मेरी कहानी

मेरी कहानी : मैंने परीक्षा को क्रैक किया और IPS के रूप में चुनी गयी, दिल को संतोष था लेकिन मन ने कहा “आगे क्या ?”

तर्कसंगत

Image Credits: Humans Of Lbsnaa/Facebook

January 24, 2020

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“हम सभी ने ये सुना है कि आपकी असल ज़िंदगी आपके कम्फर्ट जोन के बाहर शुरू होती है। मैं एक दक्षिण भारतीय आंध्र परिवार से हूँ जो कि भिलाई, छत्तीसगढ़ में बसे हैं, मैं भाग्यशाली थी कि मुझे उत्तर और दक्षिण संस्कृति की जीवनशैली मिली। किसी भी मध्यम वर्गीय परिवार की तरह मेरा भी एकमात्र उद्देश्य अच्छी शिक्षा और अच्छी नौकरी पाना था। मैं उसी “सुरक्षित पथ” पर बढ़ रही थी. जब एक दिन मैंने अपनी नौकरी से इस्तीफा देने का फैसला कर लिया और बैग पैक कर यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली जाने का फैसला किया। बेशक, मेरा परिवार यूपीएससी की तैयारी के मेरे फैसले से खुश था, लेकिन मेरी नौकरी और अनिश्चित भविष्य की सुरक्षा को लेकर चिंतीत भी था। ये तैयारी किसी टेस्ट मैच से कम नहीं थी जो पूरे साल के लिए आपके सच्चे धैर्य का परीक्षण करता है। यह एक मिश्रित भावना थी जब मैंने परीक्षा को क्रैक किया और IPS के रूप में चुनी गयी, दिल को संतोष था लेकिन मन ने कहा “आगे क्या ?”

श्रीनगर में अपनी दूसरी सर्दियों में मेरा मन आज भी यही दोहराता है कि “आगे क्या ?” इसी तरह की भावना थी जब मैंने पहली बार LBSNAA में प्रवेश किया, कई बड़े लोगों से मिली और कुछ दोस्त बनाए। तीन महीने की अवधि में सभी प्रकार के रोमांच का अनुभव करने वाले कभी नहीं जानती थी कि भविष्य में मेरे लिए क्या है!

कश्मीर में लगतार दूसरे साल की ठंड का अनुभव करते हुए मेरे मन ने मुझसे दोबारा पुछा आगे क्या ? कश्मीर के ठंड घाटी में पुलिस के रूप में काम करना एक चुनौतीपूर्ण काम है लेकिन साथ ही साथ यह एक बहुत बड़ी सीख भी है। एक महिला अधिकारी होने के नाते, मैं उस पारम्परिक सेटअप में नई थी क्योंकि मेरे सहकर्मियों ने कभी भी किसी महिला सहकर्मी के साथ ग्राउंड लेवल पर काम नहीं किया था। “मैडम” के क्षेत्र में सक्रिय होने का विचार उनके लिए कुछ ऐसा था जिसे मुझे केवल शब्दों के बजाय अपने कार्यों से साबित करना था। अमरनाथ यात्रा की तैयारी से शुरू हुई जिम्मेदारी जुलाई के अंतिम दिन आते आते और बढ़ गयी, जम्मू-कश्मीर पुलिस की नींद हराम होने लगी। 5 अगस्त 2019 की योजना जितनी गोपनीय थी, उतनी ही सुरक्षा बलों को इस बात का शक था कि कुछ होने वाला है जिसके लिए हमें तैयार रहने के लिए कहा गया था। उस समय मुझे एनपीए के दिन कठिन प्रशिक्षण सत्र फ्लैशबैक के रूप में मेरी आँखों के सामने तैर रहे थे। कभी भी नहीं सोचा था कि वास्तविक स्थितियों में आपके शरीर और दिमाग को इतने दिन बिना रुके काम करना पड़ सकता है।

 



 

संचार व्यवस्था पर रोक के साथ, हमें वापस से पुराने वायरलेस सिस्टम पर भरोसा करना पड़ा। आम लोगों के लिए अपने फोन से उन्हें उनके परिजनों के सुरक्षित होने का खबर जानने देने के लिए फ़ोन देकर हम उनके करीब आये और खुद को भी संतोष हुआ। यह वह समय था जब आप वास्तव में नेतृत्व सीखते हैं और उस पर अमल करते हैं। जब हम अपने डिपार्टमेंट के लोगों के साथ खड़े होते हैं और काम करते हैं तो यह जरूरी हो जाता है कि उन्हें वर्दी में गर्व के बारे में याद दिलाया जाए और इसके लिए पहले आपको खुद को इसे अपने अंदर महसूस करना होता है और तब दूसरों में इस जज़्बे को डालना होता है। बाकी देश के लिए बहुत कुछ बदला, लेकिन जमीन पर लोगों के लिए कुछ भी नहीं बदला, केवल कुछ भ्रम और अनिश्चितता कायम रही। शुरुआती दिनों में सड़कें सुनसान थीं और कभी-कभार कानून और व्यवस्था सँभालने की चुनौती पैदा होती थी।

एक दोपहर हमें राजनीतिक नेताओं को उप जेल में स्थानांतरित करने का काम सौंपा गया था और उसी समय मेरे अधिकार क्षेत्र में कानून और व्यवस्था के हालात बिगड़ गए थे। हम तुरंत मौके पर पहुंचे और एसएचओ के साथ मोर्चा संभाला, मैंने और मेरी टीम ने पीछे धकेला। शाम अज़ान तक ये सारी अफरा तफरी जारी रही और अज़ान के बाद ऐसी स्थिति से दोबारा निपटने के लिए विस्तृत योजना बनाई गई। हमारे लोगों ने बहुत मेहनत की और इसी कारण से बदमाशों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कुल मिलाकर हम अपनी प्लान पर काम करने में कामयाब रहे और प्रत्येक अधिकारी ने इतने गहरे मानसिक तनाव में भी बेहतर प्रदर्शन किया।

घाटी में सेवारत एक पुलिस अधिकारी के रूप में, मैं कहूँगी कि हमारी असल परीक्षा जमीनी स्तर पर हमारे काम करने की तरीके में होती है और एक सीनियर अफसर होने के नाते यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी टीम को उच्च मनोबल और गर्व के साथ काम करने के लिए प्रेरित करें क्योंकि भावनाओं का अभी भी मजबूत प्रभाव है।”

 

पी डी नित्या,आईपीएस 2016 बैच जम्मू कश्मीर कैडर

 

"It is said that life begins at the end of your comfort zone. Hailing from a South Indian (Andhra) family which is…

Posted by Humans of Lbsnaa on Sunday, 8 December 2019

 

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