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आरबीआई: SBI ने 11932 हजार करोड़ रूपये के फंसे कर्ज का ब्योरा छुपाया

तर्कसंगत

Image Credits: Economic Times/The News Minute

December 13, 2019

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आरबीआई ने एसबीआई के एनपीए और प्रोविजनिंग के आकंड़ों में अंतर पाया है. सार्वजनिक क्षेत्र के भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की बीते वित्त वर्ष की गैर निष्पादित आस्तियों (NPA) में करीब 12,000 करोड़ रुपये का अंतर पाया गया है.

एसबीआई ने शेयर बाजारों को भेजी सूचना में कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किए गए आकलन के अनुसार बीते वित्त वर्ष में एसबीआई का सकल एनपीए 1,84,682 करोड़ रुपये था. यह बैंक द्वारा दिखाए गए 1,72,750 करोड़ रुपये के सकल एनपीए से 11,932 करोड़ रुपये अधिक है. नेट एनपीए की रिपोर्टिंग में भी 11,932 करोड़ रुपए का अंतर मिला. इस हिसाब से एनपीए की प्रोविजनिंग करने के बाद बैंक को 6,968 करोड़ रुपए का घाटा हो रहा था, लेकिन एसबीआई ने 862 करोड़ रुपए का मुनाफा घोषित किया था.

एसबीआई ने पिछले महीने एक सर्कुलर में कहा था कि अंतर और प्रावधान के बारे में खुलासा महत्वपूर्ण होता है. इसका तत्काल खुलासा करने की जरूरत होती है. इसके अलावा यह सूचना मूल्य की दृष्टि से भी संवेदनशील होती है. ऐसे में सूचीबद्ध इकाई को इसका तुरंत खुलासा करने की जरूरत होती है.

एसबीआई ने 65,895 करोड़ रुपए का नेट एनपीए बताया था. आरबीआई के मुताबिक 77,827 करोड़ रुपए था. एनपीए की प्रोविजनिंग के आंकड़ों में 12,036 करोड़ रुपए का फर्क पाया गया. एसबीआई ने यह रकम 1 लाख 6 हजार 856 करोड़ रुपए बताई, आरबीआई ने 1 लाख 18 हजार 892 करोड़ रुपए का आकलन किया.

प्रोविजनिंग वो प्रकिया हैं जिसमें बैंक अपने प्रॉफिट में से कुछ पैसे अलग रखती हैं जिसका इस्तिमाल बढ़ते एनपीए की घाटे को कम करने के लिए किया जाता है.

 

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