सप्रेक

सपना था डॉक्टर बनने का मगर आज व्हीलचेयर पर बैठ दूसरों के सपने पूरे करते हैं

तर्कसंगत

November 11, 2019

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एक सड़क हादसे में 18 वर्ष पहले अपने शरीर का आधा हिस्सा गवां चुके गोपाल खण्डेलवाल अपने दोनों पैरों के सहारे दो कदम भले ही नहीं चल पाते हों, लेकिन अब तक हजारों बच्चों को बगीचे के नीचे निःशुल्क पढ़ाने का काम जरूर कर चुके हैं. गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के साथ ही गाँव के लोगों का जरूरत पड़ने पर मुफ्त में इलाज भी करते हैं. मूल रूप से बनारस में एक साधारण परिवार में जन्मे गोपाल खण्डेलवाल जब 27 वर्ष के थे तो एक सड़क हादसे में इनके कमर के नीचे का पूरा हिस्सा पैरालाइज्‍ड हो गया. तीन वर्ष तक बीएचयू अस्पताल में लगातार इलाज चलने के बाद जब इन्हें अपनी जिन्दगी बोझिल लगने लगी तो इनके मित्र ने अपने गाँव चलने की सलाह दी.

 

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गोपाल के लिए पहले कि तरह सामान्य तरीके से ज़िंदगी जीना मुश्किल हो गया था. वो खुद को अपने आप पर एक बोझ समझने लगे थे. लेकिन वो जीना चाहते थे. इसी दुर्घटना के 6 महीने बाद ही उनकी माँ का भी निधन हो गया. उनकी माँ ने आखिरी वक़्त में उनसे यही कहा था कि कभी हार नहीं मानना और इस बात ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया. यहीं से उन्हें ज़िंदगी दोबारा से जीने कि नयी दिशा मिली.

 

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गोपाल कि मदद के लिए उनके एक दोस्त डॉ.अमित दत्ता आगे आये और वो उन्हें मिर्ज़ापुर गाँव ले आये. गाँव के बाहरी इलाके में उन्होंने गोपाल के लिए एक छोटा सा कमरा बनवा दिया और खाने-पिने का इंतज़ाम भी कर दिया. कुछ दिनों तक गोपाल अकेले ही रहे, फिर धीरे-धीरे लोग उन्हें जानने-पहचानने लग गए. उन्होंने देखा कि गाँव के बच्चों कि पढाई का कोई ख़ास उपाय उस गाँव में नहीं है. इसलिए उन्होंने बिस्तर पर लेटकर ही बच्चों को पढ़ना शुरू कर दिया.

गोपाल ने नॉवल शिक्षा संस्थान नाम शुरुवात की. लेकिन सबसे बड़ी परेशानी बच्चों के माँ-बाप को समझकर उन्हें स्कुल भेजने के लिए राज़ी करना था. धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लायी और वो गाँव के ‘मास्टरजी’ बन गए. बताया जाता है कि पिछले 20 सालों में उन्होंने लगभग 2500 बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी है.अब वो व्हीलचेयर पर बैठकर सुबह 5:30 से शाम 6:00 बजे तक बच्चों कि क्लासेज लेते हैं. गोपाल के इस कदम से बहुत से बच्चों का अच्छे स्कूलों में दाखिला हो गया और जिन माता-पिता के पास पैसे नहीं होते हैं, उनके लिए वो सोशल-मीडिया कि मदद से पैसे जुटाते हैं.

 

Gopal Khandelwal

 

गोपाल की कहानी एक टीवी शो में भी दिखाई गयी थी और उसी के मीडिया हाउस ने उन्हें इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर गिफ्ट की थी. गोपाल का कहना है कि उन्होंने अभी तक ज़िंदगी में यही सीखा है कि कभी हार नहीं माननी चाहिए और साथ ही उनका मानना है कि समाज से जातिवाद और अमीरी-गरीबी के भेद-भाव को केवल शिक्षा के जरिये ही ख़त्म किया जा सकता है.

तर्कसंगत गोपाल के कभी न हारते हुए भी दूसरों की मदद करने वाले जज़्बे को सलाम करता है.

 

 

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