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तुषार गाँधी : बापू के हत्यारे ऐतिहासिक सबूत मिटा रहे हैं

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Image Credits: TPM/Amar Ujala/Pinterest

January 20, 2020

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महात्मा गांधी की 72वीं पुण्यतिथि में सिर्फ 11 दिन ही बचे हैं और इस बीच नई दिल्ली के गांधी स्मृति भवन (बिड़ला भवन) से उनकी हत्या से संबंधित कुछ ऐतिहासिक तस्वीरों को हटाया गया है. जिसे ले कर बहस छिड़ी हुइ है. दरअसल यहां से कुछ तस्वीरें हटाए जाने की बहस की शुरुआत तब हुई, जब महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया था कि गांधी स्मृति में फोटोग्राफर हेनरी कार्तियर ब्रेसन द्वारा ली गई राष्ट्रपिता के अंतिम क्षणों की  तस्वीरों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है और बिना किसी लिखित सामग्री के साथ उन्हें एलईडी स्क्रीन पर दिखाया जा रहा है, जिससे इन तस्वीरों के संदर्भ का पता नहीं चलता.

 

 

 

हालांकि, तस्वीरों को हटाए जाने के दावों को खारिज करते हुए गांधी स्मृति के डायरेक्टर दीपांकर श्री ज्ञान ने कहा है, “तस्वीरों की सॉफ्ट कॉपी LED स्क्रीन पर इंस्टॉल की गई हैं.”

महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी और अन्य गांधीवादियों का कहना है कि डिजिटलीकरण के बहाने महात्मा गांधी की हत्या और उनकी अंतिम यात्रा की तस्वीरों को इरादतन हटा दिया गया है. मगर संग्रहालय के निदेशक इन आरोपों को निराधार बता रहे हैं. पहले गांधी स्मृति में महात्मा गांधी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को डिस्प्ले बोर्ड पर लगी तस्वीरों के माध्यम से दिखाया था, जिनमें उनकी मृत्यु और अंतिम यात्रा की तस्वीरें भी थीं.

लेकिन, अब उनकी मृत्यु और अंतिम यात्रा की तस्वीरों को हटा दिया गया है और वहां पर एक डिजिटल स्क्रीन (टीवी स्क्रीन की तरह) लगा दी है. इस स्क्रीन पर छह से आठ तस्वीरें दिखती हैं जो एक के बाद एक चलती रहती हैं. गांधीवादी डिजिटलीकरण के इस तरीक़े को लेकर आपत्ति जताते हुए सीधे केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं.

ज्ञात हो कि 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या से करीब एक घंटा पहले ब्रेसन ने उनकी तस्वीरें खींची थीं. उन्होंने महात्मा के अंतिम संस्कार की तस्वीरों के साथ आम लोगों के दुख को भी अपने कैमरे में उतारा था.

बिड़ला हाउस के जिस हिस्से में संध्या वंदना के बाद नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी को गोली मारी थी, उसे संग्रहालय में तब्दील कर दिया गया है, जहां ब्रेसन की तस्वीरों के साथ महात्मा गांधी की अन्य यादगार वस्तुएं और तस्वीरें लगाई गई हैं.

गांधी स्मृति के निदेशक दीपांकर श्री ज्ञान ने कहा, ‘तस्वीरों को लोग, खासकर बच्चे छूते थे. अब डिजिटलाइजेशन करने से कोई छू नहीं पाएंगे. बैकग्राउंड में संगीत भी चलता रहेगा, जिससे लोगों को अच्छा लगेगा.’

लेकिन यहां सवाल उठता है कि अगर लोगों के छूने से ही परेशानी हो रही है तो इसके लिए दूसरे उपाय भी किए जा सकते हैं, जैसे लोगों के पहुंच से दूर रखना या तस्वीरों पर शीशे लगवाना आदि.इसके अलावा एक बड़ा सवाल यह भी है कि सिर्फ महात्मा गांधी की हत्या से संबंधित तस्वीरें ही क्यों हटायी गईं? उनके जीवन संबंधी बाकी दूसरी तस्वीरें तो वैसी ही लगी हुई हैं, उनकों क्यों नहीं हटाया गया या डिजिटलाइजेशन के लिए उन्हें क्यों नहीं चुना गया?

उन्हें ये भी कहते रिपोर्ट किया गया कि ”गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति एक स्वायत्त संस्थान है. इसे नियंत्रित करने वाली एक उच्च संस्था है जिसके आदेशों का हम पालन करते हैं. हमें उच्च संस्था से ही संग्रहालय के डिजिटलीकरण का आदेश मिला था और उसके तहत हम तस्वीरों को स्क्रीन में सहेज रहे हैं. कई तस्वीरों को बदला जा चुका है और कुछ आगे बदली जानी हैं. यह प्रक्रिया दिसंबर 2019 से शुरू हुई है. डिजिटलीकरण के अलावा इसका कोई मक़सद नहीं है.”

दीपांकर जिस गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति की बात कर रहे थे, वह भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की वित्तीय सहायता के आधार पर चलती है और भारत के प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष हैं. गांधी स्मृति की वेबसाइट पर यह भी लिखा गया है कि वरिष्ठ गांधीवादियों और सरकार के अलग-अलग विभागों के प्रतिनिधियों का निकाय इसकी गतिविधियों के लिए निर्देश देता है.

सेंट्रल गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष रामचंद्र राही भी बीबीसी से कहते हैं कि संग्रहालय में सन् 1947 तक के दौर के चित्र ज्यों के त्यों रखे गए लेकिन सन् 1948 के एक महीने का जो दौर है, उसके चित्रों को हटाकर गांधी जी के ग्रामसभा वाले विचार लगा दिए गए हैं. उनकी आपत्ति इस पर है कि उनकी जीवन यात्रा का क्रम तोड़ा नहीं जाना चाहिए.

तुषार गांधी का भी ये भी कहना है कि हटायी गई तस्वीरों में गांधी जी की हत्या की शाम को बिड़ला भवन में दिए गए पंडित जवाहरलाल नेहरू के एक ऐतिहासिक भाषण (द लाइट हैज़ गॉन आउट ऑफ अवर लाइव्स) की तस्वीर भी थी, उस भाषण का शब्दरेखन भी उस तस्वीर के साथ लगाया गया था.

तुषार के मुताबिक इसके अलावा एक तस्वीर में गांधी की हत्या की घटना के चश्मदीद गवाह, एक अमेरिकन पत्रकार का बयान भी था, जिसमें उन्होंने उस शाम क्या-क्या देखा था, उसका विवरण तस्वीर के साथ लगाया गया था. जिस बंदूक से बापू की हत्या की गई थी, उसकी तस्वीर भी थी.  उनके अनुसार बहुत सारी ऐसी खूबसूरत तस्वीरें थीं, जिन्हें हटा दिया गया है.

उन्होंने इस तरह तस्वीरें हटाने को निंदनीय बताया. उन्होंने कहा, ‘जिस तरह से उन्होंने तस्वीरों को हटाया है वह निंदनीय है. इनको हटाने वाले इस इतिहास से सहज नहीं हैं क्योंकि वे इस इतिहास से डरते हैं. इतिहास के सबूतों को मिटाना चाहते हैं. वे चाहते हैं कि बिड़ला हाउस टिका रहे परंतु उसके इतिहास के बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी न हो.’

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