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170 साल में पहली बार गैर मुस्लिमों के लिए खोली गई मोदी अब्दुल गफूर मस्जिद

तर्कसंगत

Image Credits: DP Satish/News18,NDTV

January 21, 2020

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कर्नाटक के बेंगलुरु में टस्कर टाउन स्थित मोदी मस्जिद 170 साल में पहली बार गैर-मुसलमानों के लिए खोली गई। रविवार को यहां हर धर्म के पुरुषों के साथ महिलाओं ने भी दौरा किया। इसके पीछे उद्देश्य दूसरे धर्म के लोगों के मन में इस्लाम को लेकर जानकारी बढ़ाना और भ्रांतियां दूर करना है।

पहले दिन करीब 400 लोगों ने मस्जिद का दौरा किया। इनमें हर धर्म के पुरुष और महिलाएं शामिल रहीं।

गैर मुस्लिमों के लिए मस्जिद खोलने का उद्देश्य है- दूसरे धर्म के लोगों के मन में इस्लाम को लेकर जानकारी बढ़ाना और भ्रांतियां दूर करना। आयोजकों ने मस्जिद पहुंचे पर्यटकों को इस्लाम के सिद्धांतों के बारे में बताया। साथ ही कुरान की आयतें भी बुलवाई गईं। इस दौरान गैर इस्लाम समुदाय ने इस्लाम को लेकर अपने संदेहों पर सवाल किए।

पर्यटकों के लिए एक मेडिटेशन सेशन भी रखा गया, जो इवेंट का एक हिस्सा था। आगंतुकों को कुरान की कॉपी भी दी गई।

दरअसल मुंबई के एक चैरिटेबल ट्रस्ट ने सोशल मीडिया पर गैर-मुस्लिम समुदायों को इस्लाम को बेहतर समझने के लिए ‘विजिट माय मॉस्क’ नाम से खुला निमंत्रण भेजा था। इस ग्रुप ने क्रिश्चन कॉलेज के छात्रों के लिए ऐसा ही एक इवेंट आयोजित किया था। चैरिटेबल ट्रस्ट के सादिक सैलानी ने बताया, ‘मस्जिद के दरवाजे हर भारतीय के लिए रविवार को खोले गए, हमने मुस्लिम और गैर मुस्लिम समुदायों के बीच के गैप को खत्म करने के लिए इस इवेंट का आयोजन किया।’

टाइम्स ऑफ़ इंडिया को सादिक ने बताया, ‘इस दौरान इस्लाम को लेकर उनकी गलतफहमी को दूर करने की कोशिश की गई और उनके हर तरह के सवाल का जवाब दिया गया। इस इवेंट का उद्देश्य सभी समुदायों को मुस्लिम समुदायों के बारे में अधिक जानकारी देकर सशक्त बनाना है। बता दें कि इस मस्जिद का पूरा नाम मोदी अब्दुल गफूर मस्जिद है। इन्होंने ही मस्जिद के लिए जमीन दान में दी थी, तभी से मंदिर का नाम उनके नाम पर रखा गया।

 

 

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