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उन्नाव रेप मामले में पूर्व MLA कुलदीप सिंह सेंगर दोषी करार, 30 तारीखों में जानिए केस की महत्वपूर्ण घटनाएं

तर्कसंगत

December 17, 2019

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उन्नाव रेप मामले में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार को दोषी करार दिया है. वहीं, शशि सिंह को कोर्ट ने बरी कर दिया. सेंगर पर अपहरण और हत्या समेत कई मामले दर्ज हैं. तीस हजारी कोर्ट में मंगलवार को सेंगर की सजा पर बहस होगी. सेंगर को 120 बी (आपराधिक साजिश), 363 (अपहरण), 366 (शादी के लिए महिला का अपहरण या उत्पीड़न), 376 (बलात्कार और अन्य संबंधित धाराओं) और POCSO के तहत दोषी ठहराया गया है. माना जा रहा है कि मंगलवार को ही सजा का ऐलान किया जा सकता है.

सेंगर के खिलाफ अपराध सिद्ध हो जाने पर दोषी को न्यूनतम 7 साल और अधिकतम 10 साल की कड़ी सजा दिए जाने का प्रावधान है. कई दुर्लभ मामलों में दोषी को उम्रकैद की सजा भी जा सकती है. इसके अलावा आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकता है.

पॉक्सो शब्द अंग्रेजी से आता है. इसका पूर्णकालिक मतलब होता है प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट 2012 यानी लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम 2012. इस एक्ट के तहत नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई की जाती है. यह एक्ट बच्चों को सेक्सुअल हैरेसमेंट, सेक्सुअल असॉल्ट और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है.

हमारे देश में बलात्कार की घटना कई बार तो रिपोर्ट नहीं होती और अगर हो जाती है तो न्याय प्रणाली की स्थिति के कारण से उसकी प्रक्रिया इतनी लम्बी चलती है क़ी किसी को याद ही नहीं रहता की जुर्म क्या था? अपराधी कौन था? इस मामले में तो उन्नाव में इस घटना के बाद रेप की एक और घटना हुई जिसकी सुनवाई में जा रही पीड़िता को ज़िंदा जला दिया गया. इस मामले में भी पीड़िता को मारने की कोशिश की गयी जैसा कि कहा जा रहा है.

आइये एक नज़र इस बलात्कार मामले से 30 महत्वपूर्ण तारीखों पर डालते हैं :

 

  1. 4 जून 2017: 17 वर्षीय पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसका बीजेपी के विधायक कुलदीप सेंगर के घर पर बलात्कार किया. पीड़िता ने कहा कि वह अपने एक पड़ोसी के साथ नौकरी दिलाने में मदद के लिए विधायक  के पास गई थी.
  2. 11 जून 2017: इसके बाद पीड़िता गायब हो गई. परिवार वालों ने पुलिस में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई.
  3.  20 जून 2017: पीड़िता औरैया के एक गांव से मिली. उसे अगले दिन उन्नाव लाया गया.
  4.  22 जून 2017: पुलिस ने पीड़िता को कोर्ट में पेश किया और सीआरपीसी के सेक्शन 164 के तहत उसका बयान रिकॉर्ड कराया गया. पीड़िता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बयान में विधायक का नाम नहीं लेने दिया.
  5. 3 जुलाई 2017: 10 दिन बाद पीड़िता को उसके परिवारवालों को सौंप दिया गया. पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाकर वह दिल्ली चली गई. इसके बाद उसने मुख्यमंत्री दफ्तर और वरिष्ठ पुलिस अफसरों को शिकायत भेजी. इसमें उसने विधायक और उसके भाई अतुल सिंह के खिलाफ रेप केस दर्ज कराने की मांग की.
  6. 24 फरवरी 2018: पीड़िता की मां ने उन्नाव के चीफ जूडिशल मजिस्ट्रेट कोर्ट का रुख किया और सीआरपीसी के सेक्शन 156 (3) के तहत एफआईआर दर्ज कराने की मांग की.
  7.  3 अप्रैल 2018: कोर्ट ने पीड़िता की मां की अर्जी पर सुनवाई की. इस सुनवाई में लड़की का परिवार भी शामिल हुआ था. इसी शाम, लड़की के पिता को कथित तौर पर अतुल सिंह और उसके सहयोगी मक्खी ने बुरी तरह पीटा. लड़की के पिता को पुलिस को सौंप दिया गया, उन्होंने सेक्शन 25 के तहत मामला दर्ज कराया.
  8. 5 अप्रैल 2018: मेडिकल एग्जामिनेशन के बाद लड़की के पिता को जेल भेज दिया गया. लड़की के पिता ने आरोप लगाया कि उसे फंसाया जा रहा है और विधायक के भाई ने उसे बुरी तरह पीटा. उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.
  9.  8 अप्रैल 2018: इसके बाद पीड़िता ने एमएलए के खिलाफ एफआईआर की मांग करते हुए लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह करने की कोशिश की.
  10.  9 अप्रैल 2018: जिला कारागर से शिफ्ट करने के कुछ ही घंटों बाद जिला अस्पताल में लड़की के पिता की मौत हो गई. इसके बाद 6 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया और मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया गया.  पुलिस ने पीड़िता के पिता के साथ मारपीट करने के आरोप में 4 लोगों को गिरफ्तार किया. ये सभी विधायक कुलदीप सेंगर के सहयोगी थे.
  11.  10 अप्रैल 2018: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया कि युवती के पिता के शरीर पर 14 जगह चोट के निशान थे.
  12.  11 अप्रैल 2018: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पुलिस को यह केस सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया.
  13. 12 अप्रैल 2018: मामला सीबीआई को सौंपा गया और विधायक कुलदीप सेंगर को नाबालिग से रेप का आरोपी बनाया गया.
  14.  13 अप्रैल 2018: कुलदीप सेंगर को सीबीआई ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया. बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया. साथ ही नई एफआईआर दर्ज की गई. उसे एक हफ्ते की     न्यायिक हिरासत में भेजा गया.
  15.  19 अप्रैल 2018: इस मामले में सरकार ने विधायक की वाई श्रेणी सुरक्षा और घर पर तैनात सुरक्षाकर्मी को हटा दिया.
  16.  1 मई 2018 : पीड़िता के परिवार ने पुलिस पर आरोप लगाया कि केस सीबीआई को सौंपने से पहले सेंगर को बचाने की नीयत से शिकायत बदली गई है.
  17.  2 मई 2018: इलाहाबाद हाईकोर्ट में सीबीआई ने सीलबंद लिफाफे में अपनी प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश की.
  18.  11 जुलाई 2018: सीबीआई ने पहली चार्जशीट दाखिल की, जिसमें कुलदीप सेंगर का नाम था.
  19.  13 जुलाई 2018: दूसरी चार्जशीट फाइल की गई, जिसमें पीड़िता के पिता को कथित तौर पर फंसाने के मामले में कुलदीप सेंगर, उनके भाई, तीन पुलिसकर्मी और 5 अन्य लोगों का नाम शामिल था.
  20.  28 जुलाई 2019: जब पीड़िता अपनी मौसी, चाची और वकील के साथ लखनऊ जा रही थी, तब कार दुर्घटना हुई। इसमें चाची और मौसी की मौत हो गई, जबकि पीड़िता और वकील गंभीर रूप से घायल हुए थे.
  21. 1 अगस्त 2019- उस वक्त चीफ़ जस्टिस रहे रंजन गोगोई ने सभी पांचों मामले लखनऊ की अदालत से दिल्ली की एक सीबीआई अदालत को ट्रांसफ़र करने के आदेश दिए. उन्होंने इस मामले की सुनवाई रोज़ाना करने के लिए आदेश दिए और कहा कि 45 दिनों में सुनवाई पूरी की जाए.
  22. 2 अगस्त, 2019- सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता के चाचा को सुरक्षा कारणों से रायबरेली की जेल से दिल्ली के तिहाड़ जेल शिफ़्ट करने का आदेश दिया.
  23.  5 अगस्त, 2019- सुप्रीम कोर्ट पीड़िता को बेहतर इलाज के लिए लखनऊ से ल्ली लाने का आदेश दिया.
  24.  9 अगस्त, 2019- दिल्ली की एक सत्र अदालत ने कुलदीप सेंगर के ख़िलाफ़ आरोप तय कर दिए. उन पर पर बलात्कार [376 (1)] और आपराधिक साज़िश [(120 B)] समेत आईपीसी की कई धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं. साथ ही पॉक्सो एक्ट के सेक्शन तीन और चार के तहत भी मामला दर्ज किया गया.
  25.  14 अगस्त, 2019- पीड़िता के पिता की मौत के मामले में सेंगर समेत नौ लोगों पर कोर्ट ने आरोप तय किए.
  26.  7 सितंबर, 2019- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के एम्स में अस्थाई तौर पर कोर्ट लगाने का आदेश दिया ताकि पीड़िता का बयान दर्ज किया जा सके.
  27.  29 सितंबर, 2019- दिल्ली महिला आयोग ने कहा कि कोर्ट के आदेश पर दिल्ली में पीड़िता और उसके परिवार के लिए अस्थाई तौर पर (11 महीनों के लिए) रहने की व्यवस्था एक सुरक्षित स्थान पर की जाएगी.
  28.  11 अक्तूबर, 2019- पीड़िता की कार पर हमले के मामले में सीबीआई ने कुलदीप सेंगर के ख़िला़ चार्जशीट दायर की.
  29.  10 दिसंबर, 2019- कोर्ट ने 16 दिसंबर के लिए अपना फ़ैसला सुरक्षित रखा. अगर दोनों पक्षों में से किसी की भी तरफ से किसी बिंदु पर नए सिरे से बहस की मांग नहीं हुई तो फ़ैसला सुना दिया जाएगा.
  30.  16 दिसंबर, 2019- कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को अपहरण और बलात्कार के मामले में दोषी ठहराया.

 

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