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आरटीआई से पुछा गया सवाल ‘कौन कौन है टुकड़े टुकड़े गैंग में’?

तर्कसंगत

Image Credits: Twitter/Saket Gokhale/Hindustan Times

January 16, 2020

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत बीजेपी के कई नेता और कई केंद्रीय मंत्री अकसर टुकड़े-टुकड़े गैंग की बात करते हैं। इसी को लेकर पत्रकार साकेत गोखले ने पिछले दिसंबर में गृह मंत्रालय में एक आरटीआई अर्जी दाखिल की और पूछा कि आखरि टुकड़े-टुकड़े गैंग क्या है?

 

 

आरटीआई याचिका में जो सवाल पूछे गए थे वो इस प्रकार हैं-

1. कृपया ‘टुकड़े-टुकड़े’ गैंग की परिभाषा बताइए जैसे कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पहचान की है. और क्या इस कथित गैंग की पहचान के लिए कोई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तय किया गया है?

2. कृपया बताएं कि क्या केंद्रीय गृह मंत्री ने कथित ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का जो उल्लेख किया वो मंत्रालय की विशिष्ट ब्रीफिंग या अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों की ओर से दी गई जानकारी पर आधारित है?

3. कृपया बताएं कि क्या केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ‘टुकड़े-टुकड़े’ गैंग में शामिल नेताओं और सदस्यों की कोई लिस्ट तैयार कर रखी है, जिस गैंग का केंद्रीय मंत्री ने उल्लेख किया?

4. बताइए केंद्रीय गृह मंत्री की घोषणा के मुताबिक ‘टुकड़े-टुकड़े’ गैंग के सदस्यों के खिलाफ केंद्रीय गृह मंत्रालय कौन सी दंडात्मक कार्रवाई/सजा की योजना बना रहा है? (ये भी स्पष्ट किया जाए कि आईपीसी या अन्य कानूनों की कौन सी धाराओं के तहत ये किया जाएगा).

 

हालांकि अभी इस आरटीआई का जवाब देने की समयसीमा पूरी नहीं हुई है, लेकिन इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस आरटीआई अर्जी को लेकर गृह मंत्रालय के अफसर सिर खुजा रहे हैं।

रिपोर्ट में गृह मंत्रालय के बेनाम अफसरों के हवाले से कहा गया है कि किसी भी खुफिया एजेंसी या जांच एजेंसी ने अपनी किसी भी रिपोर्ट में ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का नाम नहीं लिया है।

 सूत्रों ने बताया, ‘इंटेलीजेंस या कानून प्रवर्तन एजेंसियों की ओर से अपनी किसी भी रिपोर्ट में ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ जैसा कोई उल्लेख नहीं किया गया है.’ अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की आरटीआई याचिकाएं दाखिल करने का उद्देश्य गंभीर नहीं होता. वहीं पत्रकार गोखले कहते है कि अगर गृह मंत्रालय से इसका तय समयसीमा 26 जनवरी तक जवाब नहीं मिलता तो वो इस मामले को मुख्य सूचना आयुक्त तक ले जाएंगे.

बीजेपी के कई नेता अपने राजनीतिक विरोधियों के लिए इस गैंग का नाम लेते हैं। प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह अपने भाषणों में इसका जिक्र करते हैं। गृहमंत्री अमित शाह ने दिसंबर माह में दिल्ली में एक सभा में कहा था कि इस गैंग को सजा मिलनी चाहिए।

इसके अलावा विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा था कि जब वे जेएनयू में पढ़ते थे तो वहां कोई टुकड़े-टुकड़े गैंग नहीं था। लेकिन इस गैंग के बारे में आरटीआई अर्जी आने के बाद गृह मंत्रालय अफसरों के पसीने छूट रहे हैं।

 

साकेत गोखले ने बुधवार को एक ट्वीट भी किया। इसमें उन्होंने कहा कि ‘उनकी आरटीआई में ‘कौन है टुकड़े-टुक़ड़े गैंग’ और उससे जुड़ी अन्य जानकारियां मांगे जाने पर गृह मंत्रालय चकरा गया है। उनकी जवाब देने की डेडलाइन दो हफ्ते में खत्म हो जाएगी। मान्यवर, ये मजेदार होने जा रहा है।’

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