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इनकी कंपनी ने खोजा है बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक बनाने का आसान तरीका

तर्कसंगत

November 15, 2019

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2013 में डॉ. इज़हील सुब्बीयन ने “स्ट्रिंगबायो” को शुरू कर प्रदूषण से जुड़ी  हमारी चुनौतियों का सस्ता और टिकाऊ उपाय निकाला है. बेंगलुरु में शुरू हुई उनकी कम्पनी मीथेन गैस को एक नए तरीके से इस्तेमाल करती है. प्राकृतिक रूप से पाए गए मीथेन को मोनोमर्स में तब्दील किया जाता है. इन मोनोमर्स से बायो डिग्रेडेबल प्लास्टिक बनाने में उपयोग किया जाता है. इतना ही नहीं इनकी कम्पनी अब इस मीथेन को प्रोटीन में बदलने का तरीका भी खोज चुकी है. ऐसी ही प्रतिभाशाली नारियों को नीति आयोग द्वारा सम्मान दिलवाने के लिए यहाँ रजिस्टर करें. नामांकन करने की अंतिम तारीख 17 नवंबर 2019 है.

कैलिफ़ोर्निया में 10 साल रहने और तीन स्टार्टअप में काम करने के बाद इज़हील ने भारत आकर ये कम्पनी सह स्थापित किया. उनके लिए सबसे अधिक जोखिम का काम था अपनी खुद की कमाई पूंजी को नए तकनीक की खोज में लगाना. ये एक चुनौती है पर अगर ये सफल हो जाये तो इसके लाभ भविष्य में अनेक हैं. अपनी पहली प्रोडक्ट ‘स्ट्रिंग प्रो’ की मदद से इन्होनें प्रोटीन आपूर्ति में हो रहे बड़े अंतर को कम करने का प्रयास किया है.



एक साफ़ सुथरे पर्यावरण और बेहतर भविष्य के लिए वचनबद्ध इनकी कम्पनी को कर्नाटक में टेक स्टार्टअप और कई पुरस्कारों से नवाज़ा गया है. डॉ. इज़हील को उनकी इस पहल के लिए बीते साल भारत सरकार की नीति आयोग ने वीमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया अवार्ड से पुरस्कृत किया है. अगर आप भी ऐसी किसी महिला को जानते हैं या आप खुद किसी न किसी तरह से एक बेहतर भारत के निर्माण में सहयोगी हैं तो इस लिंक पर रजिस्टर करें.

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