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गीता गोपीनाथ : वैश्विक वृद्धि में गिरावट के लिए भारत 80 फीसदी जिम्मेदार

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Image Credits: Livemint

January 21, 2020

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अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने सोमवार को भारत समेत वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए वृद्धि परिदृश्य के अपने अनुमान को संशोधित किया है. इसके साथ ही उसने व्यापार व्यवस्था में सुधार के बुनियादी मुद्दों को भी उठाया. आईएमएफ के ताजा अनुमान के अनुसार 2019 में वैश्विक वृद्धि दर 2.9 प्रतिशत, 2020 में 3.3 प्रतिशत और 2021 में 3.4 प्रतिशत रहेगी. वहीं मुद्राकोष ने भारत के आर्थिक वृद्धि के अनुमान को कम कर 2019 के लिए 4.8 प्रतिशत कर दिया है, जबकि 2020 और 2021 में इसके क्रमश: 5.8 प्रतिशत और 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है.

इससे पहले आईएमएफ ने पिछले साल अक्टूबर में वैश्विक वृद्धि का अनुमान जारी किया था. उसके मुकाबले 2019 और 2020 के लिये उसके ताजा अनुमान में 0.1 प्रतिशत कमी आई है जबकि 2021 के वृद्धि अनुमान में 0.2 प्रतिशत अंक की कमी आई है.

 

 

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रमुख अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा है कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान में गिरावट के लिए भारत मुख्य रूप से जिम्मेदार है. भारत में जन्मीं आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा कि मुख्य रूप से गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र में नरमी तथा ग्रामीण क्षेत्र की आय में कमजोर वृद्धि के कारण भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान कम हुआ है. गीता गोपीनाथ ने कहा कि अमेरिका-चीन व्यापार समझौते पर मामला आगे बढ़ने के साथ अक्टूबर से जोखिम आंशिक रूप से कम हुए हैं.

ये पूछे जाने पर कि वैश्विक गिरावट के लिए किस हद तक भारत जिम्मेदार है, गोपीनाथ ने कहा, ‘सरल गणना कहती है कि ये 80 प्रतिशत से अधिक होगा.’

 

 

भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़त के अनुमान को घटाने के बारे में गोपीनाथ ने कहा कि भारत की पहली दो तिमाही हमारे अनुमानों से कम थी. उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र में नरमी से काफी प्रभाव पड़ा है. उन्होंने कहा, ‘हमने क्रेडिट ग्रोथ में तेज गिरावट और कमजोर कारोबारी धारणा को देखा है. इन सब के कारण वृद्धि दर के अनुमान को घटाया गया है.’

भारत की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की राह के बारे में बात करते हुए गीता गोपीनाथ ने कहा, ‘हम भारत की अर्थव्यवस्था को ठीक होते हुए देखते हैं. अगले वित्तीय वर्ष में महत्वपूर्ण रिकवरी होने की संभावना है. सिस्टम में मौद्रिक प्रोत्साहन की उचित मात्रा है, कॉर्पोरेट टैक्स में भी कटौती है. इनसे ग्रोथ में रिकवरी में मदद मिलनी चाहिए.’

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