मेरी कहानी

मेरी कहानी : कॉलेज पहुंचते-पहुंचते मुझे समझ आ गया था कि मैं महिलाओं से आकर्षित नहीं हूं, मैं एक Queer हूं.

तर्कसंगत

Image Credits: Humans Of Bombay

November 29, 2019

SHARES

मैं हमेशा अपने मन में एक रानी थी. बचपन में मैं मम्मी-पापा के जाने का इंतज़ार करता था ताकी मैं मां का मेकअप लगाकर, ज़ेवर पहनकर और ज़ोर-ज़ोर से गाने लगाकर डांस कर सकूं. ये बाहर नहीं, घर की चार दिवारी में ही होता. मुझे हमेशा लोगों के सवालों से, Bully करने से और दूर कर देने से डर लगता. 7वीं कक्षा में मुझे मेरे एक दोस्त ने छक्का कहा, मुझे समझ नहीं आया कि मुझे कैसे रिएक्ट करना चाहिए. एक संयुक्त परिवार में बड़े होने के कारण मेरी आवाज़ अनसुनी ही रह गई. मेरे रिश्तेदारों ने भी मुझ पर उंगलियां उठाईं कि मैं लड़कों जैसी हरकतें क्यों नहीं करता. रिश्तेदारों को लगा कि मेरे साथ कुछ गड़बड़ है और उन्होंने मेरे से बात-चीत तक बंद कर दी. ज़िन्दगी का ज़्यादातर वक़्त मैंने घुटते-घुटते और अपनी सच्चाई से भागते हुए बिताया. कॉलेज पहुंचते-पहुंचते मुझे समझ आ गया था कि मैं महिलाओं से आकर्षित नहीं हूं, मैं एक Queer हूं.

मैंने अपने दोस्तों को बताने का निर्णय लिया और उन्होनें ने भी मेरे बताने के बाद मेरे इस फैसले को सेलिब्रेट किया. माता-पिता का रिएक्शन ठीक इसके उलटा था और वो बिल्कुल सन्न रह गए. मुझसे कहा गया कि मैं थेरेपी लूं और ये सिर्फ़ एक ‘फ़ेज़’ है. 25 साल लड़ने के बाद जब मुझे लगा कि जीत मेरी हुई मुझे याद दिलाया गया कि अभी ये ख़त्म नहीं हुआ. मेरे लिए माता-पिता की उम्मीदों पर ख़रे उतरना है सबसे बड़ा लक्ष्य था. मुझे ये एहसास हुआ कि किसी और के लिए जीना, और वो करना जो उनके अनुसार मेरे लिए सही है- ऐसी ज़िन्दगी मैं नहीं जीना चाहता.

पूरा बचपन मैं सामाजिक दायरों के आस-पास ही चला पर अब बहुत चुका था. मैं बेड़ियां तोड़कर आज़ाद होना चाहता था. जब में फैशन डिजाइनिंग के प्रोफेसर के तौर पर बच्चों को पढ़ाता हूँ, तो मैंने अपनी ही तरह की एक और लड़की को देखा जो मेरी ही तरह अपनी परेशां थी. मैंने उससे बात की और उसे अपनी कहानी बताई. उसे एहसास हुआ कि बस वो अकेली नहीं ही. वो अब बहुत अच्छा कर रही है, उसके ग्रेड्स भी अच्छे होने लगे. मैं कैसा दिखता हूं और मेरे Sexual Preferences क्या हैं इससे मेरे बहुत से छात्रों को कोई फ़र्क नहीं पड़ता. मुझे कोई ऐसा भी मिल गया है जिसे में अपनी ज़िन्दगी की मोहब्बत कह सकता हूं. मेरे माता-पिता अभी भी मेरी Sexuality के सवाल को टाल देते हैं. पर ठीक है मैं ख़ुद से ख़ुश हूं और मुझे सच से डर नहीं लगता. क्या यही वो तरीका नहीं जिसके हिसाब से सभी को जीना चाहिए?

 

“I was always a queen in my head. As a child, I’d wait for my parents to go out, so that I could try on my mom’s make-up…

Posted by Humans of Bombay on Wednesday, 20 November 2019

 

 

 

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...