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देविका मलिक जिन्होनें अपनी शारीरिक अक्षमता को प्रेरणा बना कर जीता ‘वीमेन ट्रासफोर्मिंग इंडिया अवार्ड’

तर्कसंगत

November 14, 2019

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28 साल की उम्र में देविका मलिक युवाओं के लिए एक प्रेरणा का स्रोत हैं. वह एक काबिल खिलाड़ी, अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेता, एक सलाहकार, एक रिसर्च स्कोलर और एक सामाजिक उद्यमी हैं. यह  उपलब्धियां इन्होने आधे शरीर से लकवाग्रस्त होकर भी प्राप्त कर ली है. अपनी इस शारीरिक असमर्थता को एक शक्ति बना कर विकलांगों के लिए समावेशी नीतियों को बढ़ाने और बनाने में भारत और विदेश में अपनी संस्थान, “व्हीलिंग हैप्पीनेस” के द्वारा बढ़ावा दिया है. 

“व्हीलिंग हैप्पीनेस” एक पहल है जिसमे देविका निचले वर्ग से आने वाले विकलांगों को उनकी क्षमता के बारे में जागरूक और उसका सही से इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करती है. यह संस्थान स्कूल और कॉलेज में विकलांग जागरूकता और समावेशी कार्यशाला का आयोजन करता है. निजी और सार्वजनिक क्षेत्रीय कंपनियों को विकलांगों को ज़्यादा से ज़्यादा नौकरी देने के लिए प्रोत्साहित करता है. ये समय समय पर ऑफिस की ऑडिट भी करता है ये जांचने के लिए कि वह विकलांगो के कितने अनुरूप है? “व्हीलिंग हैप्पीनेस” विकलांगों को सही सलाह देना, ड्राइविंग क्लासेज,  प्रोस्थेटिक और ओर्थोटिक्स एड्स, खेल के उपकरण के साथ और भी सुविधाएं देता है. साथ ही साथ, इन्होनें निचले वर्ग के विकलांगों के लिए निजी और सार्वजनिक कंपनियों में पहुँच को आसान किया है. इन्होने दिल्ली के हज़रत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर रैम्पस भी बनवाये हैं. ऐसी ही प्रतिभाशाली नारियों को नीति आयोग द्वारा सम्मान दिलवाने के लिए यहाँ रजिस्टर करें. नामांकन करने की अंतिम तारीख 17 नवंबर 2019 है.



सार्वजनिक स्थानों में विकलांगों के लिए सुविधाएं बढ़ाने का काम वाक़ई में एक बहुत बड़ी चुनौती है. पर देविका इस चुनौती को अपने लिये बाधा बनने नहीं दिया है. कई राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय NGO के सलाहकार पैनलों में इनका नाम है जो विकलांगी समावेशी योजनाओं में अपना योगदान देती हैं. देविका ने कॉमन वेल्थ सेक्रिटेरिएट और कॉमन वेल्थ हेड्स ऑफ़ गवर्नमंट में कई वर्कशॉप करवाएं हैं. वह Disability Summit Charter For Children and Youth with Disabilities के ड्राफ्टिंग कमेटी की सदस्य भी हैं.

देविका को अपने काम के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से सराहना मिली है. 2015 में  उन्हें ब्रिटैन की रानी से Queen’s Young Leader Award से नवाज़ा भी गया है. वह अब कई निगम के साथ काम कर विकलांगों के प्रति जागरूकता जगाना चाहती हैं और अपना सहयोग विकलांग महिलाओं और बच्चों की ओर बढ़ाना चाहती हैं. 


 

 


देविका को उनकी इस पहल के लिए बीते साल भारत सरकार की नीति आयोग ने  वीमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया अवार्ड से  पुरस्कृत किया है. अगर आप भी ऐसी किसी महिला को जानते हैं या आप खुद किसी न किसी तरह से एक बेहतर भारत के निर्माण में सहयोगी हैं तो इस लिंक पर रजिस्टर करें.

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