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पराली से कपड़े बनाने का तरीका खोज इन्होनें जीता है ‘वीमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया अवार्ड’

तर्कसंगत

November 15, 2019

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शिखा शाह महिलाओं के लिए ही नहीं, अपने परिवार के लिए भी एक मिसाल हैं. वो अपने परिवार की पहली लड़की हैं जिन्होनें नौकरी के लिए घर छोड़ा. कॉलेज समाप्त करने के बाद अच्छे पैसे वाले काम को नकार कर उन्होनें एक एंटरप्राइज शुरू की जो कृषि अपशिष्ट को अच्छे कपड़ों में बदलता है. उनकी एक अनूठे प्रयास से अभी के समय में पराली जलाने (स्टबल बर्निंग) की हमारी सबसे बड़ी समस्या का आसान सा उपाय है. क्या हम में से किसी ने सोचा होगा कि जो चीज़ हमारे लिए प्रदूषण का कारण है वो किसी का तन भी ढक सकती है? मगर शिखा ने ऐसा कर दिखाया. ऐसी ही प्रतिभाशाली नारियों को नीति आयोग द्वारा सम्मान दिलवाने के लिए यहाँ रजिस्टर करें. नामांकन करने की अंतिम तारीख 17 नवंबर 2019 है.



एक शोध के अनुसार टेक्सटाइल इंडस्ट्री पृथ्वी पर प्रदूषण फैलाने वाली दूसरी सबसे बड़ी इंडस्ट्री है. इनकी “कान्वा फाइबर लैब” पौधों के तने और कृषि अपशिष्ट को स्थायी और कार्यात्मक रूप से बेहतर वस्त्र में तब्दील करता है. उनके बनाये हुए कपड़े कॉटन के अच्छे विकल्प हैं. शिखा शाह बताती है “यह कॉटन से काम पानी इस्तेमाल करता है. कीटनाशक का प्रयोग ना के बराबर है जिससे मिट्टी भी दूषित नहीं होती.” यह कपड़ा कॉटन से बेहतर टिकाऊ है, एंटी बैक्टीरियल है, सारे मौसम में इस्तेमाल करने के लायक है, हानिकारक UV किरणों का भी प्रतिरोधी है और साथ ही साथ मुलायम है. ऐसे कपड़ों की उपज से किसानों को भी फायदा मिलेगा. 



 

वस्त्र मंत्रालय, IIM अहमदाबाद और गुजरात विश्वविद्यालय ने इनकी इस काम को खूब सराहा है. अगले पांच सालों में शिखा अपने वस्त्र उत्पादन को चार गुना और बढ़ाने का लक्ष्य रखती हैं. 23 साल के होते हुए भी, शिखा इस बात का एक प्रमुख उदाहरण है कि अगर उनको मौका दिया जाए, तो वह अपने कल्पना को ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती हैं.

शिखा को उनकी इस पहल के लिए बीते साल भारत सरकार की नीति आयोग ने  वीमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया अवार्ड से  पुरस्कृत किया है. अगर आप भी ऐसी किसी महिला को जानते हैं या आप खुद किसी न किसी तरह से एक बेहतर भारत के निर्माण में सहयोगी हैं तो इस लिंक पर रजिस्टर करें.

 

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