सप्रेक

कविता अय्यर, जिनकी कोशिश है हिंदुस्तान के हर गरीब तक विश्व स्तर की दवाइयां सस्ते दामों में पहुंचे

तर्कसंगत

November 15, 2019

SHARES

इस देश में अभी भी अत्याधुनिक चिकित्सा एक लक्ज़री की तरह देखी जाती है. चिकित्सा की दुनिया में नवीन चिकित्सक अविष्कार हुए हैं जो हम सभी जानते हैं कि हमारी कमाई पर कितनी भारी पड़ती है. इसी अंतर में बदलाव लाने के लिए कविता अय्यर रोड्रिगुएज ने “जुमोटोर” जो रिसर्च और डेवलपमेंट के क्षेत्र में बायोलॉजिस्ट्स की मदद करता है और कोशश करता है कि सस्ते दामों में प्रभावी इलाज के तकनीक लोगों तक पहुँच पाए. ऐसी ही प्रतिभाशाली नारियों को नीति आयोग द्वारा सम्मान दिलवाने के लिए यहाँ रजिस्टर करें. नामांकन करने की अंतिम तारीख 17 नवंबर 2019 है. 

जुमोटोर वैज्ञानिक और तकनिकी आविष्कारों से कैंसर और मधुमेह जैसे ऑटो इम्यून बीमारियां यानि के शरीर की कोशिकाओं में बदलाव के कारण उतपन्न रोगों के बीच के अंतर को दूर करने की कोशिश करता है. इनकी कम्पनी ने एक स्कैनिंग मशीन का भी ईजाद किया है जिससे प्रतिनिधित्व एंटीबॉडी के एक बड़े समूह की खोज मुमकिन हुई है. 

 


 


यह इनका दूसरा स्टार्टअप है. उन्हीं  बायो लॉजिक्स में खासा अनुभव है इसके अलावा बायोकॉन जैसे नामी कम्पनी में डेवलपमेंट और रिसर्च में काम कर चुकी 41 वर्षीय कविता एक ऐसा प्लेटफार्म बनाने की कोशिश में लगी हैं जो बड़े और छोटे समय के लिए भी एक सामाजिक लाभ ला सकेगा. उनकी द्वारा तैयार की गयी ऐसी सुविधाों से भारत के गरीबों को भी नयी दवाइयां सस्ते दामों पर मिल सकेगी.

जुमोटोर का एक कार्यालय अमेरिका के बोस्टन शहर में भी है. फंडिंग उनके लिए एक समस्या रही है पर कविता पर इसका असर नहीं पड़ा है. उनकी यह कम्पनी धीरे धीरे ऊंचाइयां चढ़ रही है और अब यह प्रोस्टेट कैंसर का संकेत देने वाले एक मॉलिक्यूल की खोज कर चुकी है, जिसका कि क्लीनिकल ट्रायल होना बाकी है. 

कविता को उनकी इस पहल के लिए बीते साल भारत सरकार की नीति आयोग ने  वीमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया अवार्ड से  पुरस्कृत किया है. अगर आप भी ऐसी किसी महिला को जानते हैं या आप खुद किसी न किसी तरह से एक बेहतर भारत के निर्माण में सहयोगी हैं तो इस लिंक पर रजिस्टर करें.

 

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...