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पेशावर के जाने माने सिख नेता को छोड़ना पड़ा पाकिस्तान

तर्कसंगत

Image Credits: Twitter/Radesh Singh

January 23, 2020

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पाकिस्तान में एक सिख नेता को अपनी जान बचाने के लिए देश से भागना पड़ा है. दरअसल पेशावर के रहने वाले सिख नेता राधेश सिंह टोनी ने बुधवार को अपने ट्विटर हैंडल से एक वीडियो शेयर किया जिसमें उन्होंने दूसरे देशों में रहने वाले सिख समुदाय के लोगों से मदद मांगी. टोनी ने बताया कि उनको और उनके परिवार को पाकिस्तान में जान का खतरा है और उन्हें किसी सुरक्षित जगह जानें में मदद की जाए. हालांकि इसके बाद टोनी ने अपना ट्विटर अकाउंट भी डीएक्टिवेट कर दिया.

राधेश सिंह साल 2018 में आम चुनावों में खड़े हुए थे. वो पेशावर के अपने मूल इलाक़े से चुनाव में खड़े हुए थे. जिसके बाद उन्हें धमकियां मिलनी शुरू हो गई थीं.

 

 

धमकियां मिलनी शुरू होने के बाद उन्होंने पेशावर छोड़ दिया और लाहौर में रहने लगे. वो कहते हैं, “मुझे यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि मैंने ख़ुद की और अपने बच्चों की जान बचाने के लिए पाकिस्तान छोड़ दिया है.” उनका कहना है कि अब नफ़रत का माहौल इतना बढ़ गया है कि कम से कम वो और उनका परिवार पाकिस्तान में सुरक्षित नहीं.

राधेश सिंह फ़िलहाल एक अज्ञात जगह पर रह रहे हैं. अपने मौजूदा निवास पहचान को गुप्त रखते हुए राधेश सिंह ने बीबीसी को बताया, “अगर बात सिर्फ़ मेरी जान की होती तो मैं किसी भी सूरत में पाकिस्तान नहीं छोड़ता लेकिन ये मेरे परिवार और मुझसे जुड़े लोगों की ज़िंदगी का भी सवाल था. ऐसी स्थिति में मेरे पास मातृभूमि छोड़ने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था.” उन्होनें आगे बताया कि पेशावर छोड़ लाहौर में जब वे घर खोजने निकले तो मुसलमान और ईसाइयों के अलावा सिखों ने भी उन्हें घर देने से इनकार कर दिया.

शिरोमणी अकाली दल (SAD) के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक वीडियो मैसेज जारी कर कहा, “राधेश सिंह टोनी ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों का खुलासा किया है.” उन्होंने कहा, “टोनी जो कि 2018 में पेशावर के अपने मूल इलाके से चुनाव में खड़े हुए थे. जिसके बाद उन्हें धमकियां मिलनी शुरू हो गईं थीं. इस वजह से उन्हें देश छोड़ना पड़ा.”

सिरसा ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से अपील की कि इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र (UN) में उठाना चाहिए और यह मैसेज दिया जाए कि हिंदुस्तान हमेशा ही पाकिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यकों के साथ खड़ा है.

 

 

खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के पेशावर में राधेश सिंह टोनी वहां अल्पसंख्यक समुदाय की आवाज माने जाते थे. उन्होंने साल 2018 में पेशावर के अपने मूल इलाके से आम चुनाव लड़ा था. वे निर्दलिय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े थे. चुनाव लड़ने के बाद से ही उनको धमकियां मिलनी शुरू हो गईं थीं. इसके बाद वो पेशावर छोड़ कर लाहौर चले गए. यहां पिछले हफ्ते कुछ अज्ञात हमलावरों ने उन पर हमला किया था. जिसके बाद से ही टोनी गायब हैं. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट भी बंद कर दिए हैं. राधेश सिंह फिलहाल एक अज्ञात जगह पर रह रहे हैं.

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