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संसद में अब नहीं मिलेगी सब्सिडी वाली स्वादिष्ट थाली, 17 करोड़ की होगी सालाना बचत

तर्कसंगत

Image Credits: The Hindu/Huntpng

December 5, 2019

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संसद की कैंटीन में सांसदों को मिलने वाले सस्ते खाने का मसला अक्सर खबरों में बना रहता है. कई बार लोग सवाल उठाते रहे हैं कि सांसदों को खाने पर इतनी सब्सिडी क्यों दी जा रही है. महंगाई के मुद्दे पर घिरी सरकार ने देश की संसद में सांसदों, आगंतुकों और पत्रकारों के लिए बनी कैंटीन पर बड़ा फैसला किया है.

लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के सुझाव के बाद बिजनेस एडवाइज़री कमेटी ने इस मुद्दे पर चर्चा की थी. जिसमें सभी पार्टियों ने इस मसले पर सहमति जताई है. अगर संसद की कैंटीन से सब्सिडी को हटा दिया जाता है तो इसमें 17 करोड़ रुपये सालाना की बचत होगी. अब सब्सिडी हटाए जाने के बाद कैंटीन में खाने के दाम लागत के हिसाब से तय होंगे. पिछली लोकसभा में कैंटीन के खाने के दाम बढ़ा कर सब्सिडी का बिल कम किया गया था.

संसद की कैंटीन में मिलने वाली सब्सिडी कई बार विवादों का हिस्सा रही है. बीते दिनों संसद की कैंटीन की रेट लिस्ट भी वायरल हुई थी. सब्सिडी के तहत देश के सांसदों के संसद की कैंटीन में खाना काफी कम दाम पर मिलता था.


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बता दें सूचना के अधिकार के तहत दिए गए ब्योरे के मुताबिक, वर्ष 2012-13 से वर्ष 2016-17 तक संसद कैंटीनों को कुल 73,85,62,474 रुपये बतौर सब्सिडी दिए गए. अगर बीते पांच वर्षों की स्थिति पर गौर करें तो पता चलता है कि वर्ष 2012-13 में सांसदों के सस्ते भोजन पर 12,52,01867 रुपये, वर्ष 2013-14 में 14,09,69082 रुपये सब्सिडी के तौर पर दिए गए. इसी तरह वर्ष 2014-15 में 15,85,46612 रुपये, वर्ष 2015-16 में 15,97,91259 रुपये और वर्ष 2016-17 में सांसदों को सस्ता भोजन मुहैया कराने पर 15,40,53365 रुपये की सब्सिडी दी गई.

2017-18 तक संसद में चिकन करी 50 रुपये, प्लेन डोसा 12 रुपये, वेज थाली 35 रुपये और थ्री कोर्स लंच 106 रुपये में मिलता था. ये सब्सिडी वाली रेट लिस्ट सिर्फ सांसदो के लिए थी. इंडिया टुडे के द्वारा दायर RTI के जवाब में जब 2017-18 की रेट लिस्ट सामने आई थी, तो उसमें सब्सिडी के तौर पर मिलने वाले खाने के दाम का पता चला था.

एक आंकड़े के मुताबिक़ जब संसद चल रही होती है तो यहां खाने वालों में 9 फ़ीसदी तादाद सांसदों की होती है और तीन फ़ीसदी पत्रकारों की. संसद के भीतर कैटरिंग का ज़िम्मा रेलवे संभालती है.

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