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पैरोल के दौरान 1993 मुंबई धमाके का लापता दोषी ‘डॉक्‍टर बम’, कानपुर से गिरफ्तार

तर्कसंगत

Image Credits: Chalta Purza

January 17, 2020

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राजस्‍थान की अजमेर जेल में आजीवन कारवास की सजा काट रहा जलीस अंसारी जो गायब हो गया था उसे कानपूर से गिरफ्तार का लिया गया है। जलीस का गायब होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा अलर्ट था क्‍योंकि वह कोई साधारण सजा काटने वाला कोई दोषी नहीं था। जलीस पिछले तीन दशकों से एक ऐसा नाम बन चुका था जिसने एजेंसियों की नाम में दमकर रखा था। 50 से ज्‍यादा सीरियल ब्‍लास्‍ट्स में शामिल जलीस को ‘डॉक्‍टर बम’ भी कहते हैं।

अधिकारी ने बताया कि अंसारी अग्रीपाडा थाने के अंतर्गत मोमिनपुर का रहने वाला है और उम्र कैद की सजा काट रहा है। वह देश के विभिन्न हिस्सों में हुए कई धमाकों में सदिंग्ध है। अंसारी एक क्वालिफाइड एमबीबीएस डॉक्टर था। अपने प्रोफेशन का प्रयोग अंसारी मरीजों का इलाज करने में नहीं बम बनाने में करने लगा। जिन ब्‍लास्‍ट्स में उसका नाम आया उसमें सैंकड़ों लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद से ही उसे डॉक्‍टर बम कहा जाने लगा था। वह 1993 बॉम्‍बे ब्‍लास्‍ट का दोषी था।

सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दिसंबर 2019 में उसे 21 दिन की पेरोल दी गई थी। शुक्रवार को उसकी पेरोल खत्‍म होने वाली थी और 24 घंटे पहले ही वह गायब हो गया। पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक जलीस पेरोल के दौरान अपने परिवारवालों से मिलने के लिए गया हुआ था। लेकिन अचानक पुलिस को उसके परिवारवालों ने बताया कि उसका कुछ पता नहीं चल रहा है।

अधिकारी ने बताया कि पैरोल की अवधि के दौरान अंसारी को रोजाना सुबह साढ़े दस बजे से 12 बजे के बीच अग्रीपाडा थाने आकर हाजिरी लगाने को कहा गया था लेकिन वह गुरुवार को निर्धारित समय पर नहीं पहुंचा।

उन्होंने बताया कि दोपहर को अंसारी का 35 वर्षीय बेट जैद अंसारी पुलिस थाने पहुंचा और पिता के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के मुताबिक जलीस अंसारी तड़के उठा और घरवालों से नमाज पढ़ने की बात कहकर निकला लेकिन वापस नहीं लौटा। जैद की शिकायत पर पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया था . मुंबई पुलिस की अपराध शाखा और महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते ने उसको पकड़ने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया।

 

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