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2000 ट्रांसजेंडर एनआरसी से बाहर, सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर सरकार से माँगा जवाब

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Image Credits: Telegraph India

January 27, 2020

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असम में तैयार हुए राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) में करीब 2000 ट्रांसजेंडरों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं।  इन नागरिकों को एनआरसी से बाहर छोड़ने पर दायर एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और असम सरकार से जवाब मांगा है।

 

कोर्ट ने सरकार से मांगा है जवाब

मुख्य न्यायाधीश एस. ए. बोबडे और न्यायाधीश बी. आर. गवई और सूर्य कांत की बेंच ने स्वाति बिधान बरुआ की जनहित याचिका पर सरकार को नोटिस जारी किया है। असम की पहली ट्रांसजेंडर जज स्वाति बिधान बरुआ ने सुप्रीम कोर्ट में यह जनहित याचिका दायर की है। उन्होंने याचिका में कहा है कि एनआरसी प्रक्रिया के समय ट्रांसजेंडरों को बाहर रखा गया। इसके कारण एनआरसी के फाइनल ड्राफ्ट में उनके नाम शामिल नहीं हो सके।

साल स्वाती बिधान बरुआ ने ये भी दावा किया था कि उन पर पुरुष श्रेणी के तहत मताधिकार का इस्तेमाल करने का दबाव बनाया गया। स्वाती से कहा गया था कि उनके मतदान से संबंधित दस्तावेज सही नहीं हैं। बरुआ के मुताबिक ट्रांसजेंडर समुदाय में मतदान की संख्या इसलिए कम रहती है क्योंकि इनमें से कई वोटर आईडी में जेंडर ऑप्शन नहीं बदल पाये हैं। बरुआ ने कहा था  ‘मैं थर्ड जेंडर ऑप्शन के तहत मतदान करना चाहती थी लेकिन ऐसा नहीं कर सकी। मैंने मुख्य चुनाव अधिकारी से भी संपर्क किया ताकि जेंडर संबंधी मेरे कागजात सही हो जाएं लेकिन मुझसे चुनाव के बाद आने के लिए कहा गया।’

 

 

एनआरसी के साथ सीएए और एनपीआर का विरोध

दूसरे देशों खासकर बांग्लादेश के घुसपैठियों की पहचान के लिए असम में तैयार किए गए एनआरसी में करीब 19 लाख लोग शामिल नहीं हो पाए हैं। इन लोगों की नागरिकता साबित करने के लिए आगे की प्रक्रिया चलाई जाएगी। दूसरी ओर, केंद्र सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पारित किए जाने और पूरे देश में एनआरसी के साथ राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) लागू किए जाने की योजना के चलते लगातार विरोध हो रहा है।

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