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इन्होनें भारत की पहली कीवी फल की वाइन का व्यापार शुरू कर अरुणाचल के किसानों की मदद की है

तर्कसंगत

November 15, 2019

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अरुणाचल प्रदेश के जिरो वादी में कीवी फल प्रसिद्ध है. अपातानी जनजाति लोगों के क्षेत्र में यह फल बहुतायत में उगाये जाते हैं. इसके मौजूदगी के बावजूद, स्थानीय किसानो को कीवी की बिक्री में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. क्यूंकि खरीदार आयात की हुई कीवी को स्थानीय उगाई हुई कीवी को पसंद करते हैं. 

अगर तागे रीता ताखे “नारा – आबा” नामक वाइनरी में निवेश नहीं करती, तो शायद कीवी की खेती बिलकुल ठप हो जाती. तागे रीता ने इस बुटीक वाइनरी का उद्घाटन 2017 में किया था. उन्होंने भारत की पहली शुद्ध कीवी वाइन का व्यापार अपने निजी बाग़ में उग रहे फलों और राज्य के कीवी उत्पादक सहायक समिति से मंगाए गए फलों से शुरू किया. जो किसान पहले कीवी की उगाई छोड़ गए थे वह इसमें वापस आ गए और इस व्यापार के कारण उनको एक आश्वस्त खरीदार भी मिल गया. ऐसी ही प्रतिभाशाली नारियों को नीति आयोग द्वारा सम्मान दिलवाने के लिए यहाँ रजिस्टर करें. नामांकन करने की अंतिम तारीख 17 नवंबर 2019 है.



हालांकि, वाइन पीना राज्य की जनजातियों का शौक रहा है, पर यहां के पारम्परिक तरीको से बनाये वाइन में प्रेज़रवेटिव का इस्तेमाल नहीं होता. तागे को 6 साल के गहरी अनुसंधान के बाद पारम्परिक वाइनमेकिंग और आधुनिक तकनीकों के बीच का रास्ता ढूंढ सकीं. असम और अरुणांचल प्रदेश में कीवी वाइन की बोतल 1200 रूपए में मिलती है. मगर पूरे देश में इसकी बिक्री के बीच काफी अड़चने हैं पर इसने तागे रीता को अपने ढृढ़ निश्चय से अलग नहीं किया है और अब वह भारत की पहली स्पार्कलिंग वाइन बनाने में लगी हैं. 



रीता को उनकी इस पहल के लिए बीते साल भारत सरकार की नीति आयोग ने वीमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया अवार्ड से  पुरस्कृत किया है. अगर आप भी ऐसी किसी महिला को जानते हैं या आप खुद किसी न किसी तरह से एक बेहतर भारत के निर्माण में सहयोगी हैं तो इस लिंक पर रजिस्टर करें.

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