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गेहलोत सरकार ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अलग से बनाएगी पहचान-पत्र

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Image Credits: Starpng/Zee News

February 7, 2020

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 राजस्थान की अशोक गेहलोत सरकार ट्रांसजेंडर समुदाय को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए योजना बना रही है. इसी कड़ी में राज्य सरकार अब प्रदेश के 16 हजार 517 ट्रांसजेंडरों के लिए अलग से पहचान-पत्र बनाएगी. अलग पहचान-पत्र के माध्यम से इनको सरकारी नौकरी सहित अन्य सरकारी योजनाओं का प्राथमिकता से लाभ दिया जाएगा.

इससे इस समुदाय के लोगों को सरकारी नौकरी मिलने में आसानी होगी. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल ने कहा की राज्य के कार्मिक विभाग के साथ मिलकर नियम बनाए जाएंगे ताकि सरकारी नौकरी में भी इस समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित हो सके.

भंवरलाल मेघवाल की अध्यक्षता में गुरुवार को ट्रांसजेंडर समुदाय की समस्याओं का निराकरण करने के लिए गठित राजस्थान कल्याण बोर्ड की बैठक हुई. बैठक में ट्रांसजेंडर समुदाय की समस्याओं का निराकरण एवं ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को अन्य विभागों की योजनाओं से जोड़ने एवं आरक्षण के सम्बन्ध में चर्चा हुई.

मेघवाल ने कहा कि प्रदेश में 16, 517 व्यक्ति इस वर्ग से हैं जिन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए उन्हें विभिन्न विभागों की योजनाओं से जोड़ कर लाभान्वित करने पर विचार किया जा रहा है. इसके लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग आयुक्त की अध्यक्षता में समिति का गठन किया जाएगा। समिति में समुदाय के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे.

मंत्री भंवरलाल मेघवाल ने कहा कि प्रदेश में वैसे तो ट्रांसजेंडर समुदाय की संख्या एक लाख से अधिक है, लेकिन जनगणना के आधार पर राज्य में 16,517 ट्रांसजेंडर हैं. मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल ने गुरुवार को सचिवालय में राजस्थान ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड के साथ अहम बैठक की. बैठक में ट्रांसजेंडर समुदाय की समस्याओं पर मंथन किया गया. बैठक के बाद किन्नर अखाड़ा की प्रदेश अध्यक्ष पुष्पा माई ने कहा कि मंत्री के साथ हुई बैठक बेहद सकारात्मक रही है.

ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अलग से पहचान-पत्र बनाने के लिए प्रदेश के सभी जिला कलेक्टर्स को आदेश जारी किए जाएंगे. जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति राज्य में रह रहे ट्रांसजेंडर समुदाय की जनगणना करेगी.

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