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JNU ही नहीं इन संस्थानो में भी छात्रों ने किया है फीस वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन

तर्कसंगत

November 20, 2019

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जहाँ देश में जेएनयू फीस में बढ़ोतरी को लेकर छात्र अपनी माँगो को लेकर अभी भी दिल्ली की सड़को पर प्रदर्शन कर रहे है वहीँ हम सबको इस बात की भी जानकारी होनी चाहिए कि केवल जेएनयू नहीं बल्कि और भी कई कॉलेज हैं जिनकी फीस वृद्धि हुई है.  

देश में इस प्रदर्शन को लेकर मिली जुली प्रतिक्रिया रही है। कुछ लोगो का कहना है की फीस में वृद्धि जायज है, वहीं जेएनयू में पढ़ रहे छात्रों के सोच ठीक इसके विपरीत है उनका कहना कि नए फीस दर का सीधा असर गरीब और पिछड़े वर्ग के छात्रों पे पड़ेगा जिनके माता पीता गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं।

एक नज़र उन कॉलजों पर भी डालते हैं जहाँ इसके पहले कॉलेज की फीस बढ़ाई गयी है।

 

आईआईटी के एमटेक कोर्स की फीस में 900 प्रतिशत का इज़ाफ़ा 

केंद्र सरकार ने सितम्बर महीने में देश के सारे आईआईटी कॉलेजों में एम टेक की पढ़ाई की फीस महंगी कर दी थी। विद्यार्थियों को मिलने वाला 12,400 रुपये स्टाइपेंड भी बंद कर दिया गया। बीटेक वालों की सालाना फीस 2 लाख रुपए है मगर एमटेक प्रोग्राम की फीस 5 हजार से 10 हजार रूपये थी जो बढ़कर 2 लाख रूपये हो गयी। इसे लेकर बॉम्बे के एम. टेक और पीएचडी विद्यार्थियों ने 7 नवंबर को शुल्क वृद्धि के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। आईआईटी काउंसिल द्वारा हाल में कुछ प्रस्तावों को मंजूरी मिली, जिनमें ट्यूशन फीस में 300 प्रतिशत वृद्धि और एम. टेक के विद्यार्थियों को मिलने वाले मासिक वजीफे को खत्म करना शामिल है। छात्रों ने इस ही के विरोध में आंदोलन किया।

एम. टेक और पीएचडी के विद्यार्थियों की फीस आईआईटी से सभी संस्थानों में बढ़ी है। मानव संसाधन मंत्रालय का तर्क है कि बच्चे ऐसे ही एम. टेक और पीएचडी में दाखिला ले लेते हैं जबकि वे इन कोर्सेस को पूरा नहीं करते इसलिए फीस को बढ़ाया जाना चाहिए ताकि केवल जिन्हें ये कोर्स करना हो वो बच्चे ही दाखिला लें।

 

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, उत्तराखंड

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय की छात्र संघर्ष समिति और एनएसयूआइ पहली बार संयुक्त रूप से प्रशासन का विरोध करने सड़क पर उतरी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, छात्रों ने उच्च न्यायालय में इसके खिलाफ याचिका दायर की, जिसे न्यायालय ने सही मानते हुए शुल्क वृद्धि वापस लेने का आदेश दिया लेकिन निजी महाविद्यालयों ने इस आदेश को नहीं माना है। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में इस विरोध प्रदर्शन के साथ एक आंदोलन और चला। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के अनुसार, विधि(एलएलबी) के विद्यार्थियों को हाल ही में ये पता चला कि, विश्वविद्यालय बार काउंसिल ऑफ इंडिया से संबद्ध नहीं है और इसलिए उनकी डिग्री की मान्यता नहीं है।

 

नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बैंग्लोर

इस ही साल जुलाई में नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बैंग्लोर में भी फीस बढ़ाने को लेकर आंदोलन हो चुका है। समाचार वेबसाइट न्यूज़ क्लिक के अनुसार, नेशनल लॉ स्कूल में 1.80 लाख से बढ़ाकर फीस को 2.30 लाख प्रतिवर्ष कर दिया गया था। जिसके विरोध में विद्यार्थियों ने प्रदर्शन किया।

 

हिन्दू विश्विद्यालय दिल्ली

पिछले साल दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू महाविद्यालय में छात्रावास की फीस बढ़ाने को लेकर भी छात्र विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। अगस्त 2018 में महाविद्यालय ने छात्रावास की फीस 51000 से बढ़ाकर 70000 कर दी थी, जिसके विरोध में छात्रों ने आंदोलन किया।

 

बिड़ला इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी

इसके पूर्व मई 2018 में बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नलॉजी साइंस(बिट्स) के छात्रों ने फीस वृद्धि के विरूद्ध आंदोलन किया था। हैदराबाद, गोआ और पिलानी कैम्पस के विद्यार्थियों ने 2018-19 सत्र में बढ़ी हुई फीस के विरोध में प्रदर्शन किया। बिट्स प्रशासन ने हर साल 15 प्रतिशत फीस बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। छात्रों का कहना था कि साल 2011 से हर साल फीस बढ़ाई जा रही थी।

 

गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली

गुरू गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी ने इस साल के शुरूआत में फीस बढ़ाई और जो बच्चे आखिरी साल में थे या जो पास हो चुके थे उन से भी पिछले सालों की फीस बढ़ी हुई फीस के अनुसार जमा करने को कहा। इसके विरोध में विद्यार्थियों ने 2 जून 2019 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर इकट्ठा हो प्रदर्शन किया था। विश्वविद्यालय में 80 से अधिक महाविद्यालय और 20 से अधिक सरकारी संस्थान हैं, जिनमें हज़ारों बच्चें पढ़ते हैं। बच्चों को महज़ 10 से 15 दिन का वक्त फीस जमा करने के लिए दिया गया था।

 

आर्मी इंस्टिट्यूट ऑफ़ लॉ, मोहाली

मोहाली, पंजाब में स्थित आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ के बच्चों ने 15 अक्टूबर 2019 से एक हफ्ते का आंदोलन किया। ये विरोध प्रदर्शन शुल्क वृद्धि के खिलाफ, छात्रावास के समय को रात 11 बजे तक बाध्य न करने और छात्रों के प्रशासन में प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर था।

 

तर्कसंगत का तर्क

दुनिया के 135 देशों की तरह भारत में भी शिक्षा का अधिकार मौलिक अधिकारों की श्रेणी में है। जहां एक तरफ देश की राजधानी दिल्ली में सरकारी विद्यालयों की हालत में सुधार की कई रिपोर्ट्स सामने आई हैं तो वहीं नवोदय जैसे राष्ट्रीय विद्यालय की फीस पिछले साल 200 से 1500 रूपए तक बढ़ा दी गई। हमारा ये मानना है कि उच्च शिक्षा जितनी समाज के निम्न वर्गों के लिए सुलभ होगी, समाज और राष्ट्र में सकरात्मक परिवर्तन उतना जल्दी और ज़्यादा देखने को मिलेगा। सस्ती शिक्षा केंद के कॉलेजों में मिलने के कारण ही कई सारे विद्यार्थी एक बेहतर कल को साकार होता देख सकते हैं।

ये भी सही है कि जहाँ आज कई सारे प्राइवेट कॉलेज है जिनमें पढ़ने के कारण हम सरकारी स्कूल और कॉलेज की एहमियत नहीं समझ रहे हैं और फीस बढ़ने को काफी सामान्य नज़र से देखते हैं। सरकार इस बात पर भी ध्यान दे कि फीस बढ़ने से एक भी विद्यार्थी को अपनी पढ़ाई छोड़नी न पड़े।

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