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चेन्नई के ऑटो चालक अरुल हर दिन बचा रहे हैं एक बेघर की जान, आखिर कैसे ?

तर्कसंगत

Image Credits: Facebook/Karunai Ullangal Ngo

December 6, 2019

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कहते हैं कि ‘जिसका कोई नहीं, होता, उसका ख़ुदा होता है।’ ऐसा भी कहा जाता है कि भगवान प्रत्यक्ष रूप में आकर नहीं, अपितु अपने किसी नेक बंदे के माध्यम से असहाय की सहायता करते हैं।  ऐसे ही एक शख्स चेन्नई निवासी डी. अरुल राज हैं। अरुल का हिंदी भाषा में अर्थ होता है ‘भगवान की कृपा।

डी. अरुल राज हर दिन एक बेसहारा शख्स को बचाते हैं और उसे किसी शेल्टर होम ले जाते हैं। अरुल पेशे से एक ऑटोरिक्शा चालक हैं। वह 4 घंटे सुबह और 4 घंटे शाम में ऑटोरिक्शा चलाते हैं। बाकी बचे समय को वे रास्ते में बेघर लोगों को खोजने और उनकी मदद करने में बिताते हैं। साल 2017 में 34 साल के अरुल ने ‘करुणई उल्लंगल ट्र्स्ट’ की खोज की थी। यह ट्रस्ट अब तक 320 बेघर लोगों की मदद कर चुका है। इनमें से 120 लोगों को वापस अपने परिवार वालों से मिला दिया गया है।

 

नौकरी से निकाले जाने के बाद समाजसेवा में लगे 

घटना 2015 में चेन्नई में आई बाढ़ के समय की है, जब एक दिन अरुल की पत्नी के पास उनके एक मित्र ने कॉल करके बताया कि वो बाढ़ में फँस गये हैं और उनके पास खाने-पीने के लिये कुछ नहीं है। यह सुन कर अरुल उन्हें खाना पहुँचाने गये, तो उन्होंने देखा कि वहाँ केवल उनका मित्र ही नहीं, अपितु कई अन्य लोग भी फँसे हुए हैं, उन्हें भी मदद की आवश्यकता है। इसलिये अरुल ने एक हाथ-गाड़ी की मदद से उन सभी लोगों को वहाँ से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना ने डी. अरुल राज पर कुछ ऐसा प्रभाव डाला कि जब भी किसी को किसी प्रकार की मदद की आवश्यकता होती तो डी. अरुल राज लोगों की मदद करने के लिये वहाँ पहुँच जाते। रिपोर्ट के अनुसार, अरुल एक बैंक के कलेक्शन डिपार्टमेंट में काम करते थे। साल 2015 में पंक्चुअलिटी इशूज (समय का पालन ना करने) के कारण उन्हें नौकरी छोड़ने के लिए कहा गया। इसके बाद वे सामाजिक कामों में लग गए। वह 6 महीने तक बेरोजगार रहे। यह पूरा समय उन्होंने चेन्नई बाढ़ के बाद शहर की सफाई और मदद तलाश रहे लोगों की मदद करने में लगाया।

उसी समय अरुल ने ‘मक्कल कु उधावलम’ नाम से एक फेसबुक पेज और वॉट्सऐप ग्रुप बनाया। ये खासतौर पर बाढ़ के दौरान लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए बनाए गए। शहर के कई हिस्सों से लोग उनसे मदद मांगते और अरुल उनकी मदद करते। अरुल व उनके साथियों ने बारिश के दौरान लगातार छह महीनों तक बाढ़ राहत और सफाई का काम किया।


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एक छोटी से वाक्ये ने बदली जिंदगी

साल 2016 के अंत में एक बेघर वृद्ध औरत ने शेल्टर होम में शरण दिलाने के लिए अरुल से मदद मांगी। अरुण ने न्यूज़ रिपोर्ट को बताया ‘तब तक मुझे पता भी नहीं था कि शेल्टर होम (आश्रय स्थल या शरण स्थल) होता क्या है। इससे पहले बाढ़ के दौरान भी एक महिला ने मुझसे ऐसा ही एक अनुरोध किया था लेकिन मैं उसकी मदद नहीं कर सका था। अब इस औरत के अनुरोध ने मुझे बेघर लोगों की मदद करने के लिए प्रेरित किया। इसने मेरी जिंदगी को बदलकर रख दिया।’

यह केवल एक शुरुआत थी। जनवरी 2017 में अरुल को किसी ने सूचना दी कि सड़क पर एक बेसहारा शख्स पड़ा है और अगर समय पर उसकी मदद नहीं की गई तो वह मर जाएगा। सूचना मिलते ही अरुल ने बिना किसी देरी के रात को 1.30 बजे उस शख्स को पोरूर के एक निजी शेल्टर होम में भर्ती कराया। अरुल को उस शख़्स भर्ती कराने के बाद उन्हें अलग ही तरह की संतुष्टि मिली। इस घटना के बाद वे ऐसे बेघर लोगों को खोजने और उन्हें शेल्टर होम में दाखिल कराने में लग गए। अरुल रोज 500 रुपये कमाते हैं जिनसे उनके ऑटो के तेल का खर्च चलता है।

 


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डी. अरुल राज 320 से अधिक निराश्रित लोगों को आश्रय दिला चुके हैं और इनमें से कई लोगों को उनके परिवारों से भी मिलवा चुके हैं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत फेसबुक पेज को भी अपनी मुहिम का हिस्सा बना लिया और उसके माध्यम से सामाजिक कार्य को बढ़ावा देने के लिये उसका नाम बदल कर ‘करुणाई उल्लंगल ट्रस्ट’ रख दिया है।

सितंबर 2019 में करुणई उल्लंगल ट्रस्ट ने अपना ऐंड्रॉइड मोबाइल ऐप्लीकेशन लॉन्च किया। इसके जरिए कोई भी बेघर लोगों की फोटो ऐप पर अपलोड कर सकता है। इसके बाद ट्रस्ट अपने वॉलिंटियर्स वहां भेजता है और शख्स की मदद करता है। ऐप के अलावा लोग 9841776685 नंबर पर फोन या एसएमएस करके भी किसी बेघर या बेसहारा शख्स की मदद कर सकते हैं।

 


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डी. अरुल ने 2019 में गूगल प्ले स्टोर में इसी ट्रस्ट के नाम से एक एप्लीकेशन भी लॉन्च की है, जिसके माध्यम से भी लोग उन्हें चेन्नई में निराश्रित लोगों की तस्वीरें भेजते हैं। अरुल जिन निराश्रित लोगों की मदद करते हैं, उनका डेटाबेस भी इस ऐप में मेंटेन करते हैं, जिससे उनके परिवार को खोज कर उनसे संपर्क किया जा सके। अरुल ने लोगों की मदद करने के लिये लॉन पर एक ऑटो रिक्शा भी खरीदा है, जिसकी मदद से वे लोगों की सहायता करने का काम करते हैं।

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