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झारखंड चुनावः ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा, तो भाजपा ने मुस्लिम प्रत्याशीयों से क्यों किया किनारा?

तर्कसंगत

December 19, 2019

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मिसफिका हसन, तारिक इमरान, सोना खान, कमाल खान, काजिम कुरैशी, रिजवान खान, मो इकबाल आदि. ये वो नाम है जो भारतीय जनता पार्टी के झारखंड प्रदेश समिति और कार्य समिति में उम्मीद और महत्वाकाक्षा लिए कई सालों से दर्ज हैं. सुबे के 24 जिलों में सैकड़ों बुथों पर ऐसी हीं हजार से पार भाजपा के मुस्लिम कार्यकर्ता भी हैं जो आलोचनाओं से अलग पार्टी का भगवा झंड़ा उठाते आ रहे हैं. लेकिन करीबन 15 फीसदी आबादी वाले इस मुस्लिम बेरादरी का एक भी चेहरा राज्य में आठवीं बार हो रहे चुनाव (लोकसभा+विधानसभा) में भाजपा का प्रत्याशी क्यों नहीं बन पाया, इस सवाल के जवाब में तर्क और तत्थ दोनों मिलते हैं.

सोना खान भाजपा में पिछले 25 सालों से अलग अलग पद रहें. फिलहाल पार्टी के प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष हैं. टिकट के सवाल पर सोना खान मुस्लिम समाज को ही जिम्मेदार मानते हैं. वो कहते है, “टिकट का नहीं मिलना, मुस्लिम समाज भी जिम्मेदार है. सवाल है कि मुसलमान वोट नहीं देता तो पार्टी टिकट कैसे देगी. हमलोग भी मजबूर हैं. जबतक मुसलमान खुलकर साथ नहीं आएगा, तबतक टिकट के लिए कैसे दावा करेंगे. भाजपा में मुसलमान आज के वक्त में तो कुछ दिख भी रहा है. एक वक्त में तो हमलोग निकलते थें तो लोग गाली बकता था और फ़तवा जारी करता था. जबतक मुसलमान खुलकर साथ नहीं आने लगेगा, वोट नहीं मिलने लगेगा, तो पार्टी कैसे विश्वास करेगी.”

झारखंड की पाकुड़ विधानसभा सीट पर सबसे अधिक 35.8 फीसदी मुस्लिम आबादी है. यही वजह है कि पिछली बार और इस बार भी अल्पसंख्यक मोर्चा ने पार्टी के अंदर पाकुड़ से मुस्लिम प्रत्याशी को देने का दावा किया किया था, लेकिन बात नहीं बन पाई.”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी के ‘सबका साथ सबका विकास’ वाले नारे में ‘सबका विश्वास’ भी जोड़ दिया है. लेकिन सोना खान का मानना है कि टिकट में हिस्सेदारी तभी होगी जबतक मुस्लिम वोट की पार्टी के लिए भागीदारी नहीं होती.

 



एक भी लोकप्रिय चेहरा नहीं मिल पाया भाजपा को

बिहार से अलग होकर 15 नवंबर 2000 में झारखंड राज्य का अलग गठन होता है. उन्नीस सालों में झारखंड ने चार आम चुनाव और तीन विधानसभा चुनाव देखा है. चौथी बार के विधानसभा चुनाव के लिए राज्य में मतदान जारी है. 30 नवंबर से 20 दिसंबर के पांच चरणों की मतदान की प्रक्रिया का अब अंतिम चरण बाकि है.

झारखंड में आबादी के लिहाज से मुसलमान 50-55 लाख हैं. जिलावार संख्या पाकुड़ और साहेबगंज (35.8 और 34.6) में सबसे अधिक है. जबकि देवघर, जामताड़ा, लोहरदग्गा और गिरिडीह जिलों में यह औसतन 20-22 फीसदी हैं. बाकि जिलों में मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका अदा करते हैं. वहीं विधासभा सीटों में गोड्डा, पाकुड़, जामताड़ा, गांडेय, राजमहल, मधुपूर, टुंडी में लगभग 22 से 36 फीसदी वोट हैं. जबकि महगामा, राजधनवार, हटिया, धनबाद में लगभग 14 से 17 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं.

भाजपा के मुताबिक हाल ही में 50-60 हजार के करीब नये मुस्लिम सदस्य पार्टी से जुड़े हैं, जबकि कुल की संख्या लाख से भी पार है और सरकारी योजनाओं का सबसे ज्यादा लाभ भी मुस्लिम समाज ही ले रहा है. मगर सुबे में भाजपा का टिकट पाने के लिए ये सब पर्याप्त नहीं है. बल्कि पार्टी के लिए पापुलर चेहरा पहली प्रथामिकता है. भाजपा का कहना है कि 19 साल में उसे मुसलमानों में कोई पापुलर चेहरा ही नहीं मिला जिसे लोकसभा या विधानसभा का टिकट दिया जाता. पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता दीनदयाल बर्णवाल का कहना है, “बीजेपी न जतिय, न ही कौम विशेष की बात करती है. ऐसा चेहरा जो पब्लिक के लिए सेवा करता है पार्टी उसे ही टिकट देती है.”

19 साल में पार्टी के अंदर प्रत्याशी के लिए एक भी  मुस्लिम चेहरा नहीं मिला? इसपर हांसते बर्णवाल कहते हैं कि आगे आएगा तो जरूर देंगे. उनका मानना है कि पार्टी में कोई कितने दिनों से है यह मुद्दा नहीं है. जनता और पार्टी लिए आपकी सेवा क्या है, यह जरूरी है. बर्णवाल के अनुसार केंद्र और राज्य की मौजूदा सरकार के कार्यकाल में ही मुसलमान सबसे अधिक सुराक्षित रहा है. इसके लिए वो तीन तलाक बिल और कम दंगे का उदाहरण देते हैं.

 

2014 में टिकट का मिला था आश्वासन

झारखंड भाजपा में लंबे समय से काम करने वाले कई नेता हैं. ऐसा ही एक नाम काजिम कुरैशी का भी है. इन्होंने अपने उम्र के 51 साल में से 22 साल भारतीय जनता पार्टी को दे दिया है. 2014 में अल्पसंख्य मोर्चा के अध्यक्ष थें और वर्तमान में मोर्चा के प्रभारी का पद संभाल रहे हैं.

दो दशक से आप पार्टी का झंडा ढोते आ रहे हैं, आप जैसे कई  और भी. चुनाव आता है तो एक भी मुसलमान को भाजपा टिकट नहीं देती है, कोई खेद या नाराजगी नहीं होती?

इसपर काज़िम कुरैशी कहते हैं, “आपका कहना दुरूस्त और बिल्कुल सही कह रहे हैं आप. झारखंड में 6-7 सीट मुस्लिम बहुल्य है जहां वोटर निर्माय़क होते हैं. मैं पिछले विधानसभा चुनाव में अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के नाते राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने बात रखी थी. वहां से आश्वासन भी मिला था कि दो टिकट दिया जाएगा. फिर समिकरण क्या बना, नहीं पता. लेकिन नराजगी बहुत थी, इसीलिए पूरा मोर्चा सामूहिक इत्सीफा देने जा रहा था, लेकिन तब के झारखडं प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राय जी ने रोक लिया.

इस बार भी टिकट नहीं दिया गया, तो क्या फिर इस्तीफा देंगे आप?इस सवाल को टालते हुए कहते हैं कि उन्हें उम्मीद अगली बार मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट मिलेगा.

अंजुमन इस्लामिया रांची के अध्यक्ष इबरार अहमद का कहना है एक पार्टी(भाजपा) राज्य बड़ी आबादी को किनारे करे, यह दूर्भाग्यपूर्ण है. भाजपा के अंदर कई बड़े मुस्लिम नेता थें, जो टिकट के दावेदार थें. कम से कम दो या एक प्रत्याशी को तो टिकट देना चाहिए था पार्टी को.

इबरार अहमद का मानना है कि लोकतंत्र में कोई पार्टी एक समुदाय को दरकिनार करे या कोई समुदाय किसी पार्टी को दरकिनार कर दे, दोनों ही लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है.

बीते दो साल में भाजपा के अंदर मुस्लिम प्रत्याशी के तौर पर एक चेहरा बहुत तेजी से उभरा था. वो नाम है पाकुड़ जिला के एलामी पंचायत की मौजूदा मुखिया व प्रदेश भाजपा प्रवक्ता मिसफिका हसन का. दिल्ली से बायोटेक में एमसी करने वाली मिसफिका ने चुनाव के मद्देनजर पाकुड़ विधानसभा में काफी जनसंपर्क किएं. मोबाइल पर हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि पार्टी से निर्देश मिला था, कार्यक्रम और जनसंपर्क करें. वो यह भी कहती हैं कि पार्टी मौका देती तो चुनाव लड़तें, लेकिन टिकट मिलेगा ही ऐसा कोई टारगेट नहीं था. किसी भी मुस्लिम को टिकट नहीं देने के, कई सवालों को यह कहते हुए टाल दिया कि उन्होंने भाजपा दो साल पहले ही ज्वाइन किया है.

 

मुसलमानों देश का नागरिक नहीं मानती भाजपाः विपक्ष

झारखंड में तीन बार हुए विधानसभा चुनाव में अबतक नौ मुस्लिम विधायक ही जीत पाए हैं. 2005 में कांग्रेस से दो विधायक जीतें थें. 2009 में कांग्रेस और झामुमो से दो-दो और एक झाविमो से मुस्लिम विधायक जीतें. 2014 में भी कांग्रेस ही से दो मुसलमान जीते पाएं. जबकि गोड्डा एक मात्र लोकसभा सीट है जहां से 2004 में झारखंड बनने के बाद कोई मुस्लिम सांसद (फुरकान अंसारी) बना.

वहीं पिछले विधानसभा चुनाव में झामुमो और कांग्रेस ने पांच-पांच और झाविमो ने चार मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट दिए था.

मुस्लिम प्रतिनिधित्व के सवाल पर झामुमो महासचिव सुप्रीयो भट्टाचार्य कहते हैं कि उनकी पार्टी ने हर बार चार-पांच मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट दिया और इस बार उनके गठबंधन से सात मुसलमान उम्मीदवार हैं. उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा,“जवाब भाजपा वालों को टिकट देना चाहिए जिनका नारा सबका साथ, सबका विकास है. मेरा तो कहना है कि यह नारा खोखला है. वे मुसलमानों को भारत का नागरिक ही नहीं मानते हैं. इसलीए ही उन्होंने धर्म के आधार पर बिल लाया है.”

इसी सवाल पर कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता आलोक दुबे कहते हैं कि भाजपा शुरू से समाज को बांटने का काम करती आई है. वहीं झाविमो के केंद्रीय प्रवक्ता सरोज सिंह का मानना है कि मुसलमानों को टिकट नहीं देना ‘सबका साथ, सबका विकास’ वाले नारे की पोल खोलता है.

भाजपा ने 2005 में 63 सीटों पर चुनाव लड़ा था. 2009 में 67 और 2014 में 73 सीटों पर. जबकि इस बार 80 सीटों पर पार्टी ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं. इसी तरह भाजपा ने राज्य की अधिकतर लोकसभा सीटों पर आम चुनाव भी लड़ा. लेकिन इस दौरान पार्टी से एक भी मुस्लिम को अपना उम्मीदवार नहीं बनाया. हालांकि 2014 की मोदी सरकार में केंद्र के दो मुस्लिम (शहनवाज हुसैन, एमजे अकबर) मंत्रियों बारी-बारी झारखंड से राज्य भेजा गया है. लेकिन विधानसभा और लोकसभा में करीबन में सुबे की 55 लाख आबादी में से बीते उन्नीस सालों एक भी अपना उम्मीदवार नहीं बनाया.

 

लेखक: मो. असग़र खान

 

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