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सशस्त्र सीमा बल में पैसे की कमी के कारण सैलरी के पैसे नहीं

तर्कसंगत

Image Credits: Rakshak News

January 28, 2020

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सशस्त्र सीमा बल के 90,000 कर्मियों को उनके उनके भत्ते के साथ साथ उनके बच्चों के लिए दिए जाने वाले चाइल्ड एजुकेशन फण्ड का भी जनवरी और फरवरी माह में  “धन की कमी” के कारणभुगतान नहीं किया गया है।

द टेलीग्राफ के खबर के अनुसार सीमा बल ने अपनी सभी संरचनाओं को बताया है कि इन दो महीनों के वेतन का भुगतान करने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। आर्थिक मंदी के दावों के बीच ये खबर चिंताजनक है।

चार महीने में यह दूसरी बार है कि जब एक अर्धसैनिक बल को देने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार के पास पर्याप्त पैसे नहीं है, जो खुद को सशस्त्र बलों का समर्थक बताते हैं।

पिछले सितंबर में, सीआरपीएफ ने अपने 3 लाख कर्मियों से कहा था कि उन्हें 3,600 रुपये के उनके मासिक “राशन भत्ते” का भुगतान नहीं किया जाएगा क्योंकि गृह मंत्रालय ने पैसे की कमी से जुड़े उनको भेजे गए तीन रिमाइंडर पर ध्यान नहीं दिया था।

द टेलीग्राफ ने इस मामले की रिपोर्ट करने के बाद, काफी विवाद हुआ और गृह मंत्रालय ने अक्टूबर में पैसे जारी किये।

सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के 94,261 कर्मचारी नेपाल और भूटान के साथ 2,450 किमी खुली सीमा की सुरक्षा करते हैं, जो खुफिया जानकारी इकट्ठा करते हैं और माओवादी बेल्ट, जम्मू और कश्मीर और असम के बोडो क्षेत्रों में आंतरिक सुरक्षा के साथ मदद करते हैं।

एक आंतरिक संचार एसएसबी ने 23 जनवरी को जारी किया, जिसमें सभी भत्तों पर दो महीने की फ्रीज की घोषणा की गई है, जिसमें “बच्चों की शिक्षा भत्ता” (सीईए) और यात्रा रियायत (एलटीसी) भी शामिल है।

 

अखबार के अनुसार एसएसबी के महानिदेशक कुमार राजेश चंद्र ने टिप्पणी से इनकार कर दिया, कहा: “मैं अपने अधिकारियों के साथ वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग में व्यस्त हूं। कृपया मुझे तंग न करे।” उन्होंने सर्कुलर के बारे में पूछे जाने पर फ़ोन की लाइन काट दी।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की प्रवक्ता वसुधा गुप्ता ने कहा कि फंड की कमी नहीं है। इस अखबार ने उन्हें रात 8 बजे के आसपास व्हाट्सएप के माध्यम से सर्कुलर की एक कॉपी भेजी। उन्होनें देर रात तक कोई जवाब नहीं दिया था। बता दें कि एसएसबी गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करता है।

 

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