सप्रेक

17 साल की उम्र में इन्होनें 40 से ज़्यादा बाल विवाह रुकवाए और 700 गरीब बच्चों को शिक्षा दे रही हैं

तर्कसंगत

January 24, 2020

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विभिन्न जागरूकता पहलों और कानूनों के बावजूद बाल विवाह अभी भी कई ग्रामीण इलाकों में पनप रहा है। हरियाणा के दौलतपुर गाँव की सत्रह वर्षीय अंजू वर्मा बाल विवाह और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ मजबूती से लड़ रही हैं। वह बुलंद उड़ान नाम की एक संस्था का नेतृत्व करती हैं, जो बाल कल्याण के लिए काम करती है। अब तक संगठन ने 700 से अधिक बच्चों का स्कूल में नामांकन कराया है और साथ ही 40 बाल विवाह पर रोक लगाई है। अंजू को 15 यौन-उत्पीड़न मामलों में हस्तक्षेप करने का श्रेय जाता है और उन्होने एक कन्या भ्रूण हत्या को भी रोका है।

 



 

अंजू को 965 बाल अत्याचार मामलों को सुलझाने का श्रेय भी दिया जाता है। उन्होने तर्कसंगत को बताया, “ऐसे क्षेत्र में जहां लड़कियों को सलवार सूट के अलावा कुछ भी पहनने की अनुमति नहीं थी, यहां तक कि आप अपने पिता से भी आँख नहीं मिला सकते हैं या उनकी कोई राय मायने नहीं रखती, ऐसे में मैंने अपने गांव में बाल अत्याचारों के खिलाफ लड़ाई के लिए कदम बढ़ाने का फैसला किया।” एक ट्रक ड्राइवर की बेटी अंजू यह सुनिश्चित करती हैं कि प्रत्येक छात्र जिसने स्कूल दाखिला लिया है, वह बेहतर पढ़ रहे हैं। इन सभी छात्रों ने अब तक अपनी परीक्षा में 70 प्रतिशत से ऊपर अंक प्राप्त किए है। इस काम के लिए अंजू ने अपने गांव के सरपंच की भी मदद ली है।



 

वह आगे कहती हैं, “सरपंचजी और मैंने यह सुनिश्चित करने के लिए एक योजना बनाई कि जब अन्य माता-पिता अपने बच्चों के अच्छे प्रदर्शन पर सराहना प्राप्त करते हैं, तो इन लड़कियों के माता-पिता को उनसे घर का काम कराने और पढ़ाई समय को नष्ट करने के लिए शर्मिंदा होना पड़ता है।” छोटे बच्चों के कल्याण और अधिकारों के लिए लड़ना अंजू की प्राथमिकता है। उन्होने खुद भी उनही कठिनाइयों का सामना किया है। पाँच साल की अंजु जब छुट्टियों में अपनी चाची के घर गई, तो उन्हें घर के सभी काम करने पड़े। जब वह केवल 10 साल की थी तब उन्हे 15 लोगों के लिए चाय बनानी पड़ती थी। वह हर दिन सुबह पांच बजे उठकर सब्जियों को काटती थी और घर को साफ करती थीं।

तर्कसंगत से बात करते हुए उन्होनें कहा  “मेरी चाची ने मुझे चाय बनाने का तरीका न जानने के लिए कई बार अपमानित भी किया। हर बार जब मैं कोई गलती करती थीं, तो घर में हड़कंप मच जाता था। देर रात में मुझे बर्तन धोने पड़ते थे। मुझे सभी काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा। मुझे एक नौकर की तरह समझा गया था।” अंजू किसी तरह अपने पिता के साथ अपनी चाची के घर से भागने में सफल रहीं। यही वो समय था, जब उन्होने महसूस किया कि उन्हे बच्चों के कल्याण के लिए काम करने की जरूरत है। तब से वह कई बच्चों से बात कर रही हैं और उनकी दुर्दशा को समझ रही है। इसी के साथ वो उनकी ओर से बोल रही हैं।

 



 

अब अंजू एक सफल सामाजिक कार्यकर्ता और TEDx स्पीकर भी हैं। सात लोगों की प्रारंभिक टीम के साथ बुलंद उड़ान के साथ अब 20 सदस्य जुड़े हुए हैं। उनके माता-पिता उसके सभी प्रयासों में उसका समर्थन करते हैं और उसे प्रोत्साहित करते हैं। अंजू आगे कहती हैं, “मेरे पिता राजेंद्र कुमार एक ट्रक ड्राइवर हैं और यहां तक कि अगर वह 20,000 रुपये महीने कमाते हैं, तो वह मेरे लिए हर महीने लगभग 10 हज़ार रुपये निर्धारित करते हैं। उन्होने कहा कि मैं उड़ान पर ध्यान केन्द्रित करूँ, बाकी चीजों का ध्यान वे रखेंगे।”

 


 


पुरस्कारों और मान्यताओं के बारे में पूछे जाने पर, हिम्मत वाली किशोरी कहती है, “मैं पुरस्कारों को उपलब्धि नहीं मानती। अगर मुझे स्कूल में कम से कम एक और बच्चे का दाखिला मिल सकता है, तो यह मेरी उपलब्धि है।”

 

 

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