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जेएनयू प्रोफेसर : ‘नकाबपोश भीड़ खूनखराबा कर रही थी, शक्षकों को पीट रही थी’

तर्कसंगत

January 6, 2020

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर को 5 दिसंबर रविवार को लाठी और डंडों से लैस कम से कम 50 नकाबपोश बदमाशों ने अपने कब्जे में ले लिया।

नकाबपोशों ने छात्रों और शिक्षकों के साथ मारपीट की और छात्रावासों में तोड़फोड़ की जिससे लगभग 30 छात्र और 12 शिक्षक घायल हो गए। हमले में – जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष आइश घोष की आंख पर लोहे की रॉड से वार किया गया। उनके रक्तस्राव की वीडियो ऑनलाइन भी सामने आई है। महासचिव सतीश चंद्र भी घायल हो गए। छात्रों और शिक्षकों ने आरोप लगाया कि उपद्रवियों का संबंध भारतीय जनता पार्टी के छात्र संगठन अकिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से था।

जेएनयू शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) ने चल रही फीस वृद्धि पर चर्चा करने के लिए रविवार शाम को एक शांतिपूर्ण बैठक बुलाई थी। बैठक में जेएनयू छात्र अध्यक्ष आइश घोष सहित बड़ी संख्या में छात्रों ने भी भाग लिया। जैसे ही बैठक लगभग 6:20 बजे समाप्त होने वाली थी, छात्रों ने मौके पर जाकर शिक्षकों और उनके सहपाठियों को 50-70 लोगों की भीड़ को उनके तरफ आने के बारे में सूचित किया।

 

CISLS / SSS के सहायक प्रोफेसर अविनाश कुमार ने कहा कि “कुछ घबराये छात्र हमें उन छात्रों की भीड़ के बारे में सचेत करने के लिए भागे भागे आये। उन्होंने कहा कि लगभग 70 लोग लाठी और डंडों से लैस थे, जिनके चेहरे ढके हुए थे और कैंपस में प्रवेश कर रहे थे, जब उन्होंने कैंपस में एक पुलिस वाले को जांच के लिए बुलाया तो उसने आने से साफ़ मना कर दिया।

बैठक में उपस्थित प्रोफेसरों में से एक पेरियार छात्रावास के पास गतिविधियों की जांच करने के लिए अपने साइकिल पर चला गया। “वहां छड़ से लैस बाहरी लोगों की संख्या को देख हैरान, प्रोफेसर ने कुछ फ़ोटो क्लिक करना शुरू कर दिया। इसे देख तब कुछ बदमाशों ने उन पर हमला किया और उन्हें तस्वीर हटाने के लिए मजबूर किया,” अविनाश ने कहा।

एक बार जब भीड़ टी पॉइंट पर पहुंची, तो उन्होंने वहां मौजूद प्रोफेसरों और छात्रों पर पथराव शुरू कर दिया। छात्र और शिक्षक अपनी जान बचने के लिए इधर उधर दौड़ रहे थे। “मास्क में लोग हममरे खून के प्यासे थे। वरिष्ठ प्रोफेसर जो दौड़ने में असमर्थ थे, उन्हें छड़ से मारा गया, ” कुमार ने तर्कसंगत से कहा।

“कुछ अंदरूनी और बाहरी लोग थे जो कैंपस के अंदर भगदड़ मचा रहे थे। उन्होंने मनमाने ढंग से हमला किया,” सिनेमा अध्ययन की प्रोफेसर रंजनी मजूमदार ने तर्कसंगत को बताया।

रंजनी ने आरोप लगाया कि परिसर के बाहर अंदर की स्थिति के बारे में पूछताछ करने के लिए जमा बड़ी संख्या में नागरिकों को देखने के बाद ही पुलिस ने कार्रवाई की। “यह इस परिसर के छात्रों और प्रोफेसरों पर पूर्व नियोजित, हमला था। विश्वविद्यालय प्रशासन के समर्थन के बिना बाहरी लोग परिसर में छड़ और लाठी के साथ प्रवेश कैसे कर सकते हैं? ” रंजनी ने पूछा।

“कुछ गुंडों ने” वंदे मातरम “,” जय श्री राम “,” दिल्ली पुलिस ज़िंदाबाद “, “देश के गदरों को गोली मारो सालों को ‘ जैसे नारे भी लगाए।

बाद में भीड़ ने साबरमती हॉस्टल की लड़की के विंग के अंदर घुस गयी। पुरुष और महिलाएं मास्क पहनकर हॉस्टल के गलियारों से गुजरते हुए, संपत्ति को नुक्सान पहुंचाते चले गए। “मैं अपने कमरे के अंदर था जब मैंने हॉस्टल से ही तोड़ फोड़ की आवाज़ सुनी। मैंने बाहर कदम रखा और घबराई हुई महिला छात्राओं को अपने कमरों के अंदर भागते हुए देखा ” जेएनयू में रूसी भाषा की छात्रा ज्योति कुमारी ने तर्कसंगत से कहा।

“10-15 मिनट के बाद, जब हंगामा कम हुआ, हम बाहर की जाँच करने के लिए गए और तब गुंडों ने हम पर हमला कर दिया । उन्होंने छात्रों पर छड़ें, फावड़े और पत्थर फेंके, ज्योति को कहा।

“जब मैं घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर रही थी, तो बदमाशों में से एक ने मेरे दाहिने हाथ पर एक पत्थर से मारा और मेरे साथ बदस्लूक की । महिला छात्रों में से एक को मेरे सामने पीटा गया और घसीटा गया। पुलिस कैंपस के अंदर थी, लेकिन छात्रों द्वारा पीटे जाने के बाद ही दिखी” उन्होनें कहा। ज्योति ने यह भी कहा कि साबरमती हॉस्टल के वरिष्ठ वार्डन रामोतार मीणा और एक अन्य वार्डन प्रकाश साहू मौके से भाग गए, जबकि भीड़ ने उनके हॉस्टल में तोड़फोड़ की।

देर शाम, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी देवेंद्र आर्य ने कहा कि विश्वविद्यालय में स्थिति सामान्य है। “हमने एक फ्लैग मार्च किया। छात्रावास क्षेत्रों को सुरक्षित किया गया है। हिंसा की कोई रिपोर्ट नहीं है।

एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव, जो कैंपस के अंदर शिक्षकों और छात्रों से बात करना चाहते थे, विश्वविद्यालय के बाहर उनके साथ तीन बार धक्कामुक्की की गयी। उन्होंने एनडीटीवी को बताया कि हमला दिल्ली पुलिस के सामने हुआ।

हमले के तुरंत बाद, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हिंसा की निंदा की। जयशंकर, ने ट्विटर पर लिखा: “यह पूरी तरह से विश्वविद्यालय की परंपरा और संस्कृति के खिलाफ है।”

एचआरडी मंत्रालय ने जेएनयू के रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार से कैंपस की स्थिति के बारे में तत्काल रिपोर्ट मांगी है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, आईआईटी बॉम्बे, जादवपुर विश्वविद्यालय और जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों ने जेएनयू छात्रों के साथ एकजुटता और बर्बर कृत्य की निंदा करते हुए विरोध प्रदर्शन किया।

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