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26 /11 : अपने पति और बेटी को खोने के बाद भी मैंने कसाब को माफ़ किया

तर्कसंगत

November 26, 2019

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26 नवंबर, 2008. को 52 वर्षीय‘ किआ सकर फ्लोरिडा, में थी थैंक्स गिविंग के अवसर पर वो अपने परिवार से मिलने गई थी। मगर उनके पति एलन और उनकी 13 वर्षीय बेटी नाओमी मुंबई की कम्युनिटी ट्रिप पे थे, जों सिंक्रोनाइज़ेशन फ़ाउंडेशन फॉर मॉडर्न स्पिरिचुअलिटी ने आयोजित की थी।

एलन और नाओमी ओबेरॉय ट्राइडेंट में रह रहे थे। दोपहर बाद, मुझे नमीडिताशन ग्रुप के डिरेक्टर का कॉल आया। उन्होंने मुझसे कहा  “किआ, टीवी चालू करो, मुंबई में एक आतंकी हमला हुआ और ओबेरॉय को निशाना बनाया गया है।”

“लगभग तीन दिनों तक मुझे सिर्फ इतना पता था कि होटल में हमला हुआ है। फिर, 28 नवंबर को, सुबह 6 बजे, मुझे मुंबई में यूएस कॉन्सुलेट से एक कॉल आया उन्होनें मुझे बताया कि एलन और नाओमी की मृत्यु हो चुकी है।” आतंकवादियों ने होटल में अंधाधुन गोलियां चलायीं, लोग टेबल और कुर्सी के पीछे छिपते रहे, कुछ खुशनसीब घायल हो कर भी बच गए. मगर एलन और नाओमी उतने खसोहनसीब नहीं थे।

 

“वे नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं”

किआ कहती हैं “मै कुछ महसूस नही कर पा रही थी, मुझे विश्वास नही हो रहा था, मै सदमे में थी। इन सब के बाद मैंने टीवी पर पहली बार अजमल कसाब को देखा। वो एकलौता आतंकवादी था जो जीवित पकड़ा गया।”

“जब मैंने कसाब को देखा, तो मुझे महसूस हुआ कि वह मेरे बेटे की उम्र का है, और उसी वक्त मेरे मन में यीशु मसीह की सीख याद आयी –” वे नहीं जानते कि वे क्या करते हैं।”

किआ ने इन शब्दों पर जोर देते हुए अपने परिवार से कहा कि वे सभी आतंकवादियों को माफ कर दें। “उस समय, मुझे एहसास हुआ कि ये लड़का और उसके साथी ने कैसे मानवता की सीख से दूर होकर, ऐसा काम किया होगा, और मुझे उन पर दया आई। माफ़ करना  – इसका मतलब अपराधियों को मुक्त करना नहीं है। व्यक्ति को अपने कार्यों के परिणामों का सामना करना चाहिए। क्षमा करना, उस समय, मेरे लिए एक आध्यात्मिक विकल्प था – और मैंने उसे चुना।

“मैंने फैसला किया कि मैं नफरत और हिंसा का जवाब नफरत से नहीं देना चाहती। मैं अपने अंदर के गुस्से को लेकर जीना नहीं चाहती थी। अंधेरे को दूर करने का एकमात्र तरीका उजाला को आने देना है, और प्रेम और क्षमा वही रोशनी है। किसी भी हथियार से प्रेम को नहीं मारा जा सकता। प्रेम मर नहीं सकता।
किआ महसूस करती है कि दुनिया में अराजकता है,। हर जगह बुरी चीजें होती हैं। लेकिन अराजकता के बावजूद भी वह विश्वास करती है कि हमें अपनी आशा नहीं छोड़नी चाहिए।



एक समय ऐसा  भी आता है जब हमें रुक जाना चाहिए। हमें महसूस करना चाहिए कि हम एक दूसरे को जमीन के टुकड़े पर या विचारों में भिन्नता के कारण मार नहीं सकते। मतभेद हमेशा होंगे, या तो आध्यात्मिक या धार्मिक या राजनीतिक मगर इसके लिए हम नफरत और हिंसा का सहारा कैसे ले सकते हैं ?
“हम इंसान हैं और हमें अपने मतभेदों से निपटने के लिए एक अधिक दयालु तरीका खोजना होगा, ताकि कोई और बच्चे या किसी भी इंसान को मरना न पड़े,” किआ कहती हैं।

 

“इस्लाम का मतलब है प्यार”

किआ 2010 में मुंबई गई थी। उन्हें कभी भी उस शहर से महसूस नहीं की। “क्योंकि हम इस आध्यात्मिक संगठन, सिंक्रोनसिटी का एक हिस्सा थे, जिसमें एक वेबसाइट है,  जिसमें दुनिया भर के बहुत से लोगों को हमारे बारे में पता चला। जब उन्हें हमारे बारे में पता चला कि एलन और नाओमी मारे गए हैं, तो मुझे काफी सारे संदेश मिले। “मुझे ईरान, पाकिस्तान और भारत के लोगों से मुसलमानों, हिंदुओं, यहूदियों, ईसाइयों, बौद्धों के संदेश मिले।”

“वे सभी प्रेम और सद्भवना के संदेश थे। एक अरब परिवार ने अपने हाथों से लिख कर मुझे ईरान से एक संदेश भेजा था, जिसमें उन्होनें बताया कि इस्लाम का मतलब है प्यार। हम आपको अपना प्यार और समर्थन भेजते हैं। एलन और नाओमी – वे हमेशा के लिए जीवित रहेंग। “तभी मुझे एहसास हुआ कि दुनिया ज्यादातर अच्छे लोगों से बनी है। आतंकवादी उनमें से बहुत कम प्रतिशत में हैं।”

वह आगे कहती हैं“क्या हो अगर हम चरमपंथियों की तरह ही मारने के बजाय अतिवादियों को चरमपंथियों की तरह प्यार कर सकते ? दुनिया कितनी खूबसूरत जगह होती ”

किआ अब कसाब को माफ़ करने की अपने फैसले पर एक किताब लिख रही है, जिसे 2020 में भारत में पेंगुइन रैंडम हाउस द्वारा जारी किया जाएगा।

किआ कहती है “मैंने कसाब को माफ कर दिया है। मैंने अन्य सभी आतंकवादियों को माफ कर दिया है। वे युवा थे जो जीवन की पवित्रता से अलग हो गए थे, ”

“हम जो हो चुका है उसे बदल नहीं सकते, और हम निश्चित रूप से ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से नहीं रोक सकते। लेकिन कोशिश करना कैसे छोड़ सकते हैं? क्यों न हम उन सभी को क्षमा करें और जो दोषी हैं उन सभी को फिर से शिक्षित करें, दुनिया में दया और धैर्य की बात फैलाएं। हम अपने प्यार और समझ के साथ इस हिंसा को कम कर सकते हैं, और इस प्रक्रिया में कुछ ज़िंदगियाँ बचाये भी जा सकते हैं। मुझे लगता है कि हम यह कर सकते हैं।

जिन्होंने इस घटना में अपने प्रियजनों को खो दिया है, उन्हें किआ कहती हैं: “मैं आपके गुस्से को समझती हूं। गुस्सा महसूस करना ठीक है। आपको इसे बाहर आने देना चाहिए। गुस्सा महसूस करना ठीक है, लेकिन प्रतिकार करना और हिंसा का चक्र बनाना सही नहीं है। क्षमा कुछ ऐसा है जो आप स्वयं को उपहार के रूप में देते हैं ताकि आपको घृणा का सामना न करना पड़े।”

अजमल कसाब को 21 नवंबर, 2012 को फांसी दे दी गई थी। हर साल, 26/11 के आस-पास, किआ कमजोर महसूस करती है। लेकिन उनकी इच्छा शक्ति, करुणा और क्षमा की शक्ति उन्हें आगे बढ़ने के लिए बनाये रखती है।

“मेरी बेटी नाओमी ने हमेशा से कहा था कि वह एक डॉक्टर बनना चाहती थी। वह हार्ट सर्जन बनना चाहती थी और जान बचाना चाहती थी। हम भी सभी की जान बचाते हैं, “वह मुस्कुराते हुए कहती है।

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