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असम में सरकार का बड़ा फैसला, बंद करेगी सारे धार्मिक विद्यालय

तर्कसंगत

Image Credits: Urdu News/Jansatta

February 13, 2020

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असम सरकार ने गुरुवार को बड़ा फैसला लेते हुए राज्य के मदरसे और संस्कृत स्कूल को हाई स्कूल में बदलने का फैसला लिया है। राज्य के शिक्षा मंत्री हेमंत विश्व सरमा ने कहा कि अरबी या अन्य धार्मिक शिक्षा देने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है। इसलिए हमने अगले चार से पांच महीनों में सरकार द्वारा संचालित मदरसों को बंद करने का फैसला किया है।

 

 

राज्य अब धार्मिक संस्थानों को फंड नहीं दे सकते

राज्य के मंत्री हेमंत बिस्व सरमा का कहना है कि हमने सभी मदरसों और संस्कृत के स्कूलों को हाई स्कूलों और हायर सेकंडरी स्कूलों में बदलने का फैसला किया है। क्योंकि राज्य अब धार्मिक संस्थानों को फंड नहीं दे सकते। हालांकि, गैर सरकारी संगठनों/सामाजिक संगठनों द्वारा संचालित मदरसे चलाए जाएंगे। लेकिन ये एक नियामक ढांचे के भीतर चलाए जाएंगे।

असम सरकार के मदरसा शिक्षा बोर्ड के मुताबिक, राज्य सरकार द्वारा संचालित कुल 612 मदरसे हैं। इन मदरसों में इस्लामिक शिक्षा देने के साथ-साथ अन्य विषयों की भी पढ़ाई होती है।

खोले जाएंगे 10वीं और 12वीं के नए स्कूल

मदरसा के साथ-साथ सरकार ने सरकार के अनुदान पर चलने वाले 101 संस्कृत विद्यालयों को भी बंद करने का फैसला किया है। इन संस्कृत विद्यालयों में वैदिक शिक्षा के साथ-साथ अन्य विषयों की भी पढ़ाई होती है। इन मदरसों और संस्कृत विद्यालयों की जगह 10वीं और 12वीं के नए स्कूल खोले जाएंगे। मंत्री ने कहा कि सरकार को प्राइवेट मदरसों और संस्कृत स्कूलों से कोई आपत्ति नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि रिटायरमेंट तक इन स्कूलों के शिक्षकों को सैलरी मिलती रहेगी, लेकिन वे कोई क्लास नहीं ले सकेंगे।

इससे पहले मई 2017 में हिमंत विश्व शर्मा ने एक फैसला लिया था जिसमें कहा गया था कि राज्य के सभी मदरसों और संस्कृत स्कूलों में कंप्यूटर की पढ़ाई होगी।

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