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सरकारी स्कूल की छवि बदलने की एक मिसाल हैं उत्तरप्रदेश के सरकारी स्कूल के ये प्रिंसिपल

तर्कसंगत

Image Credits: Facebook/Prathmik Vidyalaya,Itayla Mafi

January 15, 2020

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उत्तरप्रदेश में सम्भल जनपद का इटायला माफी राजकीय प्राथमिक विद्यालय पूरे देश के सभी राजकीय विद्यालयों के लिए यह सरकारी आदर्श प्राइमरी विद्यालय अनूठी शिक्षा प्रणाली के लिए उदाहरण है। स्कूल की बच्चों की पढ़ाई का स्तर एवम व्यवस्थाएं प्राइवेट अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय से भी भिन्न है। पर्यावरण एवम स्वच्छता के लिहाज से स्कूल में पांच सौ अनेक फूल वाले गमले तथा तीन सौ पेड़ पौधे लगाए गए हैं। जिससे स्कूल की स्वच्छ्ता देखते ही बनती है। पूरा विद्यालय क्षेत्र सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में है। वीडियो प्रोजेक्टर तथा कम्प्यूटरीकृत शिक्षण प्रणाली द्वारा कक्षाऐं संचालित की जाती हैं।गर्मी से बचने के लिए सोलर पंखे लगे हुए हैं। पेयजल के लिए नलकूप टंकी तथा समर सेविल लगे हैं। यह सब सरकारी खजाने से नहीं बल्कि स्कूल के प्रधानाचार्य कपिल मलिक ने स्वयं के खर्चे से विद्यालय को सजाया व संवारा है। अब तक मलिक 20 लाख रुपये से अधिक का खर्च अपने स्वयं की जेब से कर चुके हैं।

यह स्कूल पहले से इतना खूबसूरत नहीं था, इस स्कूल को श्रेष्ठ बनाने का श्रेय जाता है स्कूल के प्रधानाचार्य कपिल मलिक को। जब साल 2010 में कपिल को इस स्कूल में नियुक्ति मिली तब स्कूल की हालत काफी बदतर थी। स्कूल में शिक्षा व्यवस्था और अन्य सुविधाएं बिलकुल आम सरकारी स्कूलों की तरह ही थी, यही कारण था कि तब इस स्कूल में सिर्फ 47 बच्चों का नामांकन था, जिसमें करीब 15 बच्चे ही पढ़ने आते हैं। 2013 में कपिल इस स्कूल के कार्यवाहक प्रधानाचार्य बने। स्कूल की चरमराई व्यवस्था को देख कपिल ने अपने कंधों पर यह ज़िम्मेदारी लेते हुए स्कूल का कायाकल्प करने की ठानी।

 


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खुद से खर्च किये 20 लाख रूपये

उत्तर प्रदेश में सरकार की तरफ से स्कूलों के रखरखाव के लिए कुल 6 हज़ार रुपये हर साल मिलते हैं, लेकिन कपिल ने इस स्कूल को सँवारने में अब तक 16 लाख रुपये खर्च किए हैं, जाहिर सी बात है ये राशि कपिल ने अपनी तरफ से ही खर्च की है। इस निस्वार्थ भाव के पीछे कपिल के परिवार का भी बड़ा हाथ है। कपिल के परिवार ने उन्हे कभी इस नेक काम के लिए नहीं रोंका टोंका। कपिल के अनुसार इस नेक पहल में स्कूल के अन्य अध्यापक भी उनका हर तरह से सहयोग करते हैं। कपिल के पिता का सौर ऊर्जा का व्यवसाय है, ऐसे में कपिल को आर्थिक रूप से जरूरी आज़ादी मुहैया है, फिर भी कपिल ने अपना वेतन और घर से ली हुई राशि को इस विद्यालय के कायाकल्प में खर्च किया है।


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क्या है इस स्कूल में ख़ास?

पहले बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर, खेल मैदान, पीने योग्य पेयजल आदि अनेक सुविधाएं उपलब्ध नहीं थी। स्कूल की चहारदीवारी नहीं होने के चलते ग्रामीण अपनी बैलगाड़ियां स्कूल प्रांगण में पहुंचा देते थे। ऐसे में महज 15 से 20 बच्चे ही स्कूल पहुंच पाते थे। वर्तमान में स्कूली छात्रों की संख्या चार सौ पार कर गई है। स्कूल में बनी कक्षाओं में जाते ही आपको किसी अच्छे कान्वेंट स्कूल का अनुभव होने लगता है। इन कमरों को छात्रों की पढ़ाई के अनुरूप ही सजाया गया है। पंखा, फर्नीचर और अन्य बुनियादी सुविधाओं के साथ ये कक्षाएँ काफी सलीके से सुसज्जित हैं।

यह सूबे के उन चुनिन्दा प्राइमरी स्कूलों में से है जहां छात्रों को कंप्यूटर की शिक्षा भी दी जाती है। स्कूल की खास बात ये है कि इस स्कूल में शिक्षक मार्कर बोर्ड पर ही पढ़ाते हैं। स्कूल में वाईफाई के साथ ही स्मार्ट क्लास की भी व्यवस्था है, जिससे छात्रों को रुचिपूर्ण ढंग से अधिक से अधिक सीखने में मदद मिलती है। खास बात यह है कि स्कूल के अध्यापक तथा बच्चे बायोमैट्रिक मशीन से हाजरी लगाते हैं।

 


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इस स्कूल में छात्रों को टाई और आई कार्ड भी मुहैया कराये जाते हैं। इसी के साथ ही छात्रों का हर महीने टेस्ट होता है, जिसमें टॉप करने वाले छात्रों का नाम स्कूल के बोर्ड पर अंकित किया जाता है। मिड-डे मील खाने को लेकर लोगों की आम अवधारणा यही है कि यहाँ मिलने वाला खाना बेहद घटिया क्वालिटी का होता है, लेकिन कपिल ने अपने स्कूल में इस अवधारणा को बदल कर रख दिया है। कपिल राशन की ख़रीदारी खुद करवाते हैं। स्कूल में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता बेहद अच्छी है, जिससे छात्रों को मिड-डे मील खाने से कभी परहेज नहीं होता है।

उनके मेहनत ने रंग दिखाया है

छात्रों की पढ़ाई में रुचि कुछ इस कदर बढ़ी है कि अब छात्र 95 प्रतिशत से अधिक अंक अर्जित कर पा रहे हैं। इसका श्रेय पूरी तरह से कपिल और इनके प्रयासों को जाता है। स्कूल में शिक्षा के स्तर का अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि इस स्कूल के चलते इलाके के कई कान्वेंट स्कूल बंद भी हो चुके हैं। इस प्राथमिक स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या 250 से अधिक है।

 

मिल चुका है मुख्यमंत्री से पुरस्कार

धीरे धीरे जब इस स्कूल की चर्चा राज्य के शिक्षा जगत में होने लगी तो उत्तरप्रदेश राज्य सरकार ने इस स्कूल को आदर्श स्कूल घोषित किया। प्राथमिक विद्यालय इटायला माफी को सूबे के सबसे स्वच्छ प्राथमिक विद्यालय होने के चलते सम्मानित किया जा चुका है, कपिल मलिक को यह सम्मान यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के हाथों मिला था। गौरतलब है कि कपिल को इसी के साथ शिक्षा विभाग से इनाम के तौर पर राशि मिल चुकी है, जिसे कपिल ने स्कूल के विकास में लगा दिया था।

 



 

 

मलिक बतातें हैं कि जब उन्होंने स्कूल पहुंच कार्यभार ग्रहण किया तो उनके सामने स्कूल को संवारने के लिए काफी चुनोतियों का सामना करना पड़ा था। अब उन्हें ग्रामीणों का सहयोग भी खूब मिल रहा है। यह सब प्रधानाचार्य कपिल मलिक की काबिलियत ही है। वास्तव में यह सरकारी प्राइमरी विद्यालय देश के अन्य सरकारी और प्राइवेट विद्यालयों के लिये के एक अनूठी मिशाल पेश कर रहा है।

 

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