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झारखंड: 33 वर्षीय किसान ने स्कूटर के स्क्रैप से ‘पावर टिलर’ बनाया

तर्कसंगत

Image Credits: ENewsroom

December 12, 2019

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‘जहाँ चाह वहाँ राह’ हम में से कई लोग जानते हैं मगर अपने हर दिन में कितने लोग इस चीज़ को अपनाते हैं। झारखंड के एक अनपढ़ किसान ने इस मुहावरे को जितनी अच्छी तरह से समझा हैउतना किसी ने नहीं।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड के उंचा घाना गांव के रहने वाले 33 वर्षीय महेश करमाली ने बजाज चेतक स्कूटर के पुराने स्क्रैप से ट्रैक्टर बनाया है। उन्होंने अपने 12-कट्ठा खेत की जुताई करने के लिए ट्रैक्टर का निर्माण किया।

करमाली पहले पुणे में बजाज ऑटो शोरूम के लिए काम करते थे, वो इस साल जनवरी में झारखण्ड लौट आये जब उनके परिवार ने वित्तीय संकट के बारे में सूचित किया। उन्होनें घर लौट कर घरवालों की मदद करने का सोचा।

“जब मैं घर लौटा, तो मुझे मेरे भाई ने बताया कि उसने हमारे बैलों को बेच दिया था और खेत की जुताई करने के लिए हमारे परिवार के सदस्यों की मदद ले रहा था। खबर ने मुझे झटका दिया क्योंकि मैंने ही दोनों बैलों को खरीदा था, लेकिन मेरे भाई ने उन्हें बेचने से पहले मुझे सूचित नहीं किया था” करमाली ने ई न्यूज़रूम को बताया।

 

करमाली का कमाल

उन्होंने अपने स्कूटर को खुद से डिजाइन किया और उसके लिए तीन दिनों के लिए लगातार काम किया उन्होनें वो स्कूटर  4,251 रुपये में खरीदा था। उन्होंने अपनी मशीन का नाम ‘पावर टिलर’ रखा।

मशीन की दक्षता पर, उन्होंने कहा कि उन्होंने 12,000 रुपये की लागत से मशीन का निर्माण किया और केवल 2.5 लीटर पेट्रोल की कीमत पर अपने 12 कट्टा खेत की जुताई कर सकते हैं, जो एक पारंपरिक ट्रैक्टर की तुलना में बहुत कम है। उन्होंने यह भी कहा कि बैलों की एक जोड़ी की लागत ट्रैक्टर के पीछे की तुलना में बहुत अधिक थी।

अपनी डिजाइन पर चुटकी लेते हुए, उन्होंने कहा कि वह एक बड़ा और अधिक शक्तिशाली ‘पावर टिलर’ विकसित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान डिजाइन में, एक किसान को हल चलाने के लिए चलना पड़ता है, क्योंकि बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि वह एक ऐसी मशीन विकसित कर सकते हैं जहाँ व्यक्ति मशीन पर बैठ सकता है और ट्रैक्टर की तरह हल चला सकता है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि कुछ टच-अप और बदलाव के साथ, वह फसल काटने और खर पतवार छांटने की मशीन बना सकते हैं।

देश में कृषि संकट, और बैलों की कीमत में वृद्धि को समझते हुए, करमाली गरीब किसानों की मदद करने के लिए अपने अविष्कार को मुख्यधारा में लाना चाह रहे है। उन्होंने कहा कि अब तक, ग्रामीणों ने मशीन की सराहना की है, लेकिन किसी ने भी बड़े पैमाने पर मशीन को विकसित करने के लिए वित्तीय रूप से उनसे संपर्क नहीं किया है।

 

 

 

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