हैं

तर्कसंगत

Image Credits: E Daily/Amar Ujala

November 8, 2019

SHARES

सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति के लिए सरकार के प्रयास धीमी या रफ़्तार समय समय पर पकड़ते रह रही है, मगर इन सबके बीच हमारे धर्म स्थल के कुछ ऐसे उदाहरण हैं जो आम जनता के लिए उद्धरण प्रस्तुत कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के कुछ तीर्थ स्थलों में प्लास्टिक पर बैन लगा हुआ है। वाराणसी में काशी विश्वनाथ, संकट मोचन मंदिर, अयोध्या में राम लला विराजमान, हनुमान गढ़ी और मथुरा-वृंदावन में रंगनाथ जी, बांके बिहारी समेत तमाम मंदिरों में प्लास्टिक पैकिंग और पॉलिथीन में रखकर लाए गए प्रसाद को पुजारी भगवान को अर्पित नहीं करते हैं। अगर कोई भक्त ये गलती करके चढ़ावा प्लास्टिक में ले भी जाए तो पुजारी उसे स्वीकार नहीं करते।

 

अयोध्या- रामलला व हनुमानगढ़ी

भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में रामलला विराजमान व हनुमानगढ़ी मंदिर में भी पॉलिथीन में प्रसाद नहीं चढ़ता है। यहां दफ्ती के डिब्बों में लड्डू व पारदर्शी कैरीबैग में इलाइची दाने की बिक्री हो रही है। रामलला विराजमान के पुजारी सत्येंद्र दास ने बताया पहले बर्तन, सोना, चांदी, लड्डू व पेड़ा सहित कई अन्य सामान श्रद्धालु रामलला के दरबार में प्रसाद के रूप में चढ़ाते थे, लेकिन 2002 के बाद स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पारदर्शी पन्नी में इलायची दाना, मिश्री व मूंगफली प्रसाद के रूप में अंदर जाने की अनुमति दी। उसी प्रसाद को अन्य श्रद्धालुओं में बांटा जाता रहा है।

 

वाराणसी- काशी विश्वनाथ मंदिर

पिछले पांच महीने से भगवान भोलेनाथ की अविनाशी काशी में स्थित विश्वनाथ मंदिर में पॉलिथीन पर प्रतिबंध है। मंदिर के एसडीएम विनोद सिंह ने बताया कि प्रसाद जो भी भक्तों को दिया जाता है, उसे कागज के डिब्बों में रखा जाता है। कुछ भक्त जो बाहर से प्रसाद लेते है, अगर पॉलिथीन साथ ले जाते हैं तो चेकिंग स्पॉट पर हटा दिया जाता है। दूध और जल के लिए कागज में मोटे गिलास का ही इस्तेमाल होता है।

 

वाराणसी- संकट मोचन मंदिर

संकट मोचन मंदिर के महंत प्रोफेसर विशंभर नाथ मिश्रा के छोटे भाई डॉ. वीएन मिश्रा ने बताया कि, मंदिर में बीते आठ वर्षो से पॉलिथीन पर प्रतिबंध है। यह भारत का ऐसा मंदिर है, जहां पेड़ के पत्तों से बने दोना और पेटारी में संकट मोचन को प्रसाद चढ़ता है। मुख्य द्वार पर बकायदा प्लास्टिक, मोबाइल अन्य सामानों को चेक करने के बाद ही अंदर जाने दिया जाता है। इलेक्ट्रॉनिक सामान भी अंदर नहीं जाता है।

 

मथुरा- रंगनाथ मंदिर

रंगनाथ जी मन्दिर में सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं होता है। मन्दिर की सीईओ अनघा श्रीनिवासन ने बताया कि मन्दिर में पिछले 20 सालों से पॉलिथीन का उपयोग नहीं किया जाता है। अगर कोई श्रद्धालु बाहर से पॉलिथीन में प्रसाद लेकर आता है तो उसे निकालकर डलिया में रखकर की भगवान के समक्ष अर्पित किया जाता है। मन्दिर की रसोई में प्लास्टिक के बर्तन भी उपयोग नहीं किए जाते हैं। दक्षिण शैली के मंदिरों में प्लास्टिक को अशुद्ध माना गया है। मंदिर में पानी की पाइप लाइन भी लोहे की हैं। उत्सवों के दौरान मन्दिर में होने वाले भंडारों में भी पत्तल, दौनों का उपयोग किया जाता है।

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...