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BHU में संस्कृत पढ़ाने वाले डॉ. फिरोज खान के पिता को पद्मश्री से किया जाएगा सम्मानित

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Image Credits: News18

January 28, 2020

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वर्ष 2020 के लिए पद्म पुरस्कारों का ऐलान हो चुका है. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर इन पुरस्कारों की घोषणा हुई. पूर्व केंद्रीय मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज को मरणोपरांत पद्म विभूषण सम्मान दिया गया है. एमसी मैरीकॉम, शास्त्रीय गायक छन्नूलाल मिश्रा सहित यह पुरस्कार कुल 7 लोगों को दिया जाएगा. 16 हस्तियों को पद्म भूषण और 118 लोगों को पद्म श्री देने का ऐलान किया गया है. हालांकि इस साल भारत रत्न का ऐलान नहीं किया गया है.

इन पद्म पुरस्कारों में राजस्थान के भजन गायक रमजान खान उर्फ मुन्ना मास्टर को पद्मश्री से नवाजा गया है. वह प्रोफेसर फिरोज खान के पिता हैं, जिनका पिछले दिनों बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के संस्कृत निकाय में नियुक्ति को लेकर काफी बवाल मचा था. मुन्ना मास्टर जयपुर के रहने वाले हैं. वे भगवान श्रीकृष्ण  और गाय पर भक्ति गीत के लिए मशहूर हैं. रमज़ान खान ने कहा कि यह अल्लाह का करम और अहसान है. फिरोज़ ने विभिन्न न्यूज़ एजेंसी को बताया कि उनके परिवार को संगीत और संस्कृत का संस्कार दादा गफूर खान से मिला. उन्होंने ही पिता और फिर पिता ने हम बच्चों को इस ओर प्रेरित किया. फिरोज ने कहा कि पिता को यह सम्मान मिलने से वे खुद को बेहद गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं. रमज़ान ने कहा कि गो माता की सेवा और कृपा से ही ऐसा संभव हुआ है. इस सम्मान का श्रेय वे अपने पिता गफूर खान को देते हैं, जिन्होंने उन्हें इस राह पर चलाया. 61 साल के मुन्ना मास्टर जयपुर के बगरू के रहने वाले हैं. उन्होंने श्री श्याम सुरभि वंदना नाम से किताब भी लिखी है. वह संस्कृत का भी अच्छा ज्ञान रखते हैं.

 

 

पद्मश्री की इस लिस्ट में फिल्म निर्माता करण जौहर, कंगना रनौत के अलावा एकता कपूर, सिंगर सुरेश वाडेकर, अदनान सामी, टीवी एक्ट्रेस सरिता जोशी का नाम शामिल है. इसके अलावा कुछ और नाम ये हैं.

 

मोहम्मद शरीफ : पेशे से साइकल मैकेनिक चाचा शरीफ अपने खर्चे पर लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करते हैं. यूपी के अयोध्या और उसके आसपास के इलाके में 25 वर्षों में 25 हजार से अधिक शव का अंतिम संस्कार कर चुके हैं. हिंदू की लाश जलाते और मुस्लिमों के शवों को दफनाते हैं.

अब्दुल जब्बार : भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के पुनर्वास के लिए तीन दशक तक काम किया. कानूनी लड़ाई लड़ी. 2300 विधवाओं को वोकेशनल ट्रेनिंग दी. मरणोपरांत पद्मश्री मिला.

ऊषा चाउमार : कभी खुद हाथों से मैला उठाती थीं. सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस ऑर्गेनाइजेशन की नई हेड हैं. हजारों लोगों की आवाज बन चुकी हैं.

पोपटराव पवार : सरपंच रहते गांव की तकदीर बदल दी. कभी सूखे से जूझने वाला गांव ग्रीन मॉडल विलेज बन चुका है. 4.5 लाख पौधे रोपे, पहाड़ियों पर हजारों खाईं बनाईं.

जावेद अहमद टाक : कश्मीर के दिव्यांग बच्चों का भविष्य संवारने में लगे हैं. एक आतंकी हमले में खुद भी शिकार हुए और फिर कभी व्हिलचेयर से नहीं उठ पाए, लेकिन हौसला नहीं हारा.

तुलसी गौड़ा : कभी औपचारिक शिक्षा नहीं ली, लेकिन हजारों पेड़-पौधों के बारे में अथाह जानकारी है. 72 की उम्र में भी पर्यावरण के लिए काम करने का अद्भुत जज्बा है.

 

 

 

पद्म विभूषण की लिस्ट इस प्रकार है 

  1. जॉर्ज फर्नांडीस (मरणोपरांत),  बिहार
  2. अरुण जेटली (मरणोपरांत),  दिल्ली
  3. अनिरुद्ध जगन्नाथ, पूर्व प्रधानमंत्री, मॉरीशस
  4. एम.सी. मैरी कॉम, खेल, मणिपुर
  5. छन्नूलाल मिश्र, कला, उत्तर प्रदेश
  6. सुषमा स्वराज (मरणोपरांत), दिल्ली
  7. विश्वेश तीर्थ स्वामी जी(मरणोपरांत), अन्य-अध्यात्मवाद, कर्नाटक

 

पद्म भूषण से नवाजी गईं ये हस्तियां

  1. मुमताज अली
  2. सैयद मुआजेम अली (मरणोपरांत)
  3. मुजफ्फर हुसैन बेग
  4. अजय चक्रवर्ती
  5. मनोज दास
  6. बालकृष्ण दोषी
  7. कृष्णाम्मल जगन्नाथन
  8. एससी जमिर
  9. अनिल प्रकाश दोषी
  10. सेरिंग नंडोल
  11. आनंद महिंद्रा
  12. नीलकंठ रामकृष्ण माधव मेनन (मरणोपरांत)
  13. मनोहर पर्रिकर (मरणोपरांत)
  14. प्रो जगदीश सेठ
  15. पीवी सिंधु
  16. वेणु श्रीनिवासन

 

 

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