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वर्ल्ड डिसेबिलिटी डे: RRB ग्रुप D की भर्ती परीक्षा में हुई अनियमितता के विरोध में धरने पर 6 दिन से बैठे हैं दिव्यांग

तर्कसंगत

Image Credits: Janjwar

December 3, 2019

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ये खबर लिखते कुछ खासा ख़ुशी नहीं हो रही वो भी आज के दिन. आज यानी मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस है लेकिन रेलवे की ग्रुप डी की भर्तियों में कथित धांधली के खिलाफ सैकड़ों दिव्यांग मंडी हाउस चौराहे पर छह दिन से भूख हड़ताल कर रहे हैं. दिव्यांगों की हड़ताल सोमवार को भी जारी रही. ठंड के थपेड़ों के बीच भूखे पेट जमीन पर सोने की वजह से कई छात्र-छात्राओं की तबीयत खराब हो गई और उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचाया गया है.

 

छात्र कर रहे हैं धांधली का दावा

विकलांग उम्मीदवारों का कहना है कि वो 2018 में रेलवे भर्ती बोर्ड के ग्रुप डी की लिखित परीक्षा में पास हो गए थे. हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार लिखित परीक्षा का रिजल्ट जब आया तब कट ऑफ मार्क नहीं दिखाया गया था. जो लोग लिखित परीक्षा में पास हुए थे उन्हें कहा गया था कि डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होगा. छात्र डाक्यूमेंट बनवाने में जुट गए. लेकिन कुछ दिन के बाद रेलवे ने इस परीक्षा में सीट बढ़ा दी. फिर दोबारा रिवाइज नतीजा आया लेकिन इसमें इन विकलांगों का नाम नहीं था. जो विकलांग प्रदर्शन करने आएं हैं उनको तो पहले लिखित परीक्षा में पास कर दिया गया, फिर बिना कारण बताए फेल भी कर दिया गया. इनका डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन नहीं हुआ लेकिन बाद में इन्हें बताया गया कि डॉक्यूमेंट वेरिकेशन के बाद यह लोग फेल हैं.

उम्मीदवारों का कहना है कि जब एग्जाम के फॉर्म भरे गए थे तब सिर्फ 7 कैटेगरी की बात कही गई थी लेकिन सीट बढ़ाने के साथ-साथ और 14 कैटेगरी जोड़ दी गई. यानी कुल-मिलाकर कैटेगरी 21 हो गई. रेलवे में जब रिवाइज नोटिस निकाला तो उसमें सीट को लेकर कई परिवर्तन भी थे. नोटिफिकेशन के समय कई जोन में सीट ही खाली नहीं थीं जिसकी वजह से उम्मीदवारों ने वहां फॉर्म ही नहीं भरा था लेकिन जब सीट बढ़ाई गई तो कई जोन में सीट बढ़ा दी गई. सवाल है कि जिन जोन में फॉर्म ही नहीं भरा गया तो वहां सीट बढ़ाने के बाद नौकरी किसको दी जा रही है? जबकि बोर्ड परिवर्तन करने का विकल्प भी नहीं दिया गया था.

उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि आवेदन के समय मल्टीपल डिसेबल्ड कैटोगरी के तहत बोथ लेग और बोथ हेड का विकल्प नहीं था लेकिन रेलवे बोर्ड ने मल्टीपल डिसेबिलिटी सीट बढ़ाकर उसका रिजल्ट कैसे दिखाया है. जब इस कैटेगरी के तहत सीट नहीं थी तो जाहिर सी बात है कि कैंडिडेट ने उस कैटेगरी के तहत फॉर्म ही नहीं भरे होंगे तो फिर रिजल्ट में किन अभ्यर्थियों को लिया गया है?

 

रेलवे का जवाब चौंकाने वाला

रेलवे ने बुधवार को कहा दिव्यांगजनों की नियुक्ति से संबंधित सभी आवश्यकताओं को नियमों के तहत पूरा किया गया है और अभी उन्हें समायोजित करने के तरीके खोजने की कोशिश की जा रही है, लेकिन मंडी हाउस में प्रदर्शन कर रहे दिव्यांग प्रदर्शनकारियों की नाजायज मांगों को पूरा नहीं किया जा सकता. विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार रेलवे ने कहा कि उसने समूह द्वारा नौकरियों के लिए विचार के लिए प्रस्तुत 10 रेलवे जोन में 184 ‘दिव्यांगजन’ उम्मीदवारों की सूची की जांच की है, जिसमें पाया गया कि किसी ने भी क्वालिफाई करने के लिए जरूरी 28 प्रतिशत अंक हासिल नहीं किए हैं.

 

तर्कसंगत का तर्क

तर्कसंगत रेल मंत्रालय और विभिन्न अधिकारीयों से उम्मीद करता है कि मंडी हाउस में धरने पर बैठे सैंकड़ों दिव्यांगों की ज़रूरत और उनकी मांग पर विभाग ध्यान दे. उम्मीदावरों द्वारा उठायी गयी सवालों का तर्कपूर्ण और संतोषप्रद दिया जाए जिससे कि रेल मंत्रालय के जवाब को भी संशय की निगाह से न देखा जाए. विश्व दिव्यांग दिवस पर सरकार कम से कम इतना तोहफा तो अपने दिव्यांग को दे ही सकती है.

 

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