ख़बरें

भोपाल में अल्पसंख्यक मोर्चे के 48 सदस्यों ने छोड़ी भाजपा कहा पार्टी खो चुकी है ‘विचारधारा’

तर्कसंगत

Image Credits: Times Of India

January 13, 2020

SHARES

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देश के कई राज्यों में अभी भी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं, इस कानून का विरोध करने वालों में बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चे के नेता भी शामिल हो गए हैं। मध्य प्रदेश के भोपाल में नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वाले 48 कार्यकर्ताओं ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया है। इनका आरोप है कि पार्टी के कई नेता विशेष समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी कर रहे हैं।  बीजेपी भले ही इस मामले में झुकने को तैयार नहीं है लेकिन अब पार्टी के भीतर भी विरोध शुरु हो गया है।

द हिन्दू से बात करते हुए बीजेपी से इस्तीफा देने वाले आदिल खान ने कि क्या आपने देखा है कि संसद में एक कानून पास करने के बाद घर-घर जाकर लोगों से समर्थन मांगा जा रहा हो।

बीजेपी छोड़ने वाले सदस्यों ने राज्य के अल्पसंख्यक प्रमुख को यह कहते हुए पत्र लिखा है कि पार्टी श्यामा प्रसाद मुखर्जी और अटल बिहारी वाजपेयी के सिद्धांतों का पालन करती है, लेकिन उन्होंने किसी के साथ भेदभाव नहीं किया और अल्पसंख्यकों सहित सभी को अपने साथ लेकर चले थे।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इन नेताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि पार्टी में कोई लोकतंत्र नहीं बचा है और साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पूरी पार्टी को दो-तीन लोगों के भरोसे छोड़ दिया गया है। हालांकि, बीजेपी ने इन आरोपों का खंडन किया है और कांग्रेस और कम्युनिस्टों पर उन्हें गुमराह करने का आरोप लगाया है।

खान ने कहा, “लोगों के पास खाने के लिए पर्याप्त नहीं है, आप उनसे नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेज बनाने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं।”

पिछले 40 वर्षों से पार्टी में काम कर रहे अब्दुल कुरैशी ने कहा कि हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए पार्टी की विचारधारा खुले में आ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले पार्टी के सदस्य कम से कम उनसे सुझाव लेते थे, लेकिन अब पार्टी अपनी “विचारधारा” खो चुकी है।

पार्टी ने इस आरोप का जवाब देते हुए कहा कि समुदाय के नेता और कम्युनिस्ट जो देश के हित के खिलाफ हैं, ने श्रमिकों को गुमराह किया है।

 

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...