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12वीं की परीक्षा में फेल होने के बाद भी नहीं मानी हार, मिली ISRO में नौकरी

तर्कसंगत

January 13, 2020

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मुंबई की झोपड़पट्टियों की तंग गलियों से निकल कर राहुल घोडके नाम के युवक ने देश की प्रतिष्ठित स्पेस एजेंसी इसरो तक का सफर तय किया है. राहुल घोडके ने आर्थिक तंगी को मात देते हुए इसरो में टैक्नीशियन के पद पर नौकरी हासिल की है. आज उनकी उपलब्धि पर उनकी मां फूले नहीं समा रही हैं. उनके परिवार और जानने वालों के साथ ही उन्हें पूरे देश से बधाइयाँ मिल रही हैं और तो और उनके रिश्तेदारों और मोहल्ले वालों ने तो उनके लिए खास जश्न भी रखा.

चेंबूर इलाके में मरौली चर्च स्थित नालंदा नगर की झोपड़पट्टी में 10X10 के मकान में रहने रहने वाले राहुल घोडके का जीवन बड़ी मुश्किलों में बीता है. राहुल ने बताया कि उनकी पांचवीं तक की पढ़ाई सरकारी स्कूल से हुई. फिर जब छठी कक्षा में उनका स्कूल बदलवाना पड़ा तो उनके परिवार के पास उनकी नई यूनिफार्म तक लेने के लिए भी पैसे नहीं थे. ऐसे में उनकी मौसी ने उनके परिवार की मदद की थी. उन्होंने तमाम मुश्किलों के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और अपनी पढ़ाई को जारी रखा. राहुल दसवीं की परीक्षा में फस्ट डिवीजन से पास हुए. इस दौरान उनके पिता की मृत्य हो गई. ऐसे में, उनकी माँ, शारदा घोडके ने ठान लिया कि वह अपने बच्चों को अच्छी ज़िन्दगी देंगी. उन्होंने दूसरे लोगों के घर पर झाड़ू-पौंछा और बर्तन साफ़ करने का काम करना शुरू कर दिय. लेकिन मुंबई जैसे शहर में रहना और दो बच्चों की पढ़ाई का खर्च निकालना आसान नहीं था. अपनी माँ को यूँ दिन-रात काम करते देखकर राहुल को बहुत बुरा लगता और उन्होंने खुद फैसला किया कि वह अपनी माँ की मदद करेंगे.

 


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पिता के निधन से राहुल अंदर से काफी टूट गए. परिवार की सारी जिम्मेदारी राहुल के कंधों पर आ गई. पिता मजदूरी करते थे, जमा पूंजी के नाम पर कुछ भी नहीं था. इस दौरान राहुल शादियों में केटरस का काम कर घर के खर्च को उठाते थे और उनकी मां भी दूसरों के घरों में जाकर बर्तन-कपड़ा धोकर घर खर्च चलाती थीं. इस बीच राहुल ने अपनी पढ़ाई को जारी रखा.

हालांकि, पूरा ध्यान पढ़ाई पर नहीं दे पाने की वजह से राहुल 12वीं की परीक्षा में फेल हो गए. राहुल को इलेक्ट्रिक और टेक्निकल कामों का चस्का लगा. दो सालों तक राहुल ने अपने घर-परिवार को सम्भालने के लिए काम किया. फिर उनकी बहन की ग्रेजुएशन पूरी हो गयी, वह जॉब करने लगी और उन्होंने राहुल को अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए कहा उन्होंने चेंबूर से नजदीक गोवंडी में आइटीआई कर इलेक्ट्रॉनिक कोर्स किया. पढ़ाई-खिलाई में तेज राहुल ने आईटीआई में अव्वल रहे और फस्ट डिवीजन से अपना कोर्स पूरा किया. बाद में उन्हें एल एंड टी कंपनी में इंटर्नशिप मिली, उसी के दौरान वहां इसरो का एक प्रोजेक्ट आया था. उन्हें उस प्रोजेक्ट में काम करने का मौका मिला. वो बस चाहते थे कि एक स्टेबल जॉब मिल जाये ताकि घर पर टेंशन खत्म हो। जिसके साथ ही उन्होंने इंजीनियरिंग में डिप्लोमा के लिए एडमिशन ले लिया.

अब राहुल पढ़ाई और काम दोनों साथ साथ करने लगे. और तो और राहुल यहां भी पहले अंक से सफल हुए. जब इसरो में डिप्लोमा इंजीनियर के पद के लिए नौकरी निकली तो राहुल ने एंट्रेंस की तैयारी की और देशभर में आरक्षित परीक्षार्थियों की श्रेणी में तीसरे और ओपन में 17वें स्थान पर आए और अब बीते 2 महीनों से राहुल इसरो में टेक्नीशियन के पद पर काम कर रहे हैं.

राहुल घोडके के इसरो में नौकरी लगने की खबर पूरे इलाके में आग की तरह फैल गई. राहुल के घर पर उन्हें बधाई देने के लिए लोगों का तांता लग गया. लोगों ने राहुल को बधाई देते हुए फूलों का गुलदस्ता दिया. उन्हें अपने हाथों से मिठाई खिलाई. इस दौरान राहुल ने भी घर आए लोगों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया.

 


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राहुल घोडके के घर पर जश्न जैसा था मिठाइयां बांटी गईं . राहुल के रिश्तेदार और आस-पास पड़ोस की महिलाएं, बच्चे और पुरुष राहुल के घर पहुंचकर उन्हें और उनकी मां को बेटे की इसरो में नौकरी लगने की बधाई दी . राहुल की मां को अपने बेटे पर बहुत गर्व है, जिस बेटे ने आज उनके सारे परिश्रम को सफल कर दिया.

बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) आज दुनिया की सबसे भरोसेमंद स्पेस एजेंसी है. दुनियाभर के करीब 32 देश इसरो के रॉकेट से अपने उपग्रहों को लॉन्च कराते हैं. 16 फरवरी 1962 को डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. रामानाथन ने इंडियन नेशनल कमेटी फॉर स्पेस रिसर्च (INCOSPAR) का गठन किया था.

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