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जामिया के चश्मदीदों का बयान पुलिस ने कैंपस में घुसकर आंसू गैस छोड़े और स्टूडेंट्स को पीटा

तर्कसंगत

December 16, 2019

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जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में नए नागरिकता अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और हिंसक प्रदर्शनकारियों के बीच 15 दिसंबर को हिंसा हुई।

जामिया के कई वीडियो में जो सोशल मीडिया पर वायरल हैं, उनमें पुलिस कैंपस के अंदर आंसू गैस के गोले दागते हुए, लाइब्रेरी और मस्जिद के बाहर छात्रों को घसीटते हुए ले जा रही है और उनके साथ मारपीट कर रही है ऐसा देखा जा सकता है।

पुलिस की कार्रवाई दिल्ली के कुछ हिस्सों में हिंसा भड़कने के बाद हुई जब 1,000 प्रदर्शनकारी पुलिस के साथ भिड़ गए और मथुरा रोड, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, जामिया नगर और सराय जुलना में कम से कम छह बसों और 50 से अधिक वाहनों को आग लगा दी गई।

संघर्ष के दौरान प्रदर्शनकारियों, अग्निशमन और पुलिसकर्मियों सहित 100 से अधिक लोग घायल हो गए। दिल्ली मेट्रो ने एहतियात के तौर पर 11 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास द्वार बंद कर दिए।

इस बीच, जामिया के छात्रों ने हिंसा से खुद को दूर कर लिया, कुछ दिल्ली पुलिस अधिकारियों ने निजी तौर पर यह स्वीकार भी किया कि इसके लिए स्थानीय शरारती तत्व जिम्मेदार थे। “हमारा विरोध शांतिपूर्ण और अहिंसक हैं। एक छात्र ने कहा, “कुछ तत्वों द्वारा हिंसा कर के वास्तविक विरोध प्रदर्शनों को विफल और बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी चिन्मय बिस्वाल ने दावा किया कि हिंसक भीड़ के अंदर जाने के बाद ही पुलिस ने विश्वविद्यालय में प्रवेश किया और पथराव शुरू कर दिया। “हम देख रहे थे कि ये हिंसक गतिविधियाँ हो रही थीं,” उन्होंने कहा।

छात्रों ने कहा कि पुस्तकालय की खिड़कियों में तोड़-फोड़ की गई और लगभग 50-60 छात्र अंदर थे जब पुलिस अधिकारियों ने घेराव किया। पुलिस ने कथित तौर पर पुस्तकालय के अंदर आंसू गैस के गोले दागे।

“कुछ छात्र खुद को बचने के लिए तहखाने में छिप गए। “हमने अपने दोस्तों और विश्वविद्यालय के अधिकारियों को एसओएस संदेश भेजे थे। रोशनी को भी बंद कर दिया गया था, ”एक अन्य छात्र ने अपना नाम न बताने के शर्त पर तर्कसंगत को बताया।

एक अन्य छात्र, मोहम्मद कामिल ने आरोप लगाया, “पुलिस ने परिसर के अंदर मस्जिद में प्रवेश किया और प्रार्थना कर रहे लोगों को परेशान किया। उन्होंने हमारी लाइब्रेरी, कैंटीन को नष्ट कर दिया है और हमें यह नहीं पता है कि क्या क्या हो रहा है।”

एक दूसरे छात्र ने तर्कसंगत को बताया कि सैकड़ों छात्रों को सेंट्रल लाइब्रेरी से हाथ खड़ा कर बाहर निकाला गया। “हमें कैंपस खाली करने और अपने हाथों को हवा में उठा के बाहर आने के लिए कहा गया। हम विरोध स्थल पर मौजूद नहीं थे और परिसर के अंदर थे। हमारे साथ पुलिस द्वारा अपराधियों की तरह बर्ताव किया गया था।

रविवार रात कालकाजी पुलिस स्टेशन में लगभग 50 छात्रों को हिरासत में लिया गया था। वकील और शिक्षक जो बाद में उनसे मिलने गए थे, उन्हें पुलिस स्टेशन में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई थी, और पुलिस स्टेशन के बाहर भारी बरिकॉडिंग हुई थी।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 35 छात्रों को कालकाजी पुलिस स्टेशन से मुक्त कर दिया गया जबकि शेष 15 को न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी से छोड़ दिया गया।

इसके अलावा, जेएनयूएसयू ने जामिया के छात्रों के साथ एकजुटता और उनकी रिहाई के लिए आईटीओ में पुलिस मुख्यालय में एक मार्च का आह्वान किया है। इसमें अंबेडकर और दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों की भी सहमति है।

जामिया के चश्मदीदों का बयान पुलिस ने कैंपस में घुसकर आंसू गैस छोड़े और स्टूडेंट्स को पीटा के हंगामे में पुलिस की कार्रवाई पर विवाद के रूप में, जामिया के चीफ प्रॉक्टर वसीम अहमद खान ने अपने बयान में कहा, “पुलिस परिसर में प्रवेश कर गई है, कोई अनुमति नहीं दी गई थी। हमारे कर्मचारियों और छात्रों को पीटा जा रहा है और उन्हें परिसर छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। ” पुलिस ने जवाब दिया कि स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए यह सिर्फ जरूरतमंद था।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की उपकुलपति प्रोफ़ेसर नजमा अख़्तर ने विश्वविद्यालय में हुई पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए पूरे वाक़ये पर दुःख जताया है। उन्होंने एक वीडियो बयान में कहा,”मेरे छात्रों साथ हुई बर्बरता की तस्वीरें देखकर मैं बहुत दुखी हूं।पुलिस का कैंपस में बिना इजाज़त आना और लाइब्रेरी में घुसकर बेगुनाह बच्चों को मारना अस्वीकार्य है। मैं बच्चों से कहना चाहता हूं कि आप इस मुश्किल घड़ी में अकेले नहीं हैं. मैं आपके साथ हूं. पूरी यूनिवर्सिटी आपके साथ खड़ी है।”

प्रोफ़ेसर नजमा ने कहा, ”मैं इस मामले को जहां तक ले जा सकती हूं, ले जाऊंगी। आपलोग कभी भी अकेले नहीं हैं और घबराइए मत। हम सभी एक साथ हैं और ग़लत ख़बर पर विश्वास मत कीजए।”

 

 

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