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यूपीः सीएए-एनआरसी प्रदर्शनों में 23 लोगों की मौत से शुरू एक सत्याग्रह जिस पर पुलिस की पहरेदारी का भी असर नहीं

तर्कसंगत

February 18, 2020

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चौरीचौरा गोरखपुर से राजघाट नई दिल्ली के लिए निकली ‘नागरिक सत्याग्रह पदयात्रा’ लगभग 200 किलोमीटर की यात्रा करके मंगलवार 11 फरवरी को गाजीपुर पहुंची। जहां पर पुलिस ने सत्याग्रही पदयात्रियों को शांतिभंग की धाराओं में जेल भेज दिया था। गिरफ्तार होने वाले लोगों की सूची में प्रियेश पांडेय, अतुल यादव, मुरारी कुमार, मनीष शर्मा, सुश्री प्रदीपिका सारस्वत, शेष नारायण ओझा, नीरज राय, अनन्त प्रकाश शुक्ला, राज अभिषेक का नाम शामिल है। इसमें से अधिकतर लोग बीएचयू के छात्र थे।

 



 

गिरफ्तार होने से पहले प्रदीपिका ने 10 फरवरी को फेसबुक पर लिखा था– ‘कल शाम से लोकल इंटेलीजेंस और पुलिस यात्रियों के चक्कर काट रही है, तस्वीरें खींच रही है, वीडियो उतार रही है। स्टेट इतना डरा हुआ है कि चंद लोगों को शांति और सौहार्द की बात करते हुए नहीं देख पा रहा है। यह यात्रा एक पाठशाला है, जहां महज पैदल चलते हुए हम सीखते हैं कि कोई जगह कश्मीर कैसे बनती है।’

बुधवार को जब इनकी ज़मानत की अर्जी स्थानीय एसडीएम के यहां लगायी गयी तो उन्होंने बेल बॉल्ड भरने का जो आदेश दिया, वह अपने आप में बेहद खतरनाक और चौंकाने वाला था। इस शर्त के मुताबिक, जमानत के लिए प्रतिव्यक्ति 2.5 लाख के दो बेल बॉन्ड भरे जाएं और साथ ही हर बंदी के लिए गारंटर के तौर पर दो राजपत्रित अधिकारी जमानत दें। मालूम हो कि इन दस सत्याग्रहियों को आइपीसी की धारा 107/16 और 151 के तहत गिरफ्तार किया गया था। बुधवार को जब बेल की अर्जी लगायी गयी तो एसडीएम ने इतनी सख्त शर्तें थोप दीं। हालांकि रविवार को एसडीएम ने निजी मुचलके पर सभी को छोड़ दिया।

 



सत्याग्रह की शुरुआत क्यों ?

20 दिसंबर 2019 को उत्तर प्रदेश में सीएए-एनआरसी के प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की हिंसा और गिरफ्तारियों के बाद कुछ विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने मिलकर कई फैक्ट-फाइंडिंग टीम बनाई थी। इस टीम ने शहर-शहर जाकर पीड़ितों से बातचीत की और सच पता करने की कोशिश की। इन प्रदर्शनों के दौरान कुल 23 मौतें हुई थीं।

इनके सामने अगला सवाल था कि अब क्या किया जाए। हिंसा की कहानियां इतनी मार्मिक थीं कि उन्हें सुनने के बाद वापस आम ज़िंदगी में लौट जाना आसान नहीं था। तय किया गया कि हम उत्तर प्रदेश जाएंगे, लोगों से मिलेंगे और उन्हें बताएंगे कि हमें हिंदू-मुसलमान में बंटने से बचना होगा। इस तरह नागरिक सत्याग्रह पदयात्रा का विचार बना।

 

सत्याग्रह की शुरुआत

यूपी में CAA और NRC को लेकर प्रोटेस्ट हुए थे. युवाओं ने मिलकर एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनायी. टीम ने तय किया की हिंसा प्रभावित जगहों पर पहुंचकर गांधी का संदेश देंगे. उनके द्वारा जारी की गयी विज्ञप्ति की बात करें तो ये लोग भाईचारे, अमन और अहिंसा की बात करेंगे.

नागरिक सत्याग्रह पदयात्रा की शुरुआत चौरी-चौरा के शहीद स्मारक से गत 2 फरवरी 2020 को हुई थी। यात्रा का प्रथम चरण बनारस में 16 फरवरी 2020 को बनारस में सम्पन्न होना तय था। पदयात्री विकास सिंह के अनुसार, यह यात्रा चौरी-चौरा से इसलिए शुरू की गई क्योंकि ‘यह वो जगह थी जहां 1922 में यानी लगभग सौ साल पहले अंग्रेजों के खिलाफ हुई हिंसा के कारण गांधी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया था। उस दिन ऐसे आज़ाद हिंदुस्तान की तासीर तय हो गई थी जहां हिंसा के लिए कोई जगह नहीं थी, फिर चाहे वो हमारा शोषक, हमारा दुश्मन ही क्यों न हो।

 

रिहाई के बाद डिटेन

रविवार 16 तारीख की देर शाम जेल से रिहा हुए कुछ सत्याग्रहियों को गाजीपुर पुलिस ने सोमवार की सुबह पदयात्रा शुरू करते ही डिटेन कर लिया। पुलिस ने सभी पदयात्रियों  को वहां से 60 किलोमीटर दूर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के द्वार पर आकर रिहा किया। जैसे ही ये सत्याग्रही बीएचयू गेट पर पहुंचे। वहाँ पर उनका माला पहनाकर स्वागत किया गया।

 



गाजीपुर पुलिस की गाड़ी में बैठाकर बीएचयू पहुंचाए गए प्रियेश बताते हैं कि, ‘हम लोग जहां रात में रुके थे, वहां अगले सुबह पुलिस आई और हमें अपनी गाड़ी में बैठा ली। जब हमने पुलिस वालों से पूछा तो पुलिस ने बताया कि हम लोगों को यात्रा की अनुमति नहीं है, जिले की शांति व्यवस्था भंग होने का खतरा है, इसलिए हमें बाहर ले जाया जा रहा है।

सत्याग्रही नीरज राय ने बताया कि कुल 10 लोग गाजीपुर जेल में बंद थे, जिसमें बीएचयू के 5 लोग थे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र हमारे साथ थे। हम लोग चौरी-चौरा से पदयात्रा कर रहे थे, जो दिल्ली राजघाट पर समाप्त होता। उन्होंने बताया कि अपनी यात्रा के माध्यम से हम गांधी और आंबेडकर के संदेश को समाज तक पहुंचा रहे थे। गाजीपुर में हमें गिरफ्तार कर लिया गया। हमारे ऊपर आरोप लगा कि हम लोग शांति भंग कर रहे हैं।

 

सत्याग्रहियों से प्रशासन को डर क्यों?

एक अन्य पदयात्री रजत तर्कसंगत को बताते हैं कि ‘हमारी सत्याग्रह यात्रा चौरीचौरा से शुरू होकर राजघाट को जा रही थी। इसे पुलिस ने ग़ाज़ीपुर में रोक दिया। हमें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया, लेकिन इस गिरफ्तारी ने पूरे ग़ाज़ीपुर जिले को एकजुट कर दिया। आज जब हमने दोबारा यात्रा शुरू की है तो 20-25 स्थानीय लोग हमारे साथ जुड़ गए हैं। जिसमें छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हैं। हम अमन, शांति और सद्भावना का संदेश लेकर चल रहे हैं। हम देश को हिंदू-मुस्लिम, जात-पात और बंटवारे की बातें छोड़कर रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि के मुद्दों पर चर्चा की बात कर रहे हैं।’

जेल से रिहा होकर आए पदयात्री प्रियेश पाण्डेय ने कहा कि ‘दस लोगों के पदयात्रा से सरकार को किस बात का डर है। सरकार आखिर चाहती क्या है? हम तो बस लोगों को जागरूक करने के लिए निकले हैं।’ एक अन्य सत्यहाग्रही अक्षय यादव कहते हैं कि, ‘जिस तरह देश का माहौल है, ऐसे में गांधी और आंबेडकर की राह पर चलकर लोगों को जागरूक करना है। हम वही काम कर रहे हैं।’
आपको बता दें कि पदयात्रा करने वाले सत्याग्रहियों में से चार लोगों ने इस यात्रा को सोमवार की सुबह ग़ाज़ीपुर से दोबारा शुरू किया है। इसमें बीएचयू के छात्र विकास सिंह, राज अभिषेक, पत्रकार प्रदीपिका सारस्वत और सामाजिक कार्यकर्ता मनीष शामिल हैं।

 



पदयात्रा शुरू करने में सफल रहे सत्याग्रही विकास सिंह ने तर्कसंगत से कहा, “मैं अब भी सोच रहा हूं कि पुलिस एक पैदल मार्च से इतना डरती क्यों है जिसमें लोग गांधी के विचारों के बारे में बात कर रहे हैं। यह देश हमेशा विविध विचारों वाला देश रहा है। नफरत और विभाजन की राजनीति नही होनी चाहिए। देश में इसकी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि यह छात्रों, युवाओं, किसानों, एससी-एसटी और अन्य वंचित समुदायों के मुद्दों को छुपाता है। हम शांति और सच्चाई की इस यात्रा को जारी रखेंगे। गांधी जीतेंगे। विकास आगे कहते हैं कि ‘पहले की योजना के अनुसार यह यात्रा कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी और हम राजघाट दिल्ली तक जाएंगे।’

बनारस पहुँचे सत्याग्रहियों ने विश्वविद्यालय परिसर में नागरिक सत्याग्रह की घोषणा की और कहा, आने वाले 3 दिन परिसर में सत्याग्रह में शामिल पदयात्री छात्रावासों और कक्षाओं तक जाएंगे और इस सत्याग्रह के बारे में बताएंगे। नागरिक सत्याग्रह फेज 2 के कार्यक्रम, सत्याग्रहियों की दूसरी टोली के बनारस पहुँचने के बाद तय की जाएगी।

 



 

गौरतलब है कि सत्याग्रह पदयात्रा चौरीचौरा, गोरखपुर से राजघाट नई दिल्ली तक निकाली जानी थी। ‘नागरिक सत्याग्रह पदयात्रा’ 200 किलोमीटर की यात्रा करके 11 फरवरी को गाजीपुर पहुंची, जहां स्वागत करने के स्थान पर पुलिस ने सत्याग्रही पदयात्रियों को शांति को भंग किए जाने समेत धारा 107/16 और 151 के तहत गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें रविवार की देर शाम निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया।

 

 

लेखिका : रिज़वाना तबस्सुम 

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