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चिन्मयानंद प्रकरण : काफी कोशिशों के बाद भी पीड़िता एलएलएम की परीक्षा नहीं दे पाई

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Image Credits: Amar Ujala/Static

November 27, 2019

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स्वामी चिन्मयानंद मामले में पांच करोड़ रुपए की रंगदारी मांगने की आरोपी पीड़िता को मंगलवार को कॉलेज प्रशासन ने परीक्षा में बैठने से वंचित कर दिया. पीड़िता सुबह शाहजहांपुर जेल से परीक्षा देने बरेली कॉलेज गई थी. सुबह साढ़े सात बजे आई छात्रा दोपहर करीब साढ़े बारह बजे वापस हुई.

पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद के मामले में रंगदारी मांगने की आरोपी छात्रा बीते सोमवार को एलएलएम प्रथम सेमेस्टर की बैक पेपर की परीक्षा देने गई थी. सोमवार को छात्रा को एमजेपी रूहेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से एलएलएम तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा का प्रवेश पत्र नहीं दिया गया था, क्योंकि छात्रा की इस सेमेस्टर में 75 फीसदी उपस्थिति नहीं थी.

जेलर राजेश कुमार राय ने बताया कि पीड़िता पुलिस सुरक्षा में आज सुबह बरेली में एलएलएम तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा में शामिल होने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच भेजी गई. एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार  रंगदारी मांगने के मामले में विशेष जांच दल द्वारा आरोपी बनाई गई पीड़िता स्वामी शुकदेवानंद विधि महाविद्यालय में पढ़ती थी, मगर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पीड़िता का दाखिला एलएलएम तृतीय सेमेस्टर में एमजेपी विश्वविद्यालय बरेली में कराया गया है. सोमवार को पीड़िता का एलएलएम प्रथम सेमेस्टर की बैक पेपर परीक्षा है इसीलिए पीड़िता को विश्वविद्यालय परीक्षा दिलाने ले जाया गया है. छात्रा की पढ़ाई बाधित ना हो इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर स्वामी चिन्मयानंद के कॉलेज के बजाय बरेली के एमजेपी विश्वविद्यालय में उसका प्रवेश कराया गया है.

जागरण के अनुसार एमजेपी रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के विधि विभाग के विभागाध्यक्ष अमित सिंह ने बताया कि चिन्मयानंद प्रकरण में शाहजहांपुर की जेल में बंद पीड़िता तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा देने आई थी परंतु उसके पास प्रवेश पत्र नहीं था क्योंकि उसकी उपस्थिति 75 प्रतिशत नहीं होने के कारण उसे प्रवेश पत्र जारी नहीं किया गया था.

पीड़िता का कहना है कि यदि उसे पुलिस अभिरक्षा में कक्षा अटेंड करने की अनुमति दी जाती तो उपस्थिति कम नहीं होती. इससे पहले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार के डॉ. सुनीता पांडेय ने कहा कि फिलहाल कोर्ट ने छात्र को 75 फीसद उपस्थिति में छूट नहीं दी है. ऐसे में नियमानुसार उसे रेगुलर परीक्षाओं में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जा रही है. अगर छात्र हाईकोर्ट या न्यायालय का कोई फैसला लेकर आती है तो उस पर अमल किया जाएगा. छात्रा के वकील कलविंदर सिंह का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर छात्र का प्रवेश रुहेलखंड विश्वविद्यालय में हुआ था. वह जेल में बंद है ऐसे में भला वह कक्षा में कैसे जा सकती थी. इसलिए उसे परीक्षा देने की अनुमति प्रदान करने में किसी तरह की अड़चन नहीं आनी चाहिए.

 

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