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जामिया प्रदर्शनकारी : “दिल्ली पुलिस ने मेरे प्राइवेट पार्ट्स पर जूतों से मारा”

तर्कसंगत

Image Credits: Diary Of Jamian/Twitter

February 11, 2020

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दिल्ली में नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में संसद तक जुलूस निकालने की कोशिश कर रहे जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने दिल्ली पुलिस पर पिटाई करने का आरोप लगाया है. छात्रों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और पिटाई करते हुए नाज़ुक अंगों को भी निशाना बनाया. घायलों में लड़कों के अलावा लड़कियां भी शामिल हैं.

संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ सोमवार को जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों ने संसद की ओर मार्च निकालने की कोशिश की. इस दौरान पुलिस द्वारा इन्हें रोके जाने पर प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस कर्मियों के बीच भिड़ंत हो गई. पीटीआई के मुताबिक धक्‍का-मुक्‍की में करीब 35 छात्रों को चोटें आई हैं जिनका इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा है.

पुलिस पर आरोप है कि उन्होंने लड़कियों को उनकी छाती पर लाठियों से मारा, उनके निजी अंगों पर लात मारी और उन्हें पेट में घूंसा मारा. जामिया नगर में प्रदर्शनकारियों के एक समूह पर एक व्यक्ति द्वारा गोली चलाने के बाद एक छात्र को गोली लगने के 10 दिन बाद यह घटना घटी. घटना के बाद, छात्रों को उनके निजी भागों में चोटों के लिए जामिया स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था. स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों ने कहा है कि कुछ छात्रों को अल-शिफा अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया है.

इंडिया टुडे ने डॉक्टरों के हवाले से कहा, “10 से अधिक महिला छात्रों को उनके निजी अंगों पर मारा गया है. हमने कुछ प्रदर्शनकारियों पर गहरी चोटें पाई हैं. ” उन्होंने कहा, “कुछ छात्रों को आंतरिक चोट भी लगी है क्योंकि उन्हें लाठियों से सीने पर चोट लगी है,” उन्होंने कहा. स्वास्थ्य केंद्र में इलाज करवा रही एक छात्रा ने इंडिया टुडे को बताया कि एक महिला सिपाही ने उसका बुर्का उतार कर उसके निजी अंगों पर लाठी से वार किया. “मुझे मेरे निजी अंगों पर जूते से चोट लगी है. महिला पुलिस में से एक ने मेरा बुर्का उतार दिया और मेरे निजी अंगों पर एक लाठी से प्रहार किया.”

एक अन्य छात्र ने कहा, “मैं उनसे कह रही थी, कृपया हमें विरोध करने दें, लेकिन वे हमें धकेल रहे थे. हम भाग नहीं सकते थे. वे नीचे के प्राइवेट पार्ट्स पर वार कर रहे थे. मैं दो बार बेहोश हुई” एक अन्य छात्र ने कहा. एक छात्र ने यह भी कहा कि पुलिसवाले उन्हें बेल्ट के नीचे पीट रहे थे ताकि कैमरा की नज़र उन पर न पड़ सके. “वे हमें इतनी ज़ोर से धकेल रहे थे कि हम चार-पांच बार भगदड़ में फंस गए,” छात्रा ने कहा. “ऐसी महिलाएं भी हैं जिन्हें उनके संवेदनशील भागों में चोट लगी है. मुझे कोहनी और पेट में चोट लगी है. वे हमें बेल्ट के नीचे लाठी से मार रहे थे ताकि यह कैमरे में न आए.”

अल-शिफा अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, अल शिफा अस्पताल में 16 प्रदर्शनकारियों को भर्ती कराया गया था, जिनमें से आठ को घर भेज दिया गया है। इनमें पांच महिलाएं हैं. उनमें से एक को “छाती और पेट की चोट और श्वसन समस्याओं” के लिए आईसीयू में रखा गया है, जिसकी स्थिति अभी स्थिर है. दूसरे घायल प्रदर्शनकारी बेहोश हालत में आये थे. “छात्रों में से एक को गंभीर चोटें आई हैं, हमने उसे आईसीयू में स्थानांतरित कर दिया है,” उन्होंने कहा.

प्रदर्शनकारियों को अनुमति नहीं थी

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ पुलिस और यूनिवर्सिटी की अधिकारियों के अपील के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने अपना विरोध मार्च ख़त्म करने से इनकार कर दिया. पुलिस और यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना था कि इस प्रदर्शन की इजाज़त नहीं ली गई थी.

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रॉक्टर वसीम अहमद ने छात्रों से कहा, “मैं छात्रों से अपील करता हूं कि वे यूनिवर्सिटी की तरफ़ लौट जाएं. क़ानून का सम्मान करें और शांति से वापस जाएं.”

जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के आस-पास के इलाकों में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बीच प्रदर्शनकारियों ने यूनिवर्सिटी के गेट नंबर सात से अपना मार्च शुरू किया. इस दौरान पुरुष प्रदर्शनकारियों ने सड़क के दोनों तरफ़ मानव श्रृंखला बनाई हुई थी जबकि महिलाएं हाथ में तिरंगा लेकर ‘हल्ला बोल’ का नारा लगाती हुई आगे बढ़ रही थीं.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से संसद तक सीएए और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) के खिलाफ मार्च निकालने वाली “हिंसक भीड़” के खिलाफ मामला दर्ज किया है. पुलिस ने कहा, “दिल्ली पुलिस, विशेष रूप से दक्षिण-पूर्व जिले, ने होली फैमिली अस्पताल के पास आक्रामक जामिया स्टूडेंट्स को संभालने में बहुत धैर्य दिखाया। वे पुलिस बैरिकेड्स के माध्यम से उनका रास्ता रोक रहे थे और बिना अनुमति संसद में जाने की उनके प्रयास को भी रोक रहे थे,” पुलिस ने कहा.  बयान में कहा गया, “कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत हिंसक भीड़ के खिलाफ मामला दर्ज किया जा रहा है.”

जामिया मिलिया इस्लामिया की वाइस चांसलर नजमा अख्तर, दिल्ली पुलिस के साथ हुए विवाद के दौरान घायल हुए छात्रों को देखने के लिए, सोमवार रात अल-शिफ़ा अस्पताल भी गयीं.

Netizens की प्रतिक्रिया

 

घटना से जुड़े वीडियो क्लिप और तस्वीरें ट्विटर पर आने के बाद, नेटिज़ेंस ने दिल्ली पुलिस की आलोचना की, जिस तरह से दिल्ली पुलिस ने इस घटना को गैरज़िम्मेदाराना ढंग से संभालने का प्रयास किया.

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