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बढ़ती फ़ीस और सस्ती शिक्षा परिचर्चा में हिस्सा लेने पर निलंबन के विरुद्ध भूख हड़ताल पर बैठे IIMC के छात्र

तर्कसंगत

February 21, 2020

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हाल के समय में हम सरकार और स्टूडेंट्स के बीच झड़प की कई खबरें देख रहे हैं. JNU और JAMIA इसके ताज़ा उदाहरण है. ये वो दो यूनिवर्सिटी है जिसने नेशनल मीडिया पर अपनी जगह बनायीं मगर देश के दूसरे शिक्षण संस्थान की आवाज़ देश के अलग अलग कोनो से दिल्ली के मीडिया हाउस के कानों तक नहीं पहुँच पायी. अगली कहानी फिर से एक शिक्षण संस्थान की ही है और वो भी देश की राजधानी, केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन आने वाला मीडिया संस्थान IIMC की है. दिल्ली जहाँ की स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था का मॉडल  गुजरात मॉडल की यादों को धुंधला कर चला है. IIMC के स्टूडेंट्स की मायूसी भी उसी दिल्ली से है IIMC को हम भारतीय जनसंचार संस्थान के नाम से भी जानते हैं. यहाँ के छात्र 18 फरवरी से भूख हड़ताल पर बैठे हैं.

 

IIMC है क्या और इसकी स्थिति क्या है ?

IIMC सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन आने वाला मीडिया संस्थान है जहाँ संचालित विभिन्न कोर्सेज़ की फीस लाख से पौने दो लाख रुपये तक है. छात्रों के मुताबिक संस्थान में संचालित ये सभी पाठ्यक्रम केवल 9 महीने के हैं यानी कि इतने कम समय के कोर्स के लिए इतनी महंगी फीस.

2019-20 सेशन के लिए हिंदी और अंग्रेजी पत्रकारिता की फीस बढ़ाकर 95,500 रुपये कर दी गई है. पिछले सेशन में ये फीस थी 79,000.  उर्दू पत्रकारिता की फीस 53,500 कर दी गई है. ये 2018-19 में 43,000 रुपये थी. रेडियो एवं टीवी पत्रकारिता की फीस 1,68,500 रुपये कर दी गई है, जो पिछले सेशन में 1,45,000 थी. विज्ञापन एवं जनसंपर्क कोर्स की फीस 1,31,500 रुपये हो गई है. पिछले सेशन में ये फीस 1,12,000 थी.

हॉस्टल की फीस भी काफ़ी महंगी है और वो भी हर छात्र को नसीब नहीं होता. यहाँ छात्राओं को सिंगल कमरे के लिए 3500 रु. महीना और तीन छात्रों को एक साथ में रहने वाले कमरे के लिए 1750 रु. महीना देना होता है. छात्रों ने अपने आंदोलन की शुरुआत इन्हीं मुद्दों के साथ दो महीने पहले दिसंबर में 14 दिनों तक की थी और अब इसकी शुरुआत ठीक वहीं से हुई है जहाँ इसे विराम दिया गया था.

 

दिसंबर महीने से कर रहे विरोध

पिछली बार 3 दिसंबर को IIMC के छात्र कैंपस में धरने पर बैठे थे. उस समय भी इनकी मांंग थी कि फीस बढ़ोतरी पर एग्जक्यूटिव काउन्सिल की मीटिंग बुलाई जाए. उनकी तरफ से कोई सकरात्मक जवाब न मिलने की सूरत में उन्होनें भूख हड़ताल की शुरआत की. कॉलेज प्रशासन सकते में आकर छात्रों की बात पर राजी हो गयी और 17 दिसंबर को प्रशासन ने सर्कुलर जारी किया. इसमें दो मुख्य बातें थीं.

पहली- IIMC की प्रशासनिक इकाई एक्जीक्यूटिव कांउसिल की बैठक 2 जनवरी को बुलाई जाएगी. इस बैठक में बढ़ी हुई फीस से संबधित मुद्दों पर बात होगी.

दूसरी- 11 दिसंबर को जारी हुआ IIMC का सर्कुलर निरस्त किया जा रहा है. इसमें नया सर्कुलर जारी होने के बाद छात्रों ने धरना समाप्त कर दिया.

धरना समाप्त होने के बाद 2 जनवरी को वादे के अनुरूप मिटंग भी हुई. संस्थान के चेयरमैन रवि मित्तल ने महानिदेशक को ये निर्देश दिया कि फीस को लेकर एक समिति बनाने का निर्देश दिया. समिति को कहा गया कि फीस के सारे पक्षों पर अध्ययन करके संस्थान मंत्रालय को 2 मार्च तक एक रिपोर्ट सौंपे.

 

एफोर्डेबल एजुकेशन पर टॉक शो के कारण ग्यारह छात्र निलंबित

इस मीटिंग के बाद 9 फरवरी को IIMC में एलुमनाई एसोसिएशन IIMCAA का एक कार्यक्रम था जिसमें वर्तमान सत्र के कुछ छात्रों ने एक दिन पूर्व प्रशासन से यह अनुमति मांगी कि वो एफोर्डेबल एजुकेशन पर एक टॉक शो आयोजित करना चाहते हैं. संस्थान ने सीधे सीधे परमिशन देने से मना किया बल्कि छात्रों अनुशासनात्मक कारवाई करने की भी धमकी दी. मगर छात्रों ने इस धमकी को अपने अधिकारों का हनन मानते हुए इसका विरोध किया और टॉक शो भी कराइ जिसमें सस्ती शिक्षा पर एक परिचर्चा हुई.

तर्कसंगत से बात करते हुए छात्र ऋषिकेश शर्मा ने बताया कि इस पूरे कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने अपने कार्यक्रम से न तो संस्थान में हो रहे दूसरे कार्यक्रम में कोई बाधा डाला और न ही कोई अनुशासनहीनता दिखाई. संस्थान छात्रों के इस कदम से खासा नाराज़ हुआ और आनन फानन में कारवाई करते हुए 11 छात्रों को निलंबित कर दिया और अगले 5 दिन में कारण बताओ नोटिस भी जारी किया कि उनके खिलाफ कदम क्यों न उठाये जाये ? संस्थान ने इसे कोड ऑफ कंडक्ट का वॉयलेशन बताया छात्रों ने प्रशासन से यह जवाब मांगा कि वो कोड ऑफ कंडक्ट है क्या जिसके अवहेलना की बात कॉलेज प्रशासन कर रहा है ? और इसके उपरांत सजा का प्रावधान क्या है? लेकिन बिना बताये छात्रों के निलंबन को बढ़ा दिया गया ये कहकर कि उन्होंने जवाब नहीं दिया है.

 

निलंबन के बाद ही ले आये नया सर्कुलर

कॉलेज प्रशासन ने छात्रों को निलंबित करने के बाद ही उनको डराने के लिए नया फी सर्कुलर निकाल दिया. जो कि पिछली मीटिंग में हुए फैसलों का उल्लंघन था. छात्रों का कहना है कि शायद प्रशासन की ये सोच रही होगी कि निलंबन के डर से बच्चे अब बढ़ी हुई फीस भर देंगे.

तर्कसंगत को ऋषिकेश शर्मा ने ये भी बताया कि 2 जनवरी की बैठक में लिए गए फैसले की जानकारी उन्हें 10 जनवरी को दी गयी और इसके बाद भी फीस के संबंध में बनाये जाने वाली समिति के लिए प्रशासन क्या कर रही है इसका कोई भी ज़िक्र छात्रों के साथ नहीं किया गया. छात्रों का आरोप है कि कमिटी बेकडेट में बनायी गयी है यानी के उनके भूख हड़ताल में 18 फरवरी के बैठने के बाद ही बनी है मगर कागज़ो पर 17 फरवरी दिखाया जा रहा है, क्यूंकि कैंपस में उनके भूख हड़ताल पर बैठने से पहले प्रशासन हरकत में नहीं आयी थी.

 

छात्रों को बांटने की कोशिश

भूख हड़ताल के बावजूद बजाये कि प्रशासन के तरफ से कोई बातचीत होती, कॉलेज ने छात्रों की सुध तक नहीं ली. खाना पूर्ती के लिए एक ओपन हाउस कराया गया जहाँ कॉलेज के तरफ से एकतरफा बयानबाज़ी हुई और भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के बारे में झूठ बोलते दिखे. सबसे आश्चर्य की बात पत्रकारिता के कॉलेज में ही भावी पत्रकार को बोलने का मौका नहीं दिया गया. छात्रों के पास प्रशासन द्वारा बोले गए हर झूठ का मुंहतोड़ जवाब था मगर छात्रों को मौका ही नहीं मिला. छात्रों का कहना है कि कॉलेज निलंबित छत्रों की नकरात्मक छवि बनाकर फीस कम करने के उनके आंदोलन को कमज़ोर बनाने की कोशिश कर रहा है मगर इस मुद्दे पर कॉलेज के सभी छात्र एकजुट हैं.

 

छात्रों की मांग क्या हैं ?

छात्रों ने पत्र लिखकर तीन मांगे उठायी हैं:

  • पहली कि नए फीस सर्कुलर को तुरंत रद्द किया जाए क्योंकि ये पिछले सर्कुलर के उलट है और ये संस्थान की वादाखिलाफी है.
  • दूसरी मांग कि कमिटी के कामकाज की जानकारी दी जाए.
  • तीसरी, कि छात्रों का निलंबन वापस लिया जाए.

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