ख़बरें

एनसीआरबी : हर दिन 31 किसानों की आत्महत्या, साल 2016 में 11,379

तर्कसंगत

Image Credits: Development News

November 11, 2019

SHARES

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो ने शुक्रवार को कहा कि भारत में साल 2016 में 11,379 किसानों ने खुदकुशी की है. यह आंकड़ा एनसीआरबी की 2016 की ‘एक्सिडेंटल डेथ एंड सुसाइड’ रिपोर्ट में सामने आया है. रिपोर्ट के मुताबिक, हर महीने 948 या हर दिन 31 किसानों ने आत्महत्या की. इससे पहले 2015 में इससे जुड़ी रिपोर्ट जारी की गई थी. हालांकि रिपोर्ट यह भी बताती है कि साल दर साल खुदकुशी के मामलों में कुछ कमी आई है. 2016 में जहां 11,379 किसानों ने खुदकुशी की तो वहीं 2014 में 12,360 और 2015 में 12,602 किसानों ने आत्महत्या कर ली.

पिछले साल जुलाई 2018 में केंद्र सरकार ने लोकसभा को बताया था कि 2016 में भारत में 11,370 किसानों ने आत्महत्या की थी. लेकिन सरकार ने कहा था कि ये प्रोविजिनल यानी की अनंतिम आंकड़ा है और एनसीआरबी को अंतिम रिपोर्ट जारी करना बाकी था.

भारतीय कृषि की असलियत के अलावा, यह एक कड़वी सच्ची भी दर्शाता है कि सरकार की नीतियों और कार्यान्वयन कितना कुशल है। यह आंकड़ों हमारी आपकी सोचा से परे है क्योंकि इससे एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) और फसल बीमा जैसी अन्य योजनाओं की सफलता पर भी सवाल खड़े करता है.

इस तरह की संख्या देखकर सरकार को ऋण माफी के अलावा और कोई रास्ता नहीं सूझता है, लेकिन सच्चाई ये भी है कि अधिकांश किसान इस फायदे से बाहर रहते हैं और इस तरह के ‘राहत पैकेज’ केवल बैंकिंग प्रणाली पर अधिक दबाव डालते हैं.

भारत में आत्महत्या करने वाले अधिकांश किसान पुरुष थे, क्योंकि महिलाओं ने केवल 8.6% किसानों की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार थे. इस विसंगति का एक कारण यह भी हो सकता है कि खेतों में काम करने वाली बड़ी संख्या में महिलाओं की पहचान किसानों के रूप में नहीं की जाती है.

महाराष्ट्र में दायर एक आरटीआई आवेदन से पता चला है कि 2013 और 2018 के बीच राज्य में 15,356 किसानों की आत्महत्या हुई. इस मामले में दूसरे स्थान पर कर्नाटक है जहां 2016 में 2,079 किसानों ने आत्महत्या की. इससे पहले 2015 में राज्य में 1,569 किसानों ने आत्महत्या की थी. वहीं एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक तेलंगाना में किसान आत्महत्या के मामले करीब आधा हो गए हैं.

पश्चिम बंगाल लगातार किसान आत्महत्या के आंकड़े मुहैया कराने से मना कर रहा है. 2015 और 2016 दोनों साल राज्य सरकार ने दावा किया कि उनके यहां एक भी किसानों ने आत्महत्या नहीं की. साल 2014 में राज्य में 230 किसानों ने आत्महत्या की थी.

इसी तरह बिहार सरकार ने भी दावा किया है कि उनके यहां साल 2016 में एक भी किसान ने आत्महत्या नहीं की. हालांकि कई सारी रिपोर्ट सामने आई हैं जिससे ये पता चलता है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में किसानों ने आत्महत्या की है.

2016 में हाथ में डेटा के साथ, 1995 के बाद से भारत में 3,33,407 किसान आत्महत्या कर चुके हैं, जब एनसीआरबी ने किसान आत्महत्या के आंकड़ों को प्रकाशित करना शुरू किया, द वायर ने बताया।

पहले की रिपोर्टों में आत्महत्या के कारणों की जानकारी और किस वजह से कितने किसानों ने आत्महत्या की, ये सारी जानकारी दी जाती थी. हालांकि इस नई रिपोर्ट में एनसीआरबी ने किसान आत्महत्या के कारणों की जानकारी नहीं दी गई है.एनसीआरबी केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन एक संस्था है.

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...