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LIC में NPA 5 साल में दोगुना, 30000 करोड़ पहुंचा

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Image Credits: Livemint/Starpng

January 23, 2020

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सरकारी क्षेत्र की बीमा कंपनी होने के नाते भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को भरोसे का प्रतीक माना जाता है. देश के करोड़ों लोगों ने आंख मूंदकर अपनी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा एलआईसी की योजनाओं में लगाया है. भारी नकदी के भंडार पर बैठे होने की वजह से एलआईसी सरकार के लिए भी संकटमोचन का काम करती रही है, इसने सार्वजनिक कंपनियों और बैंकों के शेयर खरीद कर उनको बचाने का काम किया है. लेकिन एलआईसी के नवीनतम बहीखाता देखने से कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आती है.

 

एलआईसी  का एनपीए दोगुना

सरकार के स्वामित्व वाली बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) पर नॉन परफॉर्मिंग ऐसेट (एनपीए) की मार पड़ी है. पांच सालों में कंपनी का एनपीए दोगुना हो गया है. एलआईसी के पास मौजूद नकदी के बड़े भंडार पर जोखिम बढ़ रहा है.

इस वित्त वर्ष यानी 2019-20 के पहले छह महीनों (अप्रैल-सितंबर) में एलआईसी की गैर निष्पादित संपत्त‍ि यानी NPA में 6.10 फीसदी की बढ़त हुई है. यह एनपीए निजी क्षेत्र के यस बैंक, आईसीआईसीआई, एक्सिस बैंक के करीब ही है. कभी बेस्ट एसेट क्वालिटी के लिए ये मशहूर ये निजी बैंक बदले माहौल में बढ़ते एनपीए से परेशान दिख रहे हैं.

बिज़नेस टुडे के मुताबिक एलआईसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 30 सितंबर 2019 तक कुल 30000 करोड़ रुपये का सकल एनपीए है. रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2019 में कंपनी का सकल एनपीए 6.10 प्रतिशत रहा जोकि पिछले पांच सालों में लगभग दोगुना है. यह एनपीए निजी क्षेत्र के यस बैंक, आईसीआईसीआई, एक्सिस बैंक के करीब ही है. 2019-20 की दूसरी तिमाही में यस बैंक का सकल एनपीए 7.39 फीसदी, आईसीआईसीआई का एनपीए 6.37  फीसदी और एक्सिस बैंक का एनपीए 5.03 फीसदी पहुंच गया था.

असल में सार्वजनिक कंपनी एलआईसी ने टर्म लोन और नॉन-कन्वर्ट‍िबल डिबेंचर (NCDs) के रूप में कई कॉरपोरेट कंपनियों को लोन दिया है.

 

किनकी वजह से है बढ़ा एनपीए

डेक्कन क्रॉनिकल, एस्सार पोर्ट, गैमन, आईएलएंडएफएस, भूषण पावर, वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज, आलोक इंडस्ट्रीज, एमट्रैक ऑटो, एबीजी शिपयार्ड, यूनिटेक, जीवीके पावर और जीटीएल आदि में एलआईसी का 25 हजार करोड़ रुपये एनपीए के तौर पर अटका हुआ है. वहीं एलआईसी ने दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड, इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंसियल सर्विसेज (डीएचएफएल) और अनिल अंबानी की अगुवाई वाले रिलायंस ग्रुप सहित कई संकटग्रस्त कंपनियों को भारी-भरकम कर्ज दे रखा है.

एलआईसी को साल में 2,600 करोड़ से ज्यादा का मुनाफा होता है और उसने अपने बहीखातों में इन एनपीए के लिए 90 फीसदी से ज्यादा का  प्रावधान कर रखा है. लेकिन कई दिवालिया हो चुकी कंपनियों के मामले में पैसा मिलना मुश्किल है.

 

राहुल गाँधी ने जताई चिंता

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकारी स्वामित्व वाली जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के बढ़ते एनपीए को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार एलआईसी को नुकसान पहुंचाकर करोड़ों लोगों के भविष्य को जोखिम में डाल रही है. उन्होंने कहा कि करोड़ों ईमानदार लोग एलआईसी में निवेश करते हैं, क्योंकि उनको इस पर भरोसा होता है. लेकिन मोदी सरकार एलआईसी को नुकसान पहुंचाकर इसके भविष्य के साथ ख‍िलवाड़ कर रही है और लोगों के भरोसे को नष्ट कर रही है.

 

 

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