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फैक्ट चेक : जामिया के छात्र के हाथ में पर्स था पत्थर नहीं, ऑल्ट न्यूज़ का खुलासा

तर्कसंगत

February 18, 2020

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जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी द्वारा जारी वीडियो से तिलमिलाई दिल्ली पुलिस ने जामिया मिल्लिया के छात्रों को फंसाने के लिए जो वीडियो जारी किया था, उस वीडियो को लेकर दिल्ली पुलिस खुद ही फंस गई है. छात्र के हाथ में पत्थर होने का पुलिस का दावा और उसके द्वारा जारी किया गया वीडियो झूठा साबित हुआ है. पुलिस ने अपने जिस वीडियो में यह दावा किया था कि एक छात्र के हाथ में पत्थर है, उस वीडियो की ऑल्ट न्यूज़ ने पड़ताल कर पुलिस और न्यूज़ चैनलों के दावों को गलत साबित कर दिया है. ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि इस वीडियो में छात्र के हाथ में पर्स है, जिसे पुलिस पत्थर बता रही है, और छात्र के दूसरे हाथ में मोबाइल है.

3 दिसंबर को सीएए के खिलाफ जामिया के छात्रों के प्रदर्शन के बाद 15 दिसंबर को जामिया परिसर में हिंसा हुई थी, जहां पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया था, साथ ही लाइब्रेरी में आंसू गैस फेंकी गयी थी.

पुलिस द्वारा लाइब्रेरी में घुसने और लाठीचार्ज करने की बात से इनकार किया गया था, हालांकि 16 फरवरी को सामने आए एक वीडियो में पुलिस लाइब्रेरी के अंदर नजर आयी थी. इसी शाम एक दिल्ली पुलिस द्वारा एक अन्य वीडियो जारी किया गया था, जिसमें उनके अनुसार ‘दंगाई’ लाइब्रेरी में घुसे थे.

 

 

इस वीडियो में कई छात्र लाइब्रेरी में घुसकर दरवाजे के आगे फर्नीचर लगाकर उसे ब्लॉक कर रहे थे. इनमें से केवल एक व्यक्ति मास्क पहने दिखता है, वहीं एक अन्य शख्स के हाथ में कोई चीज है, जिसे पुलिस द्वारा ‘पत्थर’ बताया जा रहा है.

 

कई मीडिया आये झांसे में

बीते 16 फरवरी को इंडिया टुडे द्वारा इसी वीडियो को ‘एक्सक्लूसिव’ फुटेज बताते हुए चलाया. इंडिया टुडे को यह फुटेज दिल्ली पुलिस की विशेष जांच दल द्वारा दिया गया था, जिसे उसने ‘प्रमाणिक’ कहकर चलाया और यह दावा किया गया कि छात्र पत्थर लेकर लाइब्रेरी की रीडिंग रूम में घुसे थे. अन्य न्यूज चैनलों ने भी यह दावा करते हुए इस फुटेज को चलाया. ऐसा करने वाले अंग्रेजी मीडिया में टाइम्स ऑफ इंडिया, मिरर नॉउ, रिपब्लिक भारत, टाइम्स नॉउ, द क्विंट और डीएनए शामिल है. वहीं हिंदी चैनलों में जी न्यूज, आज तक, इंडिया टीवी, एनडीटीवी इंडिया और न्यूज नेशन शामिल है.

 

ऑल्ट न्यूज़ का खुलासा

ऑल्ट न्यूज़ ने पड़ताल के दौरान जब वीडियो को स्लो करके देखा तो छात्र के हाथ में पर्स दिखा न कि पत्थर. ऑल्ट न्यूज़ द्वारा जारी तस्वीर में आप देख सकते हैं कि छात्र के हाथ में पर्स है, पत्थर नहीं है. पुलिस द्वारा जारी वीडियो को लेकर बीजेपी के नेताओं ने भी जामिया के छात्रों पर सवाल खड़े किए थे. लेकिन, ऑल्ट न्यूज़ की पड़ताल के बाद न्यूज़ चैनल, बीजेपी और पुलिस सन्नाटे में है. अब तक पुलिस या फिर बीजेपी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

 

 

ऑल्ट न्यूज़ ने वीडियो को धीमा कर दिया और इसे फ्रेम-दर-फ्रेम देखा. ऐसा करने पर ऑल्ट न्यूज ने पाया कि छात्र ने पत्थर नहीं, बल्कि अपने एक हाथ में पर्स लिए हुए था और दूसरे हाथ में एक सामान (संभवतः फोन) था.

हालांकि मीडिया संस्थानों ने बिना जांच-पड़ताल के पुलिस के पक्ष को ही जोर-शोर तरीके से चलाया. जिस छात्र को पत्थरबाज के रूप में प्रचारित किया गया उसने अपने एक हाथ में पर्स और दूसरे हाथ में सपाट आकार वाला कोई सामान ले रखा था.

गौरतलब है कि जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी द्वारा जारी वीडियो से, जिसमें दिल्ली पुलिस जामिया लाइब्रेरी के अंदर तोड़फोड़ और छात्रों पर लाठीचार्ज करती हुई नजर आ रही है, दिल्ली पुलिस परेशान है. इस वीडियो से तिलमिलाई दिल्ली पुलिस ने छात्रों को फंसाने के लिए एक दूसरा वीडियो जारी किया था और यह साबित करने की कोशिश की कि छात्र पथराव कर रहे थे. पुलिस ने अपने दावे में कहा था कि चूंकि छात्र पथराव कर रहे थे, ऐसे में वह लाइब्रेरी में उन उपद्रवी छात्रों को पकड़ने के लिए गई थी.

 

 

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