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क्या कश्मीर में स्थिति सामान्य? धारा 370 को हटाने के बाद से पत्थरबाजी से जुड़े 765 लोगों को गिरफ्तार किया गया

तर्कसंगत

Image Credits: Thalsamayam Online

November 21, 2019

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 केंद्र ने जम्मू-कश्मीर पर अपना सामान्य रुख बनाए रखा है और दावा किया है कि धारा 370 के निरस्त होने के बाद पत्थर फेंकने में काफी कमी आई है, राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से पता चला है कि पिछले तीन महीनों से, 5 अगस्त से 15 नवंबर तक, पथराव / कानून और व्यवस्था से संबंधित 190 मामलों में 765 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 

यह आंकड़ा घाटी में पथराव से संबंधित मामलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। 1 जनवरी से 4 अगस्त 2019 के बीच ये आंकड़ा 361 था। धारा  370 को हटाने के बाद पत्थरबाजी की घटना में दो गुना वृद्धि देखी गई।

मीडिया को संबोधित करते हुए रेड्डी ने कश्मीर में पथराव के खतरे के लिए अलगाववादियों को दोषी ठहराया और कहा, “जांच से पता चला है कि विभिन्न अलगाववादी संगठन और कार्यकर्ता, जो हुर्रियत का हिस्सा हैं , कश्मीर घाटी में पथराव की घटनाओं के मुख्य वजह रहे हैं।

 सशस्त्र बल विशेष शक्ति अधिनियम (AFSPA) के अनुसार, सेना के पास कश्मीर पर नियंत्रण रखने की शक्ति है। वे कश्मीर में सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में किसी को भी गिरफ्तारी वारंट जारी कर सकते हैं।

 

कम हुई पत्थरबाज़ी की घटना 

 श्रीनगर के राजबाग के एक पुलिस अधिकारी ने तर्कसंगत को बताया कि डाउनटाउन श्रीनगर के कुछ अस्थिर क्षेत्रों में, पथराव के मामले कम हुए हैं। अधिकारी ने दावा किया, “मैं इस तथ्य के बारे में निश्चित हूं कि पत्थरबाजी के कम मामले अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद दर्ज किए गए।” 

अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर एक स्थानीय व्यक्ति ने आरोप लगाया कि उनका नाम उस समय पत्थरबाजों की सूची में था जब वह इस तरह की किसी गतिविधि में शामिल नहीं थे। 

अहमद (बदला हुआ नाम) ने कहा, “मेरा एक करीबी दोस्त, जो एक पुलिस अधिकारी था, उसने मुझे बताया कि उसे मुझे गिरफ्तार करने के आदेश मिले है, और कथित तौर पर कश्मीर में लोगों को उकसाने का झूठा आरोप लगाया गया है।अहमद ने कहा, “मेरे पुलिस दोस्त ने मुझे चेतावनी दी और मुझसे आग्रह किया कि जितनी जल्दी हो सके मुझे घाटी छोड़ देना चाहिए”।

अहमद की गवाही, अन्य लोगों के साथ, जिनसे हमने बात की, यह बताती है कि पुलिस घाटी के लोगों को गिरफ्तार कर रही है, भले ही वे उन्हें बिना किसी पुख्ता सबूत के संभावित खतरा या डकैत समझें। 

 

पत्थरबाजो की संख्या में वृद्धि

कश्मीरी फोटो जर्नलिस्ट हाशिम मकबूल ने कहा कि “लोग बिल्कुल भी बाहर आने के लिए तैयार नहीं हैं, वे इस तथ्य से आशंकित हैं कि उन्हें पीएसए के तहत आरोपित किया जाएगा और बिना किसी कारण के हिरासत में लिया जाएगा। 2008 और 2016 के विद्रोह की तुलना में शायद ही कोई हिंसा हुई हो। कश्मीरियों पर तब भी पथराव का आरोप लगाया जाता है जब उन्होंने ऐसा नहीं किया था। 

निरस्त होने के बाद से ही सरकार सामान्य स्थिति में आ गई थी। कश्मीर के सूत्रों ने पुष्टि की कि विरोध अनियमित है। तो, सवाल यह है कि कश्मीर में अगर सब कुछ सामान्य हैं, तो 765 लोगों पर पथराव और पीएसए के तहत आरोप क्यों लगाए गए हैं?

 

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