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क्या होती है शत्रु सम्पति? जिसे बंगाल में बेचने जा रही है केंद्र सरकार, राज्य में कुल 2764 शत्रु संपत्तियां

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Image Credits: Patrika/PNG Images

February 10, 2020

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मोदी सरकार ने बंगाल में 2,764 संपत्तियों के संरक्षक शत्रु संपत्ति कार्यालय ने कानूनी बाधाओं से मुक्त ऐसी संपत्तियों की एक सूची बनानी शुरू कर दी है, जिसे पहले चरण में बेचा जा सके।

2017 में, केंद्र सरकार ने शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 में संशोधन किया था और इसमें यह तय किया गया था कि 1962, 1965 और 1971 के बाद भारत छोड़ने वालों के उत्तराधिकारी इन शत्रु संपत्तियों के स्वामित्व का दावा नहीं कर सकते हैं। जो लोग बंटवारे या 1965 में और 1971 की लड़ाई के बाद पाकिस्तान चले गए और वहां की नागरिकता ले ली थी, उनकी सारी अचल संपत्ति ‘शत्रु संपत्ति’ घोषित कर दी गई थी। इसके तहत चीन के साथ 1962 के युद्ध के बाद देश छोड़ चुके लोगों की संपत्ति भी शामिल है।

 

शत्रु संपत्तियों के उत्तराधिकारी नहीं कर सकते दावा

1962, 1965 और 1971 के बाद भारत छोड़ने वालों के उत्तराधिकारी इन शत्रु संपत्तियों के स्वामित्व का दावा नहीं कर सकते हैं। जनवरी 2020 के आखिर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूरे भारत में 9,400 से अधिक शत्रु संपत्तियों की नीलामी करने के लिए एक पैनल का गठन किया, जिससे सरकारी खजाने को लगभग 1 लाख करोड़ रुपये मिलने की संभावना है।

 

बंगाल में सबसे पहली नीलामी की तैयारी

इसके बाद भारत के लिए शत्रु संपत्ति के कस्टोडियन ने बंगाल में नीलाम होने वाली संपत्तियों का आकलन करने और बिक्री के लिए पहला लॉट रखने से पहले एक कानूनी रिपोर्ट तैयार करने पर काम शुरू किया। पिछले साल केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को जनता के उपयोग में लाने के लिए कुछ शत्रु संपत्तियों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी।
भारत में शत्रु संपत्ति के कस्टोडियन एक अधिकारी ने कहा, ‘पायलट प्रॉजेक्ट में पहला कदम एक संपत्ति को मुक्त करना और शत्रु संपत्ति अधिनियम की धारा 18 के तहत कार्रवाई करना है।’

 

 मालदा-मुर्शिदाबाद में ज्यादातर संपत्तियां

उन्होंने कहा, ‘विभाग का एक विंग संपत्तियों को कानूनी अवरोधों से मुक्त बनाने में व्यस्त है।’ अब तक, बंगाल में ज्यादातर शत्रु संपत्तियों को कॉर्पोरेट्स या लोगों को किराए पर दिया जाता है। यह किराया कस्टोडियन ऑफिस वसूलता है। संपत्तियों का रखरखाव कभी-कभी चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि किरायेदार संपत्ति की प्रकृति को बदल नहीं सकता है। एक अधिकारी ने बताया, ‘इन संपत्तियों का एक बड़ा हिस्सा मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में है। कोलकाता में कुछ प्रतिष्ठित इमारतें भी हैं, जिनका उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है।’

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