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सुमित्रा महाजन: कांग्रेस नेताओं के जरिए उठाती थी मुद्दे

तर्कसंगत

Image Credits: Bartaman Patrika

December 4, 2019

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पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और भाजपा के दिग्गज नेता सुमित्रा महाजन ने स्वीकार किया कि जब मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री, शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार राज्य में सत्ता में थी वह अपने कांग्रेस के समकक्षों से अपने निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित मुद्दों को उठाने के लिए अनुरोध करती थीं। महाजन ने कहा कि उन्होंने चौहान पर कोई बहस या प्रतिवाद नहीं किया क्योंकि वह उस भाजपा का हिस्सा थीं जिसने पिछले साल तक मध्य प्रदेश पर शासन किया था।

“अगर मेरी सरकार सत्ता में थी, तो मैं उनके खिलाफ नहीं बोल सकती थी, लेकिन मुझे लगा कि इंदौर के लोगों के कल्याण के लिए मुद्दों को उठाने की जरूरत है। मैंने विनम्रतापूर्वक कांग्रेस के नेता जीतू पटवारी और तुलसी सिलावत से अनुरोध किया कि कुछ मुद्दों को उठाय। सुमित्रा महाजन ने 1 दिसंबर, रविवार को इंदौर में मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन की अध्यक्षता में एक कार्यक्रम में यह बात कही थी।

 

 

उन्होंने यह भी कहा कि इंदौर के विकास को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया था। पूर्व अध्यक्ष ने कहा,”जब हमारा एजेंडा इंदौर को विकसित करना है, तो हम पार्टी की राजनीति को ध्यान में नहीं रखते हैं।” उन्होंने कहा, “मैं पार्टी के अनुशासन के साथ बंधी हुई थी, इसलिए पिछली राज्य सरकार के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बात नहीं कर सकती थी।”

उनके बयान को मप्र के स्वास्थ्य मंत्री तुलसीराम सिलावट ने सराहा। शिवराज सिंह चौहान ने 2005 और 2018 के बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में भाजपा का प्रतिनिधित्व किया। पिछले साल दिसंबर में, वह बहुमत हासिल करने में विफल रहने के बाद कांग्रेस से राज्य का चुनाव हार गए और उनकी जगह कमलनाथ को लाया गया। सुमित्रा महाजन, जो 2014 से 2019 तक 16 वीं लोकसभा की स्पीकर थीं, ने इस साल की शुरुआत में घोषणा की थी कि वह 2019 का आम चुनाव नहीं लड़ेंगी।

 

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