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मध्य प्रदेश सरकार दवाई बनाने में उपयोग हेतु गांजे की खेती वैध करने की तैयारी में

तर्कसंगत

November 20, 2019

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मध्य प्रदेश सरकार गांजे की खेती को वैध करने की तैयारी कर रही है. इसे भी अफीम की खेती की तरह लाइसेंस दिया जाएगा. इसके लिए वाणिज्यिक कर विभाग ने NDPC नियमों में बदलाव करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है. ये बदलाव इंडसकेन कंपनी के प्रस्ताव पर किया जा रहा है. कंपनी ने गांजे से कैंसर समेत कई असाध्य बीमारियों की दवा बनाने के लिए 12 सौ करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है. कंपनी के इस प्रस्ताव पर सीएम कमलनाथ ने भी सहमति दी है. कंपनी प्रदेश में 25 एकड़ जमीन पर गांजे की खेती करना चाहती है. बता दें कि अभी तक देश में गांजे की खेती और उसे बेचना गैर कानूनी है.

कम्पनी इसके पहले इसकी खेती इंदौर- भोपाल के पास निवेश करना चाहती थी. मगर सरकार ने जबलपुर के पास निवेश की सलाह दी है. कम्पनी ये भी मांग की है कि भविष्य में इन दवाइयों को विदेश में बेचा जायेगा इसलिए इसे वैसे शहर के नज़दीक रखना होगा जहाँ से एयर कनेक्टिविटी अच्छी हो.

 

देश में गांजा बेचना है अपराध

भारत में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टांसेस एक्ट 1985 के तहत देश में गांजे का व्यापर, उपभोग, पैदावार या परिवहन गैरकानूनी है. मगर इसके साथ ही केंद्र  सरकार राज्य सरकारों को ये छूट देती है कि वह इस एक्ट में कुछ परिवर्तन कर गंजे की खेती के लिए सशर्त लायसेंस दे सकता है. ये लाइसेंस लेने वाली कम्पनी को गांजे से बनी दवा को 5 साल तक विदेश में बेचना होगा और उसके बाद ही उस कम्पनी को गांजे को प्रोसेस कर देश में बेचने की अनुमति होगी.

 

 विधेयक संसद में पेश

पत्रिका के अनुसार देश में गांजे का उपयोग दवा बनाने में करने देने के लिए सांसद धर्मवीर गाँधी ने एक निजी विदशीक पेश किया था इसके साथ ही  2018 में तत्कालीन महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गाँधी ने भी इसकी पैरवी की थी. राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में नेशनल ड्रग डिमांड रिडक्शन पालिसी का भी गठन हुआ था. सरकार इस पर अभी तक कोई फैसला नहीं ले पायी है.

 

WHO का पक्ष

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन ने गांजे के इस्तेमाल को कई सारे रोगों के इलाज से जोड़ा है. समय समय पर अपने अनुसन्धान के ज़रिये विश्व के विभिन्न अस्पतालों और रिसर्च सेंटर ने इस चीज़ के पुख्ता सबूत दिए हैं कि गांजे से बनी दवा का इस्तेमाल मस्तिष्क से संबंधित रोगो के इलाज में होता है. अल्ज़ाइमर, पार्किंसन आदि जैसी बिमारियों में गांजे से बनी दवा से लाभ होता है. इसके अलावा फेफड़ो से संबंधित रोग, ग्लौकोमा आदि में भी इन दवाइयों से फायदा हुआ है.

 

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