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कौन हैं CRPF के असिस्टेंट कमांडेंट नरेश कुमार जिनको मिले हैं 6 वीरता अवॉर्ड ?

तर्कसंगत

Image Credits: Amar Ujala

January 31, 2020

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श्मीर में तैनात सीआरपीएफ के ऑफिसर नरेश कुमार की इन दिनों हर जगह चर्चा हो रही है. एक ऐसा ऑफिसर जिसे पिछले सिर्फ चार साल में वीरता के लिए 6 मेडल मिले हैं. नरेश इन दिनों CRPF क्रैक कमांडो यूनिट की क्विक एक्शन टीम के प्रमुख हैं. समाचार एजेंसी एनएनआई से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि अब तक उनकी टीम ने अलग-अलग ऑपरेशन में करीब 50 आतंकियों को मार गिराया है.

उनके सीने पर लटक रहे छह वीरता पदक उनकी बहादुरी का दास्तां सुनाते हैं. तीन वीरता पदक अभी पाइप लाइन में हैं. सहायक कमांडेंट नरेश कुमार बताते हैं कि हमारी आतंकियों से मुठभेड़ चल रही होती है और घर से फोन आ जाता है. परिवार वाले पूछते हैं, कैसे हो. जब तक मैं कुछ बोलता, झट से उनका दूसरा सवाल आ जाता है. अरे कहां हो, ये आवाजें कैसी आ रही हैं.

बता दें कि सहायक कमाडेंट नरेश कुमार साल 2013 में सीआरपीएफ का हिस्सा बने थे. ट्रेनिंग के बाद उन्हें कश्मीर में पहली पोस्टिंग मिली. मंगलवार को डीजी डॉ. एके महेश्वरी ने उनका सम्मान किया. इस गणतंत्र दिवस पर उन्हें पुलिस का वीरता पदक मिला है.इस बार उन्हें छठी बार वीरता के लिए प्रतिष्ठित पुलिस पदक दिया गया. ये पदक उन्हें साल 2018 के छतरबाल ऑपरेशन के लिए दिया गया. इस ऑपरेशन में नरेश कुमार और उनकी टीम ने लश्कर ए तैयबा के कमांडर शौकत अहमद ताक को मार गिया था. अहमद का नाम टॉप टेन मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों में शामिल था. उस वक्त इस ऑपरेशन की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी तरीफ की थी.

सीआरपीएफ के करन नगर कैंप पर आतंकियों ने हमला किया। एक खाली मकान में छुपे आतंकियों के साथ मुठभेड़ 24 घंटे चली. कुमार की पत्नी शीतल रावत जो कि खुद एक असिस्टेंट कमांडेंट हैं इस दौरान बेचैनी से पति के विजयी होकर लौट आने के लिए प्रार्थना कर रही थीं. करन नगर एनकाउंटर में 24 घंटे बीतने के बाद कुमार ने 6 सदस्यों की एक स्पेशल टीम बनाई और चारों तरफ से मकान को घेरकर घर में छुपे एक आतंकी को मार गिराया.

एक और अहम एनकाउंटर बिजबहेरा के अरवानी में 7 दिसंबर 2016 को हुआ था. जब उन्हें सूचना मिली कि हिजबुल मुजाहिद्दीन के दो कमांडर एक मकान में हैं. यह विपरीत परिस्थितियों में हुआ एनकाउंटर था. वहां तीन दिन तक एनकाउंटर और पत्थरबाजी चलती रही. एक अर्धसैनिक बल का जवान उसमें जख्मी हुआ था. पहले ये योजना थी कि उस मकान को उड़ा दिया जाएगा. लेकिन वहां हजारों लोग थे और आसपास के इलाके में भी बड़े नुकसान का अंदेशा था. ऐसे में क्यूएटी को को जिम्मेदारी दी गई. कुछ ही मिनटों में हम घर में घुस गए और आतंकियों को मार गिराया. इस ऑपरेशन के लिए उन्हें दूसरा मेडल मिला था.

एक आर्मी बैकग्राउंड वाले परिवार से आनेवाले नरेश कुमार पंजाब के होशियारपुर के हैं. पंजाब यूनिवर्सिटी से उन्होंने अपनी बीटेक डिग्री की और फिर सेना में शामिल हुए. नरेश कुमार की पत्नी शीतल रावत भी सहायक कमांडेंट है. पिता सेना से रिटायर हैं. इसके अलावा उनका मेरा चचेरा भाई भी आर्मी में है. उन्हें भी सेना का मेडल मिल चुका है. नरेश कुमार का कहना है कि वो पिता की विरासत को आगे बढ़ाना चाहते हैं.

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