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लद्दाख की पहली महिला गाइड जो लद्दाखी महिलाओं को आत्मनिर्भर भी बना रही हैं

तर्कसंगत

November 15, 2019

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थिंलास चोरोल लद्दाख की पहली महिला प्रोफेशनल ट्रैकिंग गाइड हैं. इस मुकाम तक का सफर उनके लिए उन ऊँची पर्वतीय श्रृंखलाओं पर चढ़ने से भी ज़्यादा मुश्किल भरा रहा. ये बताने की ज़रूरत नहीं कि जिस पेशे में वह कदम रखने जा रही थी,उसमे अधिकतर पुरुष थे. उनको अपने समुदाय को समझाने में बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. मगर इससे उनका संकल्प कम नहीं हुआ और अंत में उन्होंने Ladakhi Women’s Travel  Company, 2009 में शुरू की और मज़े की बात ये कि जिसमें उन्होनें सिर्फ महिला गाइड और कुली को रखा. ऐसी ही प्रतिभाशाली नारियों को नीति आयोग द्वारा सम्मान दिलवाने के लिए यहाँ रजिस्टर करें. नामांकन करने की अंतिम तारीख 17 नवंबर 2019 है.

थिनलैस की कंपनी सैलानियों के होमस्टे की व्यवस्था आस पास के गाँव में करती है जिससे यात्री क्षेत्र की संस्कृति का अच्छे से और नज़दीक से लुत्फ़ उठा सकें. कंपनी के इस लक्ष्य से लद्दाखी महिलाओं को अपने पैर पर खड़े होने और पैसे कमाने में काफी मदद मिली. इनकी इसी पहल के कारण से स्थानीय महिलाओं को फिर अपने घरों से दूर नहीं जाना पड़ता.



अब तक, इस कंपनी ने 70 महिलाओं को ट्रेनिंग दी है और 8 गाइड, 4 ट्रेनी और 20 स्टाफ को रखा है. ट्रेनी को साल भर का प्रशिक्षण दी जाती है जिसके बाद ही वह ट्रैकिंग गाइड बन सकती हैं. गाइड होने की ट्रेनिंग में उनको इतिहास, स्थानीय संस्कृति, जीव जंतु और पेड़ पौधों के बारे में जागरूक किया जाता है जिससे की ट्रैकिंग से ज़्यादा भी यात्रियों को लद्दाख के बारे में जानने को मिले. सर्दियों का मौसम ऑफ सीजन होता है तो उसमे थिंलास महिलाओं के लिए पैसे कमाने के वैकल्पिक ज़रिये ढूंढती हैं. 



थिंलास को उनकी इस पहल के लिए बीते साल भारत सरकार की नीति आयोग ने  वीमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया अवार्ड से  पुरस्कृत किया है. अगर आप भी ऐसी किसी महिला को जानते हैं या आप खुद किसी न किसी तरह से एक बेहतर भारत के निर्माण में सहयोगी हैं तो इस लिंक पर रजिस्टर करें.

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