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सीएजी रिपोर्ट : सियाचिन,डोकलाम जैसे मोर्चों पर सैनिक झेल रहे जरूरी समानों की किल्लत

तर्कसंगत

Image Credits: YouTube/Pngkey

February 4, 2020

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सियाचिन और डोकलाम जैसी देश की बर्फीली सरहदों पर तैनात सैनिकों के पास सर्दी से मुकाबले के कई ज़रूरी साजो-सामान किल्लत है तो वहीं से मुश्किल हालात में ड्यूटी करने के लिए आवश्यक खास पोषण की भी कमी है. यह बात भारतीय सेना के कामकाज पर नियंत्रक महालेखा परीक्षक की ताजा रिपोर्ट में उजागर हुई है. सीएजी ने सरकार से इन कमियो को दूर करने को कहा है.

यह रिपोर्ट कल संसद में रखी गई. इसके शब्द हैं, ‘ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पहले जाने वाले विशेष कपड़ों और वहां इस्तेमाल होने वाले जरूरी उपकरणों की खरीद में चार साल तक की देरी देखी गई. इसके चलते इनकी काफी कमी हो गई.’ सीएजी के मुताबिक बर्फीले इलाकों में चौंध से आंखों को बचाने वाले स्नो गॉगल की 62 फीसदी तक कमी देखी गई. सीएजी के मुताबिक नवंबर 2015 से सितंबर 2016 के दौरान जवानों को ‘मल्टी परपज बूट’ नहीं दिए जा सके. इसके चलते पुराने जूतों को दुरुस्त करके ही काम चलाना पड़ा.

सीएजी की यह रिपोर्ट उन खबरों के बीच आई है जिनमें कहा गया है कि सेना आम बजट में उसे हुए आवंटन से खुश नहीं है. इस बार रक्षा बजट में मामूली बढ़ोतरी करते हुए 2020-21 के लिए इसमें 3.37 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. पिछले बजट में यह आंकड़ा 3.18 लाख करोड़ रुपये था. तीनों बल ज्यादा बजट आवंटन की मांग करते रहे हैं ताकि काफी समय से लंबित आधुनिकीकरण योजनाओं को आगे बढ़ाया जा सके. विशेषज्ञों के मुताबिक रक्षा आवंटन जीडीपी का 1.5 प्रतिशत बना हुआ है, और यह 1962 के बाद से सबसे कम है. पिछले वर्ष बालाकोट हमले के बाद से रक्षा बजट बढ़ाए जाने की उम्मीद थी.

भारत की अधिकतर ज़मीनी सीमाएं पर्वतीय क्षेत्र में है ऐसे में सियाचिन लद्दाख डोकलाम आदि दुर्गम क्षेत्रों में सैनिकों को विशेष कपड़ों उपकरणों विशेष राशन और आवास सुविधा की जरूरत होती है. इसके सहारे भारतीय सैनिक कठोर मौसम और बेहद सर्द हालात से होने वाली बीमारियों का मुकाबला करने में समर्थ हो पाते हैं.

सीएजी रिपोर्ट के अनुसार ज़रूरत से समय प्रक्रिया की देरी के कारण सैनिकों को निजी उपयोग के लिए आवंटित साजो सामान को रिसाइकल भी करना पड़ा. जिसके कारण उनकी स्वच्छता व स्वास्थ्य भी प्रभावित हुआ. गौरतलब है कि सेना की पूर्वी कमान में 9000 फीट से अधिक की ऊंचाई और उत्तरी कमान क्षेत्र में 6000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनाती पर एक्स्ट्रीम कोल्ड क्लोथिंग एंड इक्यूप्मेंट (ईसीसीई) के तहत साजो समान दिया जाता है. ईसीसीई की पहली श्रेणी में विशेष बूट्स, कोट, दस्ताने, चश्मे, सोने वाले बैग आदि आते हैं.

रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई कि अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में की पर्वतारोहण सामग्री ऐसी भी है जिसका इस्तेमाल भारतीय सैनिक उनकी एक्सपायरी डेट के बाद भी कर रहे हैं.

जबकि तापमान माईनस 50 डिग्री से भी अधिक नीचे गिर जाता है तो भूख कम लगती है. साथ ही शरीर के लिए सामान्य कामकाज करना भी कठिन होता है. ऐसे में बोझ उठाने और ड्यूटी अन्य कामकाज करना कठिन होता है. वहीं इन इलाकों में जब खाद्यान्न सामग्री की आपूर्ति नहीं होती तो कई वैकल्पिक पदार्थ सैनिकों को उपलब्ध कराए जाते हैं. मगर ऑडिट में सामने आया की इन वैकल्पिक पदार्थों के उपयोग के कारण सैनिकों की कैलोरी जरूरतों में 48 से 82 फीसद तक की कमी दर्ज की गई. सीएजी ने सरकार से इस स्थिति में सुधार करने और विशेष राशन आपूर्ति प्रक्रिया को नियमित करने को कहा है.

सीएजी रिपोर्ट में इंडियन नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी की स्थापना में हो रही देरी का भी जिक्र है. इसकी सिफारिश 1999 के करगिल युद्ध के बाद बनी एक कमेटी ने की थी. सीएजी के मुताबिक इस परियोजना की लागत 395 करोड़ रु की तुलना में 914 फीसदी छलांग लगाते हुए 4007.22 करोड़ हो चुकी है, लेकिन इसका धरती पर उतरना अब भी बाकी है.

 

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