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उत्तर प्रदेश : 632 करोड़ के बजट के बाद भी नहीं सुधर रही गोवंश की स्थिति

तर्कसंगत

January 8, 2020

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योगी सरकार गोवंश के लिए नित नए योजनाों पर काम करती है और अपनी घोषणाओं द्वारा ये सुनिश्चित करती है कि गोवंश सुरक्षित रहे. अपने कार्यकाल के शुरुआत में ही योगी सरकार ने 250 करोड़ के भारी भरकम बजट की घोषणा भी की. साथ ही साथ इस बजट को भविष्य के लिए सुनिश्चित करने के लिए अलग से काऊ सेस भी लगा दिया। इन्हीं योजनाओं के नतीजे तीन साल में उत्तर प्रदेश सरकार गोवंश के लिए सबसे ज़्यादा बजट निर्धारित करने वाल पहला राज्य बन गया है.

सरकार ने केवल योजनाओं तक ही अपने नेतृत्व को सिमित नहीं रखा, बल्कि जिला स्तर के अधिकारीयों, निगम अधिकारीयों और ग्राम प्रधानों की भी जिम्मेदारी तय की जिससे कि वो भी इन योजनाओं के सुनियोजित रूप से काम करने पर ध्यान दें. साल 2019 -20 के लिए विभिन्न मदों को मिलाकर गोवंश के कल्याण के लिए 631.60 करोड़ की व्यवस्था की.

इतना ही नहीं विभिन्न एनजीओ और लोगों को गौशाला बनाने के लिए भी अंधाधुन पैसे दिए गए. जिसके बाद राज्य भर के जिलों में गौसदन, पशु आश्रय स्थल इत्यादि जैसे जगह बनाये गए और पशुओं को रखा गया मगर इन्हीं जगहों पर गाय  तड़प तड़प कर मर रही है.

पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार बाँदा जिले के पैलानी तहसील के खप्टिहा गाँव में गौशालाओं के औचक निरीक्षण में एसडीएम ने पाया कि मृत गायों को कुत्ते नोच नोच कर खा रहे और गायों के छोटे छोटे बच्चे भूख से बिलबिला रहे हैं.

 

ठंड और बिजली के तार से मरते गोवंश

ललितपुर जिले में अलग अलग गौशालाओं में ठंड से प्राण गंवाने वाले गायों की संख्या 30 से अधिक थी. इसके साथ हरदोई जिले में भी चारे और बारिश में भीगने की वजह से 6 से ज़्यादा गायों की मौत की पुष्टि की गयी. इस पूरे लापरवाही में दो अधिकारीयों को निलंबित किया गया.

इसके पहले खप्टिहा गाँव में इस महीने की 3 तारीख को कान्हा पशु आश्रय केंद्र पर बिजली की तार टूट कर गिरने से 21 गायों की मौत हो गयी. जांच में जिला अधिकारी हीरालाल ने गौशाला संचालक को क्लीन चिट दी ये कहते हुए कि विद्युत् आपूर्ति के दौरान तार टूट कर गौशाला पर गिरी जिसमें किसी का भी दोष नहीं है.

 

गौशाला का पैसा हड़पे जाने का आरोप

बाराबंकी के सिरौलीगौसपुर तहसील के ग्राम पंचायत हजरतपुर में मवेशियों के अवशेष मिले। गाँव वालों ने रजिस्ट्रार को बुला कर मामले की जांच करवाई जिसमें पता चला कि दो गायों की मृत्यु हुई है और 5 की हालत अत्यधिक गंभीर है. गान वालों ने गौशाला संचालक केसरजहाँ पर फण्ड का पैसा हड़पने का आरोप लगाया जिसकी वजह से पशुओं को चारा पानी नहीं मिल रहा और उनकी असमय मृत्यु हो रही है.

हालाँकि जहाँ कहीं भी इस तरह की घटनाएं हो रही है, वहां के अधिकारीयों को निलंबित किया जा रहा है, मगर गौशलों की बदहाली से जान गंवाने वाले पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है.

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